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पेसा पर सस्पेंस, पारित नियमावली सार्वजनिक नहीं होने पर उठ रहे सवाल, पंचायत जनप्रतिनिधियों का बढ़ा टेंशन

पेसा कानून कैबिनेट से पारित होने के बात नियमावली सार्वजनिक नहीं होने पर पंचायत प्रतिनिधि और विपक्ष लगातार सरकार पर हमलावर है.

POLITICS IN PESA RULES IN JHARKHAND
बाबूलाल मरांडी और मुखिया संघ के अध्यक्ष (ईटीवी भारत)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : December 27, 2025 at 8:05 PM IST

5 Min Read
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रांची: कैबिनेट से पास होने के बाद भी झारखंड में पेसा कानून पहेली बना हुआ है. राज्य सरकार द्वारा न तो इसे अधिसूचित किया गया है और न ही इसे सार्वजनिक किया गया है. इसे लेकर राजनीतिक मंच के साथ-साथ त्रिस्तरीय पंचायती राज जनप्रतिनिधियों द्वारा सवाल उठाए जाने लगे हैं कि आखिर पेसा नियम में क्या प्रावधान किए गए हैं. जानिए आखिर झारखंड में पंचायती राज और पेसा को लेकर अब तक सरकारी स्तर पर क्या कुछ कदम उठाए गए हैं.

2001 में अधिनियम हुआ था पारित

राज्य गठन के बाद सर्वप्रथम झारखंड विधानसभा ने 2001 में झारखंड पंचायती राज अधिनियम 2001 पारित किया था. जिसके तहत राज्य के सभी गैर-अनुसूचित और अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायती व्यवस्था को मजबूत करना था. लेकिन इसे आज तक पूर्ण रूप से लागू नहीं किया जा सका है. समय-समय पर पेसा लागू करने को लेकर मांगें तेज होती रही हैं और इस संदर्भ में न्यायालय के भी आदेश आते रहे.

मुखिया संघ के अध्यक्ष और बाबूलाल मरांडी का बयान (ईटीवी भारत)

राज्य सरकार ने 2023 में एक ड्राफ्ट नियमावली बनाई और लोगों से इस पर सुझाव मांगे. करीब 2 साल तक पंचायती राज विभाग ने तैयार ड्राफ्ट पर आए 154 सुझावों पर मंथन करती रही. इन सबके बीच सरकार को झारखंड हाईकोर्ट का सख्त आदेश का भी सामना करना पड़ा और अंत में बीते 23 दिसंबर को कैबिनेट की बैठक में पेसा नियमावली पर मुहर लगाने का काम किया गया.

आखिर क्यों हो रही है आलोचना

राज्य सरकार द्वारा पेसा नियमावली पर लगाई गई मुहर के बाद सबकी नजर इसमें आदिवासियों की रूढ़िवादी धार्मिक, पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था का प्रावधान होने या न होने पर टिकी हुई है. यदि रूढ़िवादी परंपरा का प्रावधान रहेगा तो आखिर त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था के तहत चुने गए जनप्रतिनिधियों का क्या होगा, इसको लेकर अभी से चिंता सताने लगी है. झारखंड प्रदेश मुखिया संघ के अध्यक्ष सोमा उड़ांव कहते हैं कि सरकार के इस निर्णय पर अब लोगों को शंका होने लगी है कि आखिर पारित पेसा नियमावली में क्या है. क्यों इसे अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया है.

मुखिया संघ के अध्यक्ष ने कहा कि जिस तरह से एकल पद में भी अनुसूचित क्षेत्रों में मुसलमान और ईसाई आ रहे हैं, उनसे कैसे जनजाति क्षेत्र के विकास की कल्पना की जाएगी. पेसा में जनजातियों की रूढ़िवादी धार्मिक-सांस्कृतिक प्रावधान रहना चाहिए और उन्हें स्थानीय स्वशासन का अधिकार मिलना चाहिए. अगर ऐसा नहीं हुआ तो इससे कोई फायदा नहीं होगा. उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से ईटीवी भारत के माध्यम से जाति प्रमाण पत्र में पिता और पति दोनों का नाम शामिल करने का आग्रह करते हुए आदिवासियों को बचाने की अपील की है.

झारखंड ओडिशा को छोड़कर देश के 10 राज्यों में है पेसा लागू

पेसा देश के अनुसूचित जनजाति बहुल क्षेत्रों में लागू है. पेसा एक्ट पांचवीं अनुसूची के तहत अनुसूचित क्षेत्रों यानी जिन इलाकों में आदिवासियों की संख्या ज्यादा है, वहां लागू होता है. वर्तमान में देश के दस राज्यों में यह व्यवस्था लागू है. पंचायती राज मंत्रालय के अनुसार आठ राज्यों में आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, राजस्थान और तेलंगाना ने अपने संबंधित पंचायती राज कानूनों के तहत अपने राज्य में पेसा नियमों को अधिसूचित किया है.

पेसा संबंधित प्रस्ताव सार्वजनिक करे हेमंत सरकार: बाबूलाल मरांडी

कैबिनेट से पारित पेसा संबंधित प्रस्ताव को सार्वजनिक करने की मांग को लेकर भाजपा लगातार दबाव बनाने में जुटी है. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने शनिवार को एक बार फिर पेसा को लेकर हेमंत सरकार पर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि हेमंत सरकार की हिम्मत पेसा से संबंधित कैबिनेट के प्रस्ताव को सार्वजनिक कराने में क्यों नहीं दिख रही है. उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट हो रहा है कि कहीं न कहीं कोई ऐसी बात है जो राज्य सरकार जनता से छुपा रही है.

बाबूलाल मरांडी ने कहा कि एक तरफ सरकार पेसा प्रस्ताव पारित करने के नाम पर अपना पीठ थपथपा रही है, खूब स्वागत करवा रही है. लेकिन यह बताने से भाग रही है कि आखिर उस प्रस्ताव में क्या है. जिस समाज के विषय में, जिनकी परंपराओं, रूढ़ियों, रीति-रिवाजों, शासन व्यवस्थाओं से संबंधित यह पेसा एक्ट है, आज उसी समाज को वास्तविक स्थिति पता नहीं है. चाहे जनता हो या जनप्रतिनिधि, सभी मीडिया में छपी खबरों के भरोसे ही जानकारी ले रहे हैं. उन्होंने राज्य सरकार से जल्द पारित प्रस्ताव को सार्वजनिक करने की मांग की है, ताकि जनता को दिग्भ्रमित होने से बचाया जा सके.

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