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मेवात की मोबाइल कोर्ट बस बनी धरोहर, अब हेरिटेज ट्रांसपोर्ट म्यूजियम में सहेजी जाएगी न्याय की विरासत

मेवात की मोबाइल कोर्ट बस हाई कोर्ट के आदेश पर हेरिटेज ट्रांसपोर्ट म्यूजियम में धरोहर के रूप में संरक्षित होगी.

nuh Mewat Mobile Court Bus
मेवात की मोबाइल कोर्ट बस बनी धरोहर (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : December 24, 2025 at 3:44 PM IST

3 Min Read
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नूंह: मेवात क्षेत्र की न्यायिक व्यवस्था में एक समय क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली अनोखी मोबाइल कोर्ट बस अब इतिहास के पन्नों में अमर हो गई है. दरअसल, हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों के तहत इस बस को हेरिटेज ट्रांसपोर्ट म्यूजियम, तावडू को दान में सौंप दिया गया है. ग्रामीण इलाकों तक न्याय पहुंचाने का प्रतीक रही यह बस अब संग्रहालय की धरोहर बनकर मेवात के ऐतिहासिक महत्व को राष्ट्रीय स्तर पर उजागर करेगी.

बस हेरिटेज ट्रांसपोर्ट म्यूजियम पहुंची: जिला एवं सत्र न्यायाधीश डॉ. सुशील कुमार गर्ग और जिला उपायुक्त अखिल पिलानी ने म्यूजियम के प्रबंधक इकबाल सिंह को मोबाइल कोर्ट बस की चाबी और सभी आवश्यक दस्तावेज सौंपे. इसके बाद बस को विधिवत रूप से नूंह कोर्ट परिसर से रवाना किया गया. यह बस अपनी अंतिम यात्रा पूरी कर हेरिटेज ट्रांसपोर्ट म्यूजियम पहुंच चुकी है, जहां इसे अदालत के स्वरूप में सजाकर सुरक्षित रखा जाएगा.

मोबाइल कोर्ट की शुरुआत का उद्देश्य: इस मोबाइल कोर्ट बस की शुरुआत साल 2007 में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश के. जी. बालाकृष्णन द्वारा की गई थी. इसका मुख्य उद्देश्य मेवात के दूर-दराज और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को उनके गांव के नजदीक ही न्याय उपलब्ध कराना था. बिछोर, पुन्हाना, लुहिंगाकलां और शिकरावा जैसे गांवों में यह बस जाकर आपराधिक और दीवानी मामलों की सुनवाई करती थी.

अब हेरिटेज ट्रांसपोर्ट म्यूजियम में सहेजी जाएगी न्याय की विरासत (ETV Bharat)

बस में होती थी पूरी न्यायिक प्रक्रिया: मोबाइल कोर्ट बस में जज और न्यायिक स्टाफ मौजूद रहता था. यहां जमानत याचिकाओं पर सुनवाई, सबूत दर्ज करना, बयान लेना और फैसले सुनाने जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जाते थे. यह व्यवस्था खासकर उन लोगों के लिए राहत बनी, जिन्हें कोर्ट तक पहुंचने में समय और संसाधनों की परेशानी होती थी.

पुन्हाना में रही अहम भूमिका: पुन्हाना क्षेत्र में इस मोबाइल कोर्ट की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही. इसे ग्रामीण न्याय व्यवस्था को मजबूत करने का एक अभिनव प्रयास माना गया. हालांकि समय के साथ फोटोस्टेट, टाइपिंग जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी और अन्य व्यावहारिक दिक्कतों के कारण यह व्यवस्था पूरी तरह सफल नहीं हो सकी.

जर्जर अवस्था से म्यूजियम तक का सफर: पुन्हाना में स्थायी अदालत स्थापित होने के बाद मोबाइल कोर्ट बस को फिरोजपुर झिरका कोर्ट परिसर में खड़ा कर दिया गया, जहां यह धीरे-धीरे जर्जर हो गई. हाई कोर्ट की मंजूरी के बाद अप्रैल से इसे म्यूजियम को सौंपने की प्रक्रिया शुरू हुई, जो 23 दिसंबर को पूरी हुई.

मेवात की धरोहर को मिलेगा सम्मान: इस बारे में म्यूजियम प्रबंधक इकबाल सिंह ने बताया कि, "यह देश का एकमात्र हेरिटेज ट्रांसपोर्ट म्यूजियम है, जहां ऐतिहासिक वाहनों को संरक्षित किया जाता है. अब मेवात की यह मोबाइल कोर्ट बस भी यहां गौरवपूर्ण स्थान पाएगी. इससे मेवात का नाम राष्ट्रीय स्तर पर जुड़ेगा और क्षेत्र की न्यायिक विरासत आने वाली पीढ़ियों तक जीवंत बनी रहेगी."

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