धौराभाठा में चूना पत्थर खदान का विरोध, कलेक्टर से खदान नहीं खोलने की अपील, नहीं मानने पर आंदोलन की चेतावनी
बलौदाबाजार के धौराभाठा गांव में चूना पत्थर खदान खोलने का विरोध शुरु हो गया है. ग्रामीणों ने खदान नहीं खोलने की गुहार लगाई है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : January 7, 2026 at 12:21 PM IST
बलौदाबाजार : बलौदाबाजार जिले के भाटापारा तहसील अंतर्गत ग्राम धौराभाठा में चूना पत्थर उत्खनन की स्वीकृति ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है. ग्रामीणों का कहना है कि अगर गांव में खदान शुरू हुई तो धौराभाठा, ‘धुर्राभाठा’ बनकर रह जाएगा. मंगलवार को बड़ी संख्या में ग्रामीण कलेक्टर जनसुनवाई में पहुंचे और चूना पत्थर उत्खनन की स्वीकृति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई. इसके साथ ही ग्रामीणों ने ETV भारत से विशेष बातचीत में अपनी पीड़ा साझा की.
चूना पत्थर खनन के लिए जगह है स्वीकृत
ग्रामीणों ने बताया कि उन्हें प्रशासनिक पत्र के माध्यम से जानकारी मिली है कि ग्राम धौराभाठा में खसरा नंबर 12/1 की लगभग 3.7 एकड़ भूमि में चूना पत्थर उत्खनन की अनुमति दी गई है. इसके अलावा करीब 20 एकड़ भूमि में भी खनन की स्वीकृति की बात सामने आई है. ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पहले से ही चूना पत्थर, क्रशर और मिट्टी खदान संचालित हैं. इनसे लगातार धूल, तेज आवाज, जल और वायु प्रदूषण की समस्या बनी हुई है. इसका सीधा असर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है.

खदान खुलने से खेती चौपट होने का डर
ETV भारत से बातचीत में ग्रामीणों ने कहा कि धौराभाठा कृषि प्रधान गांव है, जहां धान की खेती ही आजीविका का मुख्य साधन है. यदि खदान शुरू होती है तो खेतों में धूल जम जाएगी, पानी के स्रोत प्रभावित होंगे और खेती चौपट हो जाएगी. ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ग्रामवासियों के हितों को ध्यान में रखते हुए चूना पत्थर उत्खनन की अनुमति पर तत्काल रोक लगाई जाए. साथ ही किसी भी नए खनन कार्य से पहले ग्रामसभा, जनसुनवाई और पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन अनिवार्य किया जाए.ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों को नजरअंदाज किया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे.
छत्तीसगढ़ को धान का कटोरा कहा जाता है और हमारा धौराभाठा खेती पर ही टिका गांव है.अगर यहां चूना पत्थर की खदान लग गई तो खेत बर्बाद हो जाएंगे, पानी और हवा दोनों प्रदूषित होंगे. आज हम कलेक्टर जनसुनवाई में शिकायत लेकर आए हैं कि गांव को खदान नहीं चाहिए, खेती बचानी है - कृष्ण कुमार वर्मा, ग्रामीण (धौराभाठा)
पहले ही गांव के आसपास क्रशर और खदानों से परेशानी झेल रहे हैं.अब नई खदान की अनुमति दी जा रही है. इससे धौराभाठा, धुर्राभाठा बन जाएगा. धूल, धमाके और प्रदूषण में हमारे बच्चे कैसे जीएंगे. प्रशासन अगर नहीं सुना तो हम सब मिलकर आंदोलन करेंगे- दिलेश्वर ध्रुव, ग्रामीण (धौराभाठा)
किसानों से बिना पूछे जमीन देना ही क्यों ?
एक ग्रामीण ने ETV भारत को बताया कि, हम किसान हैं, हमारी रोजी-रोटी खेत से चलती है.खदान से नौकरी नहीं मिलेगी, सिर्फ बीमारी और नुकसान मिलेगा. बिना ग्रामसभा से पूछे, बिना हमारी सहमति के खदान की अनुमति दे दी गई. क्या किसान की जमीन पर फैसला किसान से पूछे बिना होगा? आज हमने कलेक्टर जनसुनवाई में शिकायत की है. अगर सुनवाई नहीं हुई तो हम सड़क पर उतरेंगे. धूल और गंदे पानी से बच्चों की तबीयत खराब हो रही है. खेती बचेगी तो गांव बचेगा, खदान आई तो सब खत्म हो जाएगा.
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