पी चिदंबरम के दिमागी नक्सली वाले बयान का विरोध, नक्सल पीड़ित परिवारों ने जताई आपत्ति
पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम के दिमागी नक्सली होने पर गर्व वाली बात पर नक्सल पीड़ित परिवारों ने आपत्ति जताई है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : August 19, 2026 at 5:55 PM IST
रायपुर : बस्तर शांति समिति की एक टीम बनाकर बस्तर के लगभग 17 लोग दिल्ली प्रवास पर थे. उन्होंने पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम के द्वारा दिए गए उस बयान को लेकर आक्रोश में है. जिसमें उन्होंने कहा था कि दिमागी नक्सली होने पर मुझे गर्व है. इस बयान को लेकर बस्तर के नक्सल पीड़ित परिवारों में गुस्सा और आक्रोश है. इसी पीड़ा और आक्रोश को आम जनता और देश के सामने लाने के लिए पीड़ित परिवार बुधवार को मीडिया के सामने अपनी बात रखी. इसी बात को देश की आम जनता को बताने के लिए बस्तर शांति समिति के नेतृत्वकर्ता साहित 17 लोग दिल्ली भी गए थे.
पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम के बयान पर आपत्ति
बस्तर शांति समिति के नेतृत्वकर्ता तामेश्वर सिन्हा ने बताया कि देश के पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम को जी ने यह बयान दिया था कि दिमागी नक्सली होने पर मुझे गर्व है. मैं एक चीज कहना चाहूंगा कि बस्तर को नक्सली मुक्त हुए अभी 5 महीने भी पूरे नहीं हुए हैं. 31 मार्च 2026 को बस्तर नक्सल मुक्त हुआ है. हमने जो झेला था. बरसों से हमने बस्तर में लाल आतंक को झेला है. बस्तर के साथ ही तेलंगाना, महाराष्ट्र, झारखंड, आसपास के राज्यों ने भी इस पीड़ा को झेला है.
ऐसे में पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री का यह कहना उचित होगा कि मैं दिमागी नक्सलियों के साथ हूं. मैं सभी देश के लोगों से पूछना चाहता हूं कि क्या इस तरह का बयान देना सही है?.हमने अलग-अलग जगह पर अपने भाई बहन पिता और मां के साथ ही जवानों के साथ ही बच्चों को खोया है. ऐसे में यह पीड़ा देश के पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री को नहीं दिखा. काफी मन में आक्रोश था और इच्छा थी कि इस बात को समस्त देशवासियों के सामने रखूं.
जिस लाल आतंक को हमने झेला था. क्या उन्होंने झेला है. उनके परिवार से कोई सेना या पुलिस में आया था क्या, जो भर्ती होकर बस्तर में पदस्थ होकर देश रक्षा के लिए आया था.आज खूंखार नक्सली हिड़मा को रोल मॉडल मानते हैं. उसके लिए प्रेरणादायक जैसे शब्द इस्तेमाल करते हैं. काला भय जैसा शब्द बस्तर से समाप्त हो चुका है - तामेश्वर सिन्हा, नेतृत्वकर्ता बस्तर शांति समिति
'हमने झेली है नक्सलवाद की पीड़ा'
बस्तर शांति समिति की सदस्य आरती उइके ने बताया कि देश के पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री पी चिदंबरम पोस्ट कर रहे हैं कि मुझे दिमागी नक्सली होने पर गर्व है. जिनको दर्द हुआ है या फिर जिन्होंने नक्सलवाद की पीड़ा झेली है. उनसे जाकर पूछिए उनके ऊपर क्या बीत रही है. जैसे मैंने अपना पति को खोया है. वे फोर्स में थे. मेरे पति साल 2015 में शहीद हो गए. उस समय मेरी छोटी सी 3 महीने की एक बेटी थी. बस्तर शांति समिति की इस टीम में 17 लोग थे और अपनी बात दिल्ली में मीडिया के सामने रखने के लिए गए थे.
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