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तापमान का असर बेअसर! आईआईटी आईएसएम धनबाद ने विकसित किया एडवांस्ड टिल्ट सेंसर

आईआईटी आईएसएम धनबाद के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित ऑप्टिकल टिल्ट सेंसर की तकनीक को पेटेंट मिला. नरेंद्र निषाद की रिपोर्ट.

Optical tilt sensor technology receives patent developed by IIT ISM Dhanbad researchers
शोधकर्ता डॉ. अमितेश कुमार (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : August 20, 2026 at 3:41 PM IST

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Updated : August 21, 2026 at 1:19 PM IST

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धनबाद: आईआईटी आईएसएम धनबाद के इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग के शोधकर्ताओं ने एक ऐसे ऑप्टिकल टिल्ट सेंसर की तकनीक विकसित की है, जो किसी संरचना या उपकरण के झुकाव को दो अलग-अलग दिशाओं में सटीकता के साथ मापने में सक्षम है. तापमान में बदलाव के बावजूद बेहतर परिणाम देने वाली इस तकनीक का उपयोग ब्रिज और अन्य ढांचों की निगरानी से लेकर इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन, रोबोटिक्स, एयरोस्पेस और जियो-टेक्निकल मॉनिटरिंग जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है.

इस तकनीक को विकसित करने वाले शोधकर्ताओं में इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अमितेश कुमार और उनके रिसर्च स्कॉलर रंधीर कुमार साह शामिल हैं. भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय ने इस आविष्कार के लिए आईआईटी (आईएसएम) धनबाद को पेटेंट प्रदान किया है, पेटेंट संख्या 599709 है.

डॉ. अमितेश कुमार के अनुसार, पेटेंट के लिए आवेदन 10 फरवरी 2025 को किया गया था, जबकि 19 अगस्त 2026 को इसे आधिकारिक रूप से प्रदान किया गया. पेटेंट आवेदन की तारीख से 20 वर्षों की अवधि के लिए मान्य रहेगा.

यह सेंसर Fiber Bragg Grating (FBG) तकनीक पर आधारित है. सरल शब्दों में समझें तो इसमें बेहद पतले ग्लास फाइबर के भीतर सूक्ष्म पैटर्न तैयार किए जाते हैं. फाइबर से गुजरने वाली रोशनी में होने वाले बदलावों का विश्लेषण कर सेंसर के झुकाव या किसी संरचना में आए मामूली झुकाव का भी पता लगाया जा सकता है.

शोधकर्ताओं ने सेंसर के डिजाइन में ग्लास फाइबर से बने एक आयताकार आर्म के साथ गोलाकार पेंडुलम को एक बॉक्स के भीतर व्यवस्थित किया है. सेंसर की प्रमुख विशेषताओं में से एक तापमान के प्रभाव को कम करना है. इसके कारण अलग-अलग तापमान और पर्यावरणीय परिस्थितियों में भी सेंसर से अधिक विश्वसनीय माप मिलने की संभावना है.

पारंपरिक इलेक्ट्रिकल टिल्ट सेंसर की तुलना में यह ऑप्टिकल सेंसर कई मायनों में उपयोगी है. इसका वजन कम है और यह इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस से प्रभावित नहीं होता. यही वजह है कि कठिन औद्योगिक और अन्य संवेदनशील परिस्थितियों में भी इसके इस्तेमाल की संभावना बढ़ जाती है. सेंसर को लंबे समय तक निगरानी और कम रखरखाव को ध्यान में रखते हुए विकसित किया गया है.

इस तकनीक का संभावित उपयोग पुलों, इमारतों और अन्य महत्वपूर्ण संरचनाओं की स्थिति पर नजर रखने में किया जा सकता है. इसके अलावा औद्योगिक मशीनरी, रोबोटिक सिस्टम, एयरोस्पेस उपकरण और जमीन से जुड़ी इंजीनियरिंग संरचनाओं की निगरानी में भी यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है.

डॉ. अमितेश कुमार वर्ष 2011 से आईआईटी आईएसएम में फैकल्टी के रूप में कार्यरत हैं और वर्तमान में एसोसिएट प्रोफेसर हैं. वे IEEE और OPTICA के सीनियर मेंबर भी हैं. उनके प्रमुख शोध क्षेत्रों में फोटोनिक इंटीग्रेटेड सर्किट, फाइबर ऑप्टिक सेंसर, माइक्रोवेव फोटोनिक्स तथा 5G और उससे आगे की रेडियो-ओवर-फाइबर तकनीक शामिल हैं.

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Last Updated : August 21, 2026 at 1:19 PM IST