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हाड़ौती में मानसून में होते जल जनित हादसे, 200 से ज्यादा रेस्क्यूर अंडरवाटर कैमरा और कम्युनिकेशन सेट के साथ तैयार

रिमोट ऑपरेटेड लाइफ बोट पानी में फंसे हुए व्यक्ति तक रिमोट से ऑपरेट कर पहुंचाई जा सकती हैं.

Rescuers ready to handle emergency situations
आपात स्थिति से निपटने को तैयार रेस्क्यूर (ETV Bharat Kota)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : July 3, 2026 at 6:38 PM IST

6 Min Read
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कोटा: मानसून सीजन आने वाला है और उसको लेकर हाड़ौती में नदी नाले तूफान पर रहते हैं. जल जनित हादसों की आशंका ज्यादा रहती है. यहां पर पार्वती, परवन, कालीसिंध, चंबल, मेज, कूल, उजाड़ और घोड़ा पछाड़ समेत कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बहती हैं. ऐसे में इस बार रेस्क्यू टीम अंडरवाटर कैमरा, स्कूबा ड्राइविंग कम्युनिकेशन सेट और रिमोट ऑपरेटेड ऑटोमेटिक बोट के साथ मैदान में उतर गई है. इसके साथ ही आपात रेस्क्यू टीम में भी पहले से ही सक्रिय हो गई है.

एसडीआरएफ, एनडीआरएफ के साथ-साथ सिविल डिफेंस भी रेस्क्यू ऑपरेशंस के लिए तैयार है. हाड़ौती के चारों जिलों में 200 से ज्यादा रेस्क्यूर तैनात हैं. एसडीआरएफ में करीब 100, एनडीआरएफ के 30 और सिविल डिफेंस के सक्रिय सदस्य 80 के आसपास हैं. आपात स्थिति होने पर इनके जरिए रेस्क्यू ऑपरेशंस किए जाएंगे. कई तरीके के संसाधन भी इन्हें दिए गए हैं. जबकि कोटा से परमानेंट ही टीमों को आसपास के जिलों में भेज भी दिया गया है.

आपदा से ​निपटने के लिए तैयार हैं रेस्क्यूर, देखें वीडियो (ETV Bharat Kota)

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एसडीआरएफ ने तैनात कर दी 7 टीम: एसडीआरएफ बी कंपनी की कमांडर एकता हाड़ा ने बताया कि 7 टीमें हाड़ौती के अलग-अलग एरिया के लिए रवाना कर दी गई हैं. इन टीमों की सीधी रिपोर्टिंग आपदाओं के दौरान प्रशासन को रहने वाली है. टीमें बूंदी, कोटा शहर व कोटा ग्रामीण में भेज दी गई है. जबकि दो-दो टीम बारां व झालावाड़ में भेजी गई हैं. बारां की एक टीम को कवाई व झालावाड़ की एक टीम को खानपुर में रोका गया है. प्रत्येक टीम में 10 लोग शामिल हैं. इसके अलावा एक गाड़ी, बोट व रिमोट ऑटोमेटिक रिमोट बोट भी दी गई है.

B Company Commander Ekta Hada briefing SDRF team
एसडीआरएफ टीम को दिशा निर्देश देती बी कंपनी कमांडर एकता हाड़ा (ETV Bharat Kota)

रेलवे ने वाटर लेवल मॉनिटरिंग के लिए पुलों पर लगाया अलार्म सिस्टम: कोटा रेल मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक सौरभ जैन ने बताया कि मानसून में रेलवे ट्रैक को काफी नुकसान पहुंच सकता है. बीते सालों की स्थिति को देखते हुए रेलवे ब्रिज और ट्रैक के आसपास स्पेशल मॉनिटरिंग की जा रही है. इसमें 63 संवेदनशील स्थानों की पहचान कर वहां चौबीसों घंटे निगरानी की व्यवस्था की गई है. इन स्थानों पर 48 पेट्रोल मैन और 116 वॉचमैन तैनात किए गए हैं. यह नियमित मानसून पेट्रोलिंग करेंगे. पुलों पर वाटर लेवल की निगरानी के लिए 6 स्थानों पर वॉटर लेवल अलार्म सिस्टम स्थापित किए गए हैं. विद्युतीकृत रेलमार्ग में ओवरहेड उपकरण, सिग्नल व ट्रैक की सुरक्षा के लिए पेड़ों की शाखाओं की छंटाई भी कराई गई है.

A scene of the mock drill at Kishore Sagar Lake
किशोर सागर तालाब पर मॉकड्रिल का दृश्य (ETV Bharat Kota)

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रिमोट ऑपरेटेड लाइफ बोट: रिमोट ऑपरेटेड लाइफ बोट भी सरकार ने उपलब्ध करवाई थी. इस साल भी रिमोट ऑपरेटेड लाइफ बोट एसडीआरएफ को मिली है. अब दो ऐसी बोट हो गई है, यह रिमोट से ऑपरेट होती हैं और पानी में काफी दूर तक जाकर एक व्यक्ति का रेस्क्यू करके लेकर आ सकती है. पानी में फंसे हुए व्यक्ति तक वोट को रिमोट से ऑपरेट करके भेज दिया जाता है. इसके बाद वह बोट के सहारे किनारे पर आ जाता है. एसडीआरएफ के हेड कांस्टेबल करण सिंह ने बताया कि रिमोट बोट अकेले ही पानी में जाकर एक व्यक्ति को बचाकर ले आती हैं. जिसे पूरी तरह से रिमोट से ऑपरेटेड रखा जाता है.

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वाटरप्रूफ कम्युनिकेशन सिस्टम: एसडीआरएफ को वाटरप्रूफ कम्युनिकेशन सिस्टम भी मिला है. यह स्कूबा डाइविंग करने वाले जवान को कम्युनिकेशन के लिए यह काफी उपयोगी रहेगी. स्कूबा डाइविंग के तहत काफी नीचे तक खोजबीन करने के लिए जवान जाते हैं. ऐसे में 150 फीट तक कम्युनिकेशन बनाने के लिए वायरलेस हैंडसेट दिया गया है, ताकि नीचे गए व्यक्ति से सीधा कम्युनिकेशन किया जा सके. यह पानी में भी कम्युनिकेशन अच्छे से करता है.

Mock drill at Kishore Sagar Lake
किशोर सागर तालाब पर मॉकड्रिल (ETV Bharat Kota)

बोरवेल रेस्क्यू कैमरा: एकता हाड़ा ने बताया कि इस बार बोरवेल में गिरने के काफी हादसे सामने आए हैं, इसको देखते हुए बोरवेल रेस्क्यू कैमरा भी एसडीआरएफ को सरकार ने उपलब्ध करवाया है. इस कैमरे को बोरवेल में डाल दिया जाता है, जिसके बाद 200 से 300 फीट नीचे तक कैमरे से गतिविधियों पर नजर रखी जा सकती है. यह पानी में रेस्क्यू के दौरान भी उपयोग में लिया जा सकता है. इसमें भी पानी के अंदर केमरे को डालकर स्क्रीन पर लाइव फीड देखी जा सकती है. इसका रिकॉर्ड वीडियो भी ऊपर आ जाता है. साथ ही फोटो भी खींचकर कैमरा लेकर आता है.

Underwater communication system also ready
अंडरवाटर कम्युनिकेशन सिस्टम भी तैयार (ETV Bharat Kota)

एनडीआरएफ के 30 जवान कोटा में पहले से: एनडीआरएफ के 30 लोगों की टीम कोटा में मौजूद है. वह दुर्घटना की संभावित स्थिति में एक्शन लेने के लिए तैयार है. पूरी तरह से संसाधनों को उन्होंने आपात स्थिति के लिए तैयार किया हुआ है. जल जनित हादसे हाड़ौती में काफी होते हैं. पहले भी उनकी टीम ने यहां पर कई रेस्क्यू ऑपरेशंस किए हैं. सिविल डिफेंस के कोटा इंचार्ज शिवदान सिंह का कहना है कि 84 जवान उन्होंने चारों जिलों में तैनात किए हैं. इनमें सभी जिलों में 21-21 वालेंटियर हैं. जरूरत पड़ने पर उनके करीब 120 के सिविल डिफेंस वालेंटियर और तैयार हैं.

SDRF team readies the boat
एसडीआरएफ की टीम ने तैयार की बोट (ETV Bharat Kota)

चार टीम रिजर्व में स्टैंड बाय मोड पर: एसडीआरएफ की कंपनी कमांडर एकता हाड़ा का कहना है कि चार टीमें उन्होंने रिजर्व रखी हुई है. ये सभी कोटा के आरएसी मैदान स्थित मुख्यालय पर तैनात हैं. पूरी तरह से स्टैंड बाय पर इनको रखा गया है. जरूरत पड़ने पर कुछ मिनट में ही इन्हें यहां से रवाना कर दिया जाएगा. इनमें एसडीआरएफ के 40 जवान शामिल हैं. इनका अधिकांश सामान तो बोट पर तैनात भी कर दिया गया है. मानसून इस बार देरी से आ रहा है, लेकिन हमने तैयारी पहले से कर ली थी.

Remote-operated automatic boat
रिमोट ऑपरेटेड ऑटोमेटिक बोट (ETV Bharat Kota)

महिला जवान भी ट्रेंड: नयापुरा स्थित कोटा विकास प्राधिकरण के तरण ताल और चंबल नदी में बीते दो महीने टीम को रिहर्सल करवाया गया है. बोट हैंडलिंग, स्कूबा ड्राइविंग और स्विमिंग भी करवाई गई है. जिसमें एसडीआरएफ की महिला जवानों को भी ट्रेंड किया गया है. एसडीआरएफ की टीम में तैनात 50 से ज्यादा जवान स्कूबा ड्राइविंग से पूरी तरह से ट्रेंड हैं. इसके अलावा किशोर सागर तालाब में मॉक ड्रिल की गई थी. जिसमें राजस्थान पुलिस, एनडीआरएफ, सिविल डिफेंस एसडीआरएफ, आर्मी और जिला प्रशासन की इकाइयों से जुड़े लोग भी शामिल रही है.