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पद्मश्री पंडित रामलाल बरेठ ने जीवित रखी है सांस्कृतिक विरासत, युवा पीढ़ी भी नृत्यकला को लेकर गंभीर

छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत की वैश्विक पहचान है.रायगढ़ राजघराने के पद्मश्री पंडित रामलाल बरेठ आज भी इस विरासत को सहेजे हैं.

Padma Shri Pandit Ramlal Bareth
सांस्कृतिक विरासत को पहचान दिलाने वाले को सम्मान (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : June 13, 2026 at 10:38 PM IST

4 Min Read
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बिलासपुर : छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत और रायगढ़ घराने के लिए एक गौरवशाली पल सामने आया है.भारतीय कला एवं शास्त्रीय नृत्य मे अपना अलग पहचान बनाने वाले पद्मश्री पंडित रामलाल बरेठ को संगीत नाटक अकादमी की सर्वोच्च फेलोशिप अकादमी रत्न से सम्मानित किया जाएगा. यह सम्मान केवल एक कलाकार की उपलब्धि नहीं बल्कि उस परंपरा का सम्मान है जिसने कई दशकों से कथक की अनूठी शैली को जीवंत रखा है. खास बात ये है कि पंडित रामलाल बरेठ रायगढ़ कथक घराने के एकमात्र जीवित दरबारी नर्तक हैं,जिन्होंने राजा चक्रधर सिंह की सांस्कृतिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.

कथक नृत्य के साथ साधना

छत्तीसगढ़ की धरती से निकले पंडित रामलाल बरेठ ने अपने जीवन का अधिकांश समय कथक साधना और उसके प्रचार-प्रसार को समर्पित किया है. शुरुआती शिक्षा राजा चक्रधर सिंह की परंपरा से जुड़े गुरुओं के सानिध्य में प्राप्त करने वाले बरेठ ने मंचीय प्रस्तुतियों के माध्यम से देश-विदेश में रायगढ़ कथक घराने की अलग पहचान बनाई है.इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में रीडर के रूप में सेवा देने के बाद उन्होंने चक्रधर नृत्य केंद्र में तीन दशकों तक गुरु के रूप में कार्य करते हुए सैकड़ों शिष्यों को प्रशिक्षित किया.

पद्मश्री पंडित रामलाल बरेठ को सम्मान (ETV BHARAT)

सांस्कृतिक विरासत को जीवित रखना उद्देश्य
पंडित बरेठ की सबसे बड़ी उपलब्धि केवल मंच पर प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक सांस्कृतिक परंपरा को जीवित रखना है. उनके मार्गदर्शन में तैयार हुए अनेक शिष्य आज देश और विदेश में रायगढ़ घराने की पहचान बने हुए हैं. उनके पुत्र और कथक नृत्याचार्य गुरु भूपेंद्र बरेठ भी इसी विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं और बिलासपुर में नई पीढ़ी को कथक का प्रशिक्षण दे रहे हैं.

युवाओं का नृत्य के प्रति रुझान

इस हाईटेक और डिजिटल दौर में भी युवतियों ने शास्त्रीय नृत्य एवं संगीत को क्यों चुना इसे लेकर भी बरेठ जी की शिष्या ने अपने विचार रखे. कथक सीखने वाली शिष्या ने कहा जितने भी कला के क्षेत्र हैं वो साधना है जो एक तरह से हमारी भारतीय संस्कृति को सामने लाता है. हमारे कल्चर को अभी तक प्रोटेक्ट किया हुआ है.हम बहुत गौरवान्वित महसूस करते हैं कि हम इस क्षेत्र से जुड़ी हुई है.

मुझे करीबन 15 साल से गुरूजी से जुड़ने का सौभाग्य है. मैं 3 साल के उम्र से ही इस कला के साथ जुड़ गई थी.आज गुरूजी के वजह से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुति दे चुकी हूं. मुझे सेंट्रल गवर्नमेंट से स्कॉलरशिप भी मिलती है- अंजनी मिश्रा,नृत्यांगना

सबसे ज्यादा चुनौती कुछ भी साधना कुछ भी प्रेक्टिस करते हैं तो वो आती ही है. लेकिन हमारी दैनिक जीवन मे जो चुनौती आती है उतनी ही चुनौती इसमें भी रहती है. तो उसे लेकर मेहनत करना चाहिए. जैसे पढाई मे मेहनत मानते हैं उतनी है इसमे भी डिसिप्लिन और मेहनत जरूरी है- रंजना मिश्रा,शिष्या



वहीं वरिष्ठ साहित्यकार विनय पाठक ने कहा कि दो से तीन साल बाद संगीत आकादमी के द्वारा फैलोशिप आवार्ड दिया जा रहा है. वह हम सभी के लिये गौरव की बात है.

पद्मश्री पंडित रामलाल बरेठ साधना के क्षेत्र मे निस्वार्थ काम कर रहे हैं. कही न कही उनका भी मूल्यांकन है ये जो सम्मान है. उनका साधना तपस्या निस्वार्थ सेवा का सम्मान है- विनय पाठक, पूर्व राजभाषा आयोग अध्यक्ष एवं साहित्यकार

कई सम्मान पा चुके हैं पद्मश्री पंडित बरेठ
वर्ष 2024 में पद्मश्री सम्मान प्राप्त कर चुके पंडित बरेठ को इससे पहले संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, चक्रधर सम्मान और मध्यप्रदेश शासन का शिखर सम्मान भी मिल चुका है. अब अकादमी रत्न के रूप में यह सर्वोच्च सम्मान उनके छह दशक से अधिक लंबे कला-साधना के सफर को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान देगा. यह सम्मान केवल पंडित रामलाल बरेठ का नहीं, बल्कि रायगढ़ कथक घराने, बिलासपुर और पूरे छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक अस्मिता का सम्मान है. राष्ट्रपति के हाथों मिलने वाला यह प्रतिष्ठित सम्मान आने वाली पीढ़ियों को भारतीय शास्त्रीय कला और परंपराओं के संरक्षण के लिए प्रेरणादायक रहेगा.

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