डीग किले में एंट्री फीस लागू होते ही घटे पर्यटक, 7 दिन में एक भी विदेशी टूरिस्ट नहीं पहुंचा
1 जनवरी से 7 जनवरी 2026 तक कुल 895 पर्यटक किला देखने पहुंचे, जिनमें एक भी विदेशी पर्यटक शामिल नहीं था.

Published : January 11, 2026 at 11:05 AM IST
डीग : शहर के ऐतिहासिक किले को देखने प्रतिदिन बड़ी संख्या में देसी-विदेशी पर्यटक पहुंचते रहे हैं, लेकिन 1 जनवरी 2026 से पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग राजस्थान, जयपुर की ओर से प्रवेश शुल्क लागू किए जाने के बाद पर्यटकों की संख्या में गिरावट देखी जा रही है. विभाग की ओर से किले के मुख्य द्वार पर शुल्क संबंधी बैनर भी लगाया गया है. टिकट खिड़की पर तैनात कनिष्ठ सहायक सोनू सिंह ने बताया कि 1 जनवरी से 7 जनवरी 2026 तक कुल 895 पर्यटक किला देखने पहुंचे, जिनमें एक भी विदेशी पर्यटक शामिल नहीं था. इस अवधि में कुल ₹36,650 की आय हुई.
पर्यटकों और स्थानीय लोगों में नाराजगी : टिकट लगाए जाने को लेकर पर्यटकों में असंतोष देखने को मिल रहा है. निकटवर्ती गांव पान्होरी निवासी रोहिताश अपने तीन मित्रों के साथ किला देखने पहुंचे थे. उन्होंने कहा कि किले के अंदर पर्यटकों के लिए कोई बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं है. ऐसे में टिकट लगाना अनुचित है. स्थानीय निवासी प्रदीप शर्मा ने भी विरोध जताते हुए कहा कि डीग का प्रसिद्ध महल मात्र ₹20 में देखा जा सकता है, जबकि किले के लिए ₹50 शुल्क लिया जा रहा है. उन्होंने सरकार से टिकट व्यवस्था समाप्त करने या शुल्क कम करने की मांग की है. शर्मा के अनुसार, टिकट लागू होने के बाद से पर्यटकों की संख्या में भारी कमी आई है.
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यह हैं टिकट दरें
- विदेशी पर्यटक : ₹200 प्रति व्यक्ति
- देसी पर्यटक : ₹50 प्रति व्यक्ति
- विदेशी छात्र : ₹100 प्रति छात्र
- देसी छात्र : ₹20 प्रति छात्र
सुरक्षा व समय व्यवस्था :
- किले की सुरक्षा के लिए कुल पांच सुरक्षा गार्ड तैनात हैं.
- दिन में : 3 गार्ड
- रात में : 2 गार्ड
- खुलने का समय : सुबह 10 बजे
- बंद होने का समय : शाम 5 बजे
- टिकट वितरण का समय : शाम 4:30 बजे
84 कोस परिक्रमा पर पड़ेगा असर : डीग किला बृज 84 कोस परिक्रमा मार्ग में स्थित है. परिक्रमा करने वाले हजारों श्रद्धालु वर्ष भर किला व जलमहल देखने आते हैं, जिनमें अधिकांश ग्रामीण परिवेश से होते हैं. टिकट लगने से उनके लिए किला देखना कठिन हो सकता है. प्राप्त जानकारी के अनुसार किले के अंदर पुराने भवन की मरम्मत कर संग्रहालय बनाया जा रहा है, जो अभी तक चालू नहीं हुआ है. इसके अलावा किले में साफ-सफाई, पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव बना हुआ है. किले परिसर में स्थित प्राचीन चामड़ मंदिर और राधा-कृष्ण मंदिर तक भी अब बिना टिकट प्रवेश नहीं मिल सकेगा. इससे स्थानीय लोगों का रोजाना भ्रमण भी बंद हो गया है.

