सांसद रंजीता रंजन का आरोप: मनरेगा अब काम का अधिकार नहीं, उद्योगपतियों को मिला मजदूरों का शोषण करने का अधिकार
कांग्रेस सांसद रंजीता रंजन ने कहा कि 'वीजी जी राम जी' कानून के मुताबिक अब 40 फीसदी पैसा राज्यों को वहन करना पड़ेगा.

Published : December 22, 2025 at 6:29 PM IST
जयपुर: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) को खत्म करके नया कानून लाने पर कांग्रेस केंद्र की मोदी सरकार पर लगातार हमला बोल रही है. इस मामले में संसद से सड़क तक विरोध जताने के बाद अब कांग्रेस नेता देश के अलग-अलग राज्यों में जाकर नए संशोधन कानून की खामियां गिना रहे हैं. इसी क्रम में सोमवार को छत्तीसगढ़ से कांग्रेस की राज्यसभा सांसद रंजीता रंजन जयपुर पहुंचीं, जहां उन्होंने प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में पत्रकारों के सामने नए संशोधन कानून की खामियां गिनाईं. उन्होंने कहा कि मनरेगा पहले काम का अधिकार था, अब यह केवल मांग बनकर रह गया है. रंजीता रंजन ने कहा कि एक तरह से मनरेगा का संशोधन कानून मजदूरों के शोषण का अधिकार उद्योगपतियों को देता है.
रंजीता रंजन ने कहा कि 2004 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का सपना था कि समाज के सबसे निचले तबके के लिए काम का अधिकार मिले और उसका नाम था महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना. उन्होंने कहा कि जिस तरह से सूचना का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, वन अधिकार और खाद्य सुरक्षा कानून लाए गए, उसी तरह काम के अधिकार (राइट टू वर्क) लाया गया. उन्होंने बताया कि 2005 में इसकी शुरुआत हुई थी, लेकिन इससे पहले 13 महीने तक सरकार ने सामाजिक संगठनों, सिविल सोसाइटी, विशेषज्ञों, अर्थशास्त्रियों और नेताओं से बातचीत करके इसे तैयार किया था और संसद में इसे सर्वसम्मति से पारित किया गया था. अब मोदी सरकार शीतकालीन सत्र खत्म होने से दो दिन पहले आनन-फानन में नया बिल लोकसभा और राज्यसभा में लेकर आई.
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नए कानून में कई खामियां: सांसद रंजीता रंजन ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से पेश किए गए नए कानून 'वीबी जी राम जी' में कई खामियां हैं. उन्होंने बताया कि मनरेगा में पहले 90 फीसदी राशि केंद्र सरकार वहन करती थी, लेकिन इस संशोधन बिल के बाद अब केंद्र सरकार केवल 60 फीसदी राशि ही देगी, जबकि 40% राशि राज्यों को वहन करनी पड़ेगी. इसके अलावा, रबी और खरीफ की फसल की कटाई के दौरान 60 दिनों के लिए काम पर रोक रहेगी. ऐसे में मजदूरों को उद्योगपतियों और व्यापारियों के द्वारा कम मजदूरी में ही काम करना पड़ेगा. रंजीता रंजन ने कहा कि नोटबंदी और कोरोना में भी जिन दो योजनाओं ने लोगों का पलायन रोका था, उनमें खाद्य सुरक्षा कानून और मनरेगा शामिल हैं. नोटबंदी में लोगों को खाने की तकलीफ नहीं हुई, जबकि कोरोना में लोगों को गांव में ही रोजगार मिल गया था.
उन्होंने कहा कि पहले मनरेगा के तहत कौन-कौन से काम होंगे, यह ग्राम सभा और ग्राम पंचायत तय करती थी, लेकिन अब यह अधिकार केवल केंद्र सरकार के पास है. राज्य को भी काम तय करने का अधिकार नहीं है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार की नियत में खोट है, इसीलिए उसने इस तरह के संशोधन किए हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की मंशा है कि चंद उद्योगपतियों को इस बिल के जरिए मजदूरों का शोषण करने का अधिकार मिल जाए. कांग्रेस पार्टी अब इस मामले को लेकर पीछे नहीं हटेगी, क्योंकि यह लड़ाई कांग्रेस पार्टी की नहीं है, यह आम जनमानस की लड़ाई है और इसके लिए वे लगातार सड़कों पर उतरकर आंदोलन करेंगे. सांसद ने कहा कि जिस तरह से किसान विरोधी तीन काले कानून को केंद्र सरकार ने डेढ़ साल के बाद वापस लिया था, उसी प्रकार इस कानून को भी वापस लेने पर मजबूर कर दिया जाएगा.
नेशनल हेराल्ड केस में केंद्र को मुंह की खानी पड़ी: नेशनल हेराल्ड केस को लेकर रंजीता रंजन ने कहा कि ईडी ने राहुल गांधी, सोनिया गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं को फंसाने के लिए काम किया. 2022 में राहुल गांधी से लगभग 5 दिन में 60 घंटे तक पूछताछ की गई थी. सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे से भी पूछताछ की गई, लेकिन अब कोर्ट का जो फैसला आया है. उसमे कोर्ट ने ईडी और केंद्र सरकार को हड़काया है. इस मामले में केंद्र को मुंह की खानी पड़ी है.

