नूंह में कैदियों के पुनर्वास की अनोखी पहल: बंदियों द्वारा हो रहा पेट्रोल पंप का संचालन
नूंह में कैदी पेट्रोल पंप में सेवाएं दे रहे हैं. जेल प्रशासन की इस खास पहल की हर जगह सराहना हो रही है.

Published : February 20, 2026 at 12:07 PM IST
|Updated : February 20, 2026 at 12:37 PM IST
नूंह: नूंह जिला जेल ने कैदियों के कौशल विकास और समाज में समायोजन के लिए एक अनोखी पहल की शुरुआत की है. अक्टूबर 2025 से जेल परिसर में एक पेट्रोल पंप संचालित हो रहा है, जिसे केवल अच्छे व्यवहार वाले कैदी ही संभालते हैं. यह पंप आम जनता के लिए भी खुला है, और यहां फ्यूल भरने का कार्य कैदियों द्वारा ही किया जाता है.
"अच्छे व्यवहार वाले कैदियों को लगाया ड्यूटी पर": जेल अधीक्षक विमला गोयत ने कहा, “केवल अच्छे व्यवहार वाले और सजा काट रहे कैदियों को ही नियमों के अनुसार इस ड्यूटी पर लगाया जाता है. वे सुबह 6 बजे से शाम तक फ्यूल पंप पर काम करते हैं और पूरी आय को जेल के अकाउंट में जमा करते हैं.”
हर दिन दो लाख तक की हो रही बिक्री: पेट्रोल पंप पर प्रतिदिन औसतन दो लाख रुपये की बिक्री हो रही है. जेल प्रशासन का दावा है कि यहां उच्च गुणवत्ता वाला फ्यूल उपलब्ध है. इसके अलावा, कैदियों द्वारा बनाए गए हस्तशिल्प और अन्य सामान भी पंप पर उपलब्ध हैं, जिन्हें आम लोग अपनी इच्छा से खरीद सकते हैं. जेल अधीक्षक विमला गोयत ने बताया कि “यदि कोई ग्राहक अपना पसंदीदा सामान बनवाना चाहे, तो हम ऑर्डर भी लेते हैं.”
पुनर्वास को लेकर की गई खास पहल: सरकार की यह पहल कैदियों को समाज में आत्मनिर्भर बनाने और पुनर्वास को आसान बनाने के उद्देश्य से की गई है. जेल से रिहा होने के बाद, ये कैदी अपने कौशल का उपयोग कर सम्मानजनक जीवन जी सकते हैं. पंप और अन्य गतिविधियों से होने वाली आय का उपयोग जेल कल्याण कोष में किया जाएगा. वहीं, जेल अधीक्षक विमला गोयत ने कहा कि, “यह पहल कैदियों को सकारात्मक दिशा देती है और उन्हें समाज में बेहतर तरीके से शामिल होने में मदद करती है.”
ग्राहकों ने साझा किया अपना अनुभव: पंप के नियमित ग्राहक एडवोकेट मंजू ने अनुभव साझा करते हुए कहा कि, “पंप पर ड्यूटी करने वाले कैदियों का व्यवहार बहुत अच्छा है. देखकर नहीं लगता कि वे कैदी हैं. उनका व्यवहार एक सकारात्मक सामाजिक संदेश देता है.” वहीं, एक अन्य ग्राहक जवाहर सिंह ने कहा कि, " इन कैदियों का व्यवहार अच्छा है. ये पहल समाज को खास संदेश दे रहा है. आगे इनका जीवन और आसान हो जाएगा."


कैदियों ने साझा किया अपना अनुभव: गांव जलालपुर निवासी फारूक, जो 2016 से आईपीसी धारा 302 के मामले में सजा काट रहे हैं उन्होंने कहा कि, “2023 से मैं जेल के बाहर इस फ्यूल पंप पर ड्यूटी कर रहा हूं. मुझे कोई दिक्कत नहीं है, जेल प्रशासन का पूरा सहयोग मिलता है. लोग गैर-कानूनी कार्यों से दूर रहें, अच्छा व्यवहार करें और सही जीवन जिएं.” वहीं, एक अन्य बंदी रसीद ने कहा, “पंप पर काम करना मेरे लिए सीखने का अनुभव है. मैं अपने कौशल से समाज में योगदान देना चाहता हूं और रिहाई के बाद आत्मनिर्भर बनना चाहता हूं.”
पहल का सामाजिक प्रभाव: इस समय पेट्रोल पंप पर चार कैदी सेवाएं दे रहे हैं. सूरजकुंड मेले में भी कैदियों द्वारा तैयार किए गए सामान की प्रदर्शनी लगाई गई थी, जिसने लोगों का ध्यान आकर्षित किया. हालांकि नूंह जेल की यह पहल हरियाणा जेल विभाग की उन योजनाओं का हिस्सा है, जो कैदियों को समाज में बेहतर ढंग से शामिल होने में मदद करती हैं.
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