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हरिद्वार के जंगल में चीतल का शिकार, एक आरोपी गिरफ्तार, साथियों की तलाश जारी

हरिद्वार जिले के श्यामपुर रेंज के रसूलपुर क्षेत्र में चीतल के शिकार मामले में एक आरोपी गिरफ्तार, अन्य आरोपियों की तलाश में छापेमारी जारी

CHITAL HUNTING HARIDWAR
वनकर्मियों की गिरफ्त में शिकारी (फोटो सोर्स- Forest Department)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : September 2, 2026 at 9:49 PM IST

3 Min Read
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हरिद्वार: श्यामपुर रेंज के रसूलपुर क्षेत्र में चीतल के शिकार का मामला सामने आया है. यहां कुछ लोगों ने मिलकर जंगल में एक चीतल को मार डाला. मामले में वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए एक व्यक्ति को दबोचा, फिर कोर्ट में पेश किया. जिसके उसे जेल भेज दिया गया है. घटना में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश में वन विभाग की टीम लगातार छापेमारी कर रही है.

रसूलपुर क्षेत्र में चीतल का शिकार: वन विभाग के मुताबिक, विभाग को रसूलपुर क्षेत्र में एक चीतल के शिकार की सूचना मिली थी. सूचना मिलते ही श्यामपुर रेंज की टीम मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की. जांच और मौके पर की गई कार्रवाई के दौरान अशोक पुत्र प्यारे सिंह को हिरासत में लिया गया.

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, उसके साथ कुछ अन्य लोगों के मौजूद होने की भी जानकारी मिली है, लेकिन कार्रवाई के दौरान वे मौके से फरार हो गए. वन विभाग अब फरार बताए जा रहे लोगों की पहचान करने और घटना में उनकी भूमिका की जांच में जुटा है. मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गंभीरता से जांच की जा रही है और मौके से संबंधित साक्ष्य भी जुटाए जा रहे हैं.

आरोपी को भेजा गया जेल: पकड़े गए आरोपी को नियमानुसार कार्रवाई पूरी करने के बाद कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया. इस कार्रवाई में उप वन क्षेत्राधिकारी सुभाष चंद्र, वन दरोगा शांति मोहन, वन आरक्षी एहसान अली, मनोज और मोनू शामिल रहे. टीम ने सूचना मिलने के बाद त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को दबोच लिया.

"वन्यजीवों के शिकार और अन्य वन्यजीव अपराधों के खिलाफ विभाग गंभीरता से कार्रवाई कर रहा है. रसूलपुर मामले में टीम ने सूचना मिलते ही त्वरित कार्रवाई की है और अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है."- स्वप्निल अनिरुद्ध, डीएफओ, हरिद्वार

"वन्यजीव संरक्षण के लिए किसी भी तरह की अवैध गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी. आमजन से भी अपील है कि वन्यजीवों के शिकार, तस्करी या किसी अन्य अपराध की सूचना तत्काल वन विभाग को दें. ताकि, समय रहते कार्रवाई की जा सके."- स्वप्निल अनिरुद्ध, डीएफओ, हरिद्वार

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