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कॉलेज बचाने के लिए समस्तीपुर से पटना तक पदयात्रा, पुलिस ने सचिवालय के पास रोका

KSR कॉलेज बचाने के लिए लोकभवन मार्च किया गया. ग्रामीणों ने कहा- विकास चाहिए, विरासत की बलि देकर नहीं. रिपोर्ट- कृष्णनंदन.

SAMASTIPUR TO PATNA PADYATRA
ग्रामीणों का हल्ला बोल (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : August 18, 2026 at 1:54 PM IST

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पटना : समस्तीपुर के सरायरंजन स्थित केएसआर कॉलेज को पटना-पूर्णिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे की जद से बचाने की मांग को लेकर ग्रामीणों का आंदोलन अब राजधानी पटना तक पहुंच गया है. केदार संत रामाश्रय कॉलेज (KSR) को बचाने के लिए सरायरंजन से सैकड़ों की संख्या में ग्रामीण पदयात्रा करते हुए मंगलवार को पटना पहुंचे.

ग्रामीणों ने किया लोकभवन मार्च : पदयात्रा में बुजुर्ग महिलाओं से लेकर युवाओं तक बड़ी संख्या में लोग शामिल रहे. पटना पहुंचने के बाद ग्रामीणों ने विधानसभा से लोकभवन की ओर मार्च शुरू किया, लेकिन सचिवालय के पास कृष्ण बल्लभ सहाय गोलंबर पर पुलिस प्रशासन ने उन्हें रोक दिया. काफी देर तक चले घटनाक्रम के बाद आंदोलनकारियों के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को मुख्यमंत्री से मुलाकात के लिए ले जाया गया.

देखें वीडियो (ETV Bharat)

ग्रामीणों का कहना है कि सरायरंजन का केएसआर कॉलेज इलाके की शैक्षणिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र है. इसे एक्सप्रेसवे के निर्माण की जद में आने से बचाया जाना चाहिए. आंदोलनकारियों ने सरकार से मांग की है कि एक्सप्रेसवे का निर्माण ऐसा हो, जिससे कॉलेज का अस्तित्व सुरक्षित रहे.

1981 से शिक्षा का केंद्र है KSR कॉलेज : आंदोलन में शामिल ग्रामीण नीलकमल यादव ने कहा कि उनका कॉलेज वर्ष 1981 से क्षेत्र में शिक्षा का केंद्र बना हुआ है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार हर प्रखंड में कॉलेज और बेहतर शैक्षणिक संस्थान विकसित करने की बात कर रही है, तो पुराने और लंबे समय से संचालित कॉलेज को ही क्यों ध्वस्त किया जा रहा है.

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लोगों ने काले झंडे के साथ किया प्रदर्शन (ETV Bharat)

'एक्सप्रेसवे का रूट बदला गया' : नीलकमल यादव ने आरोप लगाया कि पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे के लिए पहले जो नक्शा तैयार किया गया था, उसमें कॉलेज को बचाने की गुंजाइश थी, लेकिन बाद में नक्शे में बदलाव किया गया. उनका आरोप है कि एक बड़े राजनेता के रिश्तेदारों की करीब 12 बीघा जमीन को बचाने के लिए एक्सप्रेसवे का रूट बदला गया, जिसके कारण KSR कॉलेज पूरी तरह एक्सप्रेसवे की जद में आ गया.

''हमलोग कर्पूरी ठाकुर की धरती से आए हैं. अपने कॉलेज को बचाने के लिए अंतिम दम तक लड़ाई लड़ेंगे. यदि सरकार कॉलेज को ध्वस्त करने का फैसला करती है तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा.''- नीलकमल यादव, प्रदर्शनकारी ग्रामीण

Samastipur to Patna Padyatra
नीलकमल यादव, प्रदर्शनकारी ग्रामीण (ETV Bharat)

'विकास चाहिए, लेकिन विरासत की बलि देकर नहीं' : आंदोलन का नेतृत्व कर रहे समाजसेवी कुणाल कुमार ने कहा कि यह लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष या किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं है, बल्कि सरायरंजन के भविष्य, शिक्षा और पारदर्शी व्यवस्था को बचाने का जन-सत्याग्रह है. उन्होंने कहा कि KSR कॉलेज सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की शैक्षणिक पहचान है.

"अपने फायदे के लिए कॉलेज को तबाह करना सरायरंजन की जनता कभी बर्दाश्त नहीं करेगी. हमें विकास चाहिए, लेकिन विरासत की बलि देकर नहीं. NHAI द्वारा एक्सप्रेसवे के लिए पहले तैयार किए गए नक्शे की जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि बाद में किसके दबाव में रूट में बदलाव किया गया."- कुणाल कुमार, समाजसेवी

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कुणाल कुमार, समाजसेवी (ETV Bharat)

आमरण अनशन की धमकी : वहीं, कुणाल कुमार ने कहा कि कॉलेज को बचाने की मांग को लेकर ग्रामीण लंबे समय से संघर्ष कर रहे हैं. अब सरायरंजन से पटना तक पदयात्रा कर उन्होंने सरकार तक अपनी बात पहुंचाई है. अगर उनकी मांग पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा. जरूरत पड़ी तो पटना में भी आमरण अनशन पर बैठेंगे और जंतर मंतर पर भी आंदोलन करेंगे.

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प्रस्तावित नक्शा लेकर पहुंचे प्रदर्शनकारी (ETV Bharat)

सरकारी जमीन और मुआवजे को लेकर भी आरोप : आंदोलनकारी बुजुर्ग ललित कुमार राय ने आरोप लगाया है कि सरायरंजन में एक्सप्रेसवे के लिए सरकारी जमीन उपलब्ध होने के बावजूद रूट में बदलाव कर बड़ी मात्रा में निजी जमीन का अधिग्रहण किया जा रहा है. उनका दावा है कि इससे सरकारी खजाने पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा. कॉलेज बचाओ आंदोलन समिति ने इस पूरे मामले में भूमि अधिग्रहण और रूट निर्धारण की प्रक्रिया को सार्वजनिक करने की मांग की है.

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