प्राचीन नगरी बेसनगर से भीमबेटका तक, डॉ. नारायण ने खोले हैं कई राज, पद्मश्री के बाद विदिशा में स्वागत
मध्य प्रदेश की कई पुरातात्विक शोध में डॉ. नारायण व्यास का विशेष योगदान, भारत सरकार ने 2026 में पद्मश्री से नवाजा, विदिशा-रायसेन में सम्मान. रवि प्रजापति की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : August 31, 2026 at 10:52 AM IST
|Updated : August 31, 2026 at 10:58 AM IST
विदिशा : भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान से सम्मानित प्रसिद्ध पुरातत्वविद् डॉ. नारायण व्यास का रविवार को सांची में नागरिक अभिनंदन किया गया. विदिशा और रायसेन के इतिहास व संस्कृति से जुड़े लोगों की ओर से उनका सम्मान किया गया. इस कार्यक्रम में डॉ. व्यास के दशकों लंबे पुरातात्विक कार्यों को याद किया गया. विशेष रूप से विदिशा की प्राचीन नगरी बेसनगर सहित सांची, भीमबेटका और अन्य ऐतिहासिक धरोहर स्थलों से जुड़े उनके योगदान का उल्लेख किया गया.
1975 से 1977 तक किए उल्लेखनीय शोध कार्य
सांची स्थित महाबोधि सोसाइटी के सभागार में रविवार को आयोजित कार्यक्रम में डॉ. नारायण व्यास को दिए गए सम्मान-पत्र में विदिशा की ऐतिहासिक व सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और पुरातात्विक शोध के क्षेत्र में उनके योगदान को रेखांकित किया गया. सम्मान-पत्र के अनुसार उन्होंने वर्ष 1975 से 1977 के बीच भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के वरिष्ठ अधीक्षक पुरातत्वविद् डॉ. एम.डी. खरे के साथ विदिशा की प्राचीन नगरी बेसनगर में पुरातात्विक उत्खनन कार्य किया था.
कार्यक्रम में बताया गया कि कैसे बेसनगर के प्राचीन स्थापत्य, ऐतिहासिक अवशेषों और पुरातात्विक महत्व के अध्ययन व उत्खनन से जुड़े उनके अनुभव ने विदिशा के प्राचीन इतिहास और सांस्कृतिक वैभव को समझने में योगदान दिया. इसके साथ ही सांची और भीमबेटका जैसे महत्वपूर्ण धरोहर स्थलों व गुजरात की रानी की वाव से जुड़े उनके कार्यों का भी उल्लेख किया गया.
पुरातात्विक स्मारकों और ऐतिहासिक धरोहरों के कई राज खोले
आयोजकों ने रायसेन क्षेत्र में ग्रेट वॉल ऑफ इंडिया के रूप में चर्चित प्राचीन संरचना के पुरातात्विक महत्व को सामने लाने के उनके कार्य को भी उल्लेखनीय बताया. सम्मान-पत्र में कहा गया कि विदिशा के पुरातात्विक स्मारकों, प्राचीन स्थापत्य और ऐतिहासिक धरोहरों पर डॉ. व्यास के अध्ययन एवं शोध ने क्षेत्र की विरासत को समझने और उसे व्यापक स्तर पर सामने लाने में भूमिका निभाई है. समारोह में डॉ. नारायण व्यास ने पद्मश्री सम्मान प्राप्त करने के अनुभव को भी साझा किया. उन्होंने कहा कि नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति और मंत्रिमंडल की मौजूदगी में उन्हें सम्मान प्रदान किया गया राष्ट्रपति से उनकी मुलाकात भी हुई और आशीर्वाद मिला.

पुरातात्विक उत्खनन और शोध में डॉ. व्यास का विशेष योगदान : देवलिया
विदिशा में इतिहास और संस्कृति के क्षेत्र में कार्य करने वाले शोधकर्ता गोविंद देवलिया ने बताया, '' रायसेन और विदिशा के इतिहास प्रेमी नागरिकों की ओर से संयुक्त रूप से डॉ. नारायण व्यास के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किया गया. डॉ. व्यास ने मध्य प्रदेश, विशेष रूप से विदिशा और रायसेन क्षेत्र में पुरातात्विक उत्खनन और शोध के माध्यम से क्षेत्र के इतिहास और पुरातात्विक महत्व को सामने लाने में योगदान दिया है.

बीजामंडल के नाम परिवर्तन और पूजा के सवाल पर बोले डॉ. व्यास
कार्यक्रम के दौरान विदिशा के ऐतिहासिक विजय मंदिर यानी बीजामंडल के नाम परिवर्तन और वहां पूजा-अर्चना शुरू करने से जुड़े सवाल पर भी डॉ. नारायण व्यास ने अपनी बात रखी. उन्होंने इसे मुख्य रूप से शासकीय और प्रशासनिक प्रक्रिया से जुड़ा विषय बताया और कहा कि वह बाहर से होने के कारण इस मामले में कोई निर्णायक टिप्पणी नहीं कर सकते. नाम परिवर्तन को लेकर उन्होंने कहा, '' यदि किसी ऐतिहासिक स्थल का नाम बदला जाना है तो संबंधित नोटिफिकेशन में संशोधन की प्रक्रिया जरूरी होगी.'' उन्होंने सांसद, केंद्र सरकार और संस्कृति मंत्रालय के स्तर पर विषय उठाए जाने की बात कही. उनके अनुसार भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन आने वाले स्मारकों से जुड़े मामलों में स्थानीय स्तर पर निर्णय की सीमाएं होती हैं और केंद्र सरकार से मिलने वाले निर्देशों के अनुसार स्थानीय स्तर पर उनका पालन किया जाता है.
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वहीं, इतिहास एवं संस्कृति विशेषज्ञ/शोधकर्ता डॉ. गोविंद देवलिया के अनुसार, '' डॉ. व्यास का सम्मान विदिशा और रायसेन दोनों क्षेत्रों के लिए गौरव का विषय है. इस कार्यक्रम में भारतीय इतिहास अनुसंधान समिति, मध्य प्रदेश से जुड़े सत्यनारायण शर्मा, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के सेवानिवृत्त सहायक महानिदेशक श्री ओटा सहित अन्य विद्वान और इतिहास प्रेमी शामिल हुए

