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उत्तराखंड की सेहत का रिपोर्ट कार्ड! महिलाओं में मोटापा, खराब जीवनशैली और बीमारियां बनीं चुनौती

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण में खुलासा, उत्तराखंड के बच्चों में कुपोषण घटा, टीकाकरण बढ़ा, लेकिन महिलाओं में मोटापा और बीमारियां बनीं चुनौती

National Family Health Survey
सेहत का रिपोर्ट कार्ड (फोटो- ETV Bharat GFX)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : June 1, 2026 at 7:44 PM IST

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देहरादून: उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं पोषण योजनाओं और जागरूकता अभियानों का असर अब जमीनी स्तर पर कुछ-कुछ दिखाई देने लगा है. राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-5) की ताजा रिपोर्ट में राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कई सकारात्मक संकेत मिले हैं. खासकर बच्चों के पोषण टीकाकरण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य के क्षेत्र में सुधार दर्ज किया गया है. हालांकि, रिपोर्ट ने एक ऐसे खतरे की ओर भी संकेत किया है, जो आने वाले सालों में स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है.

बदलती जीवनशैली, अनियमित खान-पान, शारीरिक श्रम में कमी और बढ़ती शहरी संस्कृति के कारण राज्य में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है. महिलाओं में इसकी स्थिति पुरुषों की तुलना में ज्यादा गंभीर बताई गई है. सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि उत्तराखंड में स्वास्थ्य संबंधी कई पारंपरिक समस्याओं पर नियंत्रण पाने में सफलता मिली है, लेकिन अब राज्य गैर-संचारी रोगों यानी लाइफस्टाइल डिजीज के बढ़ते दबाव का सामना कर रहा है.

National Family Health Survey
मरीजों की जांच करतीं महिला डॉक्टर (फाइल फोटो- ETV Bharat)

महिलाओं में तेजी से बढ़ा मोटापा: रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तराखंड में 15 साल और उससे ज्यादा आयु की महिलाओं में मोटापे का स्तर चिंताजनक गति से बढ़ा है. सर्वेक्षण में यह आंकड़ा 34.3 फीसदी दर्ज किया गया है. जबकि, पिछले सर्वेक्षण में यह 29.8 फीसदी था. यानी कुछ सालों के भीतर पांच फीसदी से ज्यादा की वृद्धि दर्ज की गई है.

बदलती जीवनशैली, जंक फूड की बढ़ती उपलब्धता, शारीरिक गतिविधियों में कमी और तनावपूर्ण दिनचर्या का परिणाम माना जा रहा है. महिलाओं में बढ़ता मोटापा केवल वजन बढ़ने तक सीमित समस्या नहीं है. इससे मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हार्मोनल असंतुलन, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ रहा है. ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी इलाकों में यह समस्या ज्यादा तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अब इसका प्रभाव गांवों तक भी पहुंचने लगा है.

पुरुषों में भी स्थिति चिंताजनक: महिलाओं की तुलना में पुरुषों में मोटापे की दर कुछ कम है, लेकिन आंकड़े ये संकेत देते हैं कि यह समस्या लगातार बनी हुई है. सर्वेक्षण में पुरुषों में मोटापे का फीसदी 27.1 दर्ज किया गया है. पुरुषों मे ये सब कार्यालयों में लंबे समय तक बैठकर काम करना व्यायाम के लिए समय न निकाल पाना और अनियमित खान-पान इस स्थिति के प्रमुख कारण हैं. मोटापे के कारण भविष्य में हृदय रोग और मधुमेह के मामलों में वृद्धि की आशंका भी जताई जा रही है.

Hospital ICU Room
सरकारी अस्पताल का आईसीयू रूम (फाइल फोटो- ETV Bharat)

रिपोर्ट का एक सकारात्मक पक्ष ये भी है कि राज्य में हाई ब्लड प्रेशर के मामलों में कमी दर्ज की गई है. पुरुषों में उच्च रक्तचाप की फीसदी पहले के मुकाबले घटकर 18.3 फीसदी रह गया है. जबकि, महिलाओं में यह आंकड़ा 14.5 फीसदी तक पहुंच गया है. हालांकि, मोटापा बढ़ने की वर्तमान प्रवृत्ति जारी रही, तो आने वाले सालों में उच्च रक्तचाप के मामलों में फिर वृद्धि हो सकती है. इसलिए लोगों को अभी से सतर्क रहने की आवश्यकता है.

बच्चों में कुपोषण की समस्या में आई कमी: उत्तराखंड के लिए सबसे राहत भरी खबर बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ी है. सर्वेक्षण के अनुसार, 5 साल से कम आयु के बच्चों में कुपोषण की दर में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है. बच्चों की लंबाई और वजन से संबंधित करीबन सभी प्रमुख संकेतकों में सुधार देखने को मिला है. कम लंबाई वाले बच्चों की फीसदी 27 से घटकर 20 पर पहुंच गया है. जबकि, कम वजन वाले बच्चों की संख्या भी घटकर 19.6 फीसदी रह गई है.

"आंगनबाड़ी सेवाओं के विस्तार, पोषण अभियान, गर्भवती-महिलाओं की बेहतर निगरानी और बच्चों को समय पर पूरक आहार उपलब्ध कराने की योजनाओं का असर इन आंकड़ों में साफ दिखाई दे रहा है. यह सुधार भविष्य में बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए सकारात्मक साबित होगा."- सुबोध उनियाल, स्वास्थ्य मंत्री, उत्तराखंड

टीकाकरण अभियान का असर भी सकारात्मक: राज्य में बच्चों के टीकाकरण को लेकर भी उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं. रिपोर्ट के अनुसार पूर्ण टीकाकरण प्राप्त करने वाले बच्चों की फीसदी 81.1 से बढ़कर 86 फीसदी तक पहुंच गया है. यह वृद्धि दर्शाती है कि स्वास्थ्य विभाग की टीकाकरण योजनाएं प्रभावी साबित हो रही हैं और अभिभावकों में भी जागरूकता बढ़ी है.

"टीकाकरण कवरेज में वृद्धि से खसरा पोलियो, डिप्थीरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी. पहाड़ी और दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ने का असर भी इन आंकड़ों में दिखाई दे रहा है."- सुबोध उनियाल, स्वास्थ्य मंत्री, उत्तराखंड

नशे की प्रवृत्ति बनी चिंता: सर्वेक्षण में नशे से जुड़े आंकड़े भी सामने आए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, पुरुषों में शराब सेवन करने वालों का फीसदी बढ़ा है. वर्तमान में 27.2 फीसदी पुरुष शराब का सेवन करते हैं. जबकि, पिछले सर्वेक्षण में यह आंकड़ा 25.5 फीसदी था. यह वृद्धि स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. हालांकि, तंबाकू सेवन के मामलों में मामूली कमी दर्ज की गई है. पुरुषों और महिलाओं दोनों वर्गों में तंबाकू के उपयोग में हल्की गिरावट देखने को मिली है.

स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने नई चुनौती: बता दें कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण की रिपोर्ट उत्तराखंड के लिए मिश्रित तस्वीर पेश करती है. एक ओर राज्य ने कुपोषण कम करने टीकाकरण बढ़ाने और कई स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार हासिल किया है, वहीं दूसरी ओर मोटापा और जीवनशैली जनित बीमारियां तेजी से बढ़ती चुनौती के रूप में उभर रही हैं.

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