अधिसूचना जारी होते ही राज्य में पेसा कानून लागू: जानिए नियमावली में क्या है प्रावधान
झारखंड में पेसा कानून लागू करने को लेकर अधिसूचना जारी हो गयी है.

Published : January 2, 2026 at 11:30 PM IST
रांचीः कैबिनेट से पास होने के बाद से पेसा नियमावली को सार्वजनिक करने के उठ रही मांग पर अब विराम लगता दिख रहा है. राज्य सरकार के पंचायती राज विभाग के सचिव के हस्ताक्षर से इस संबंध में अधिसूचना आज 2 जनवरी को जारी कर दी गई है.
अधिसूचना के अनुसार अनुसूचित क्षेत्रों के संरक्षण और विकास के लिए सरकार ने कई प्रावधान किए हैं. करीब 20 पेज के इस अधिसूचना में 17 अध्यायों में विस्तार से पेसा नियमावली के प्रावधान का वर्णन किया गया है इसके अलावा अधिसूचना के साथ 8 पृष्ठों का विभिन्न आवेदन प्रारुप को भी विभाग ने जारी किया है जिससे ग्राम सभा के कामकाज आसानी से हो.
ग्राम सभा के अध्यक्ष होंगे परंपरा से प्रचलित रीति-रिवाज के अनुसार मान्यता प्राप्त व्यक्ति
पेसा नियमावली में ग्राम सभा के अध्यक्ष अनुसूचित क्षेत्र के पारंपरिक ग्राम सभा क्षेत्र में परंपरा से प्रचलित रीति रिवाज के अनुसार मान्यता प्राप्त व्यक्ति जैसे संथाल समुदाय- मांझी/परगना, हो समुदाय- मुंडा/मानकी/दिउरी, खड़िया समुदाय-डोकलो सोहोर, मुंडा समुदाय-हातू मुंडा/पड़हा बेल(राजा)/पहान,भूमिज-मुड़ा/सरदार/नाया/डाकुआ होंगे.
ग्राम सभा के सचिव ग्राम पंचायत का पंचायत सचिव होगा वहीं सहायक सचिव ग्राम सभा द्वारा चुने गए पंचायत सहायक अथवा अन्य सदस्य होंगे. पारंपरिक ग्राम ग्राम सभाओं तथा उनकी सीमाओं की मान्यता और प्रशासन की जिम्मेदारी उपायुक्त को दी गई है जिनके द्वारा प्रखंड स्तर पर एक टीम का गठन किया जाएगा.
प्रत्येक पारंपरिक ग्राम सभा राजस्व ग्राम के समान होगी जिसकी पहचान उपायुक्त द्वारा गठित टीम पारंपरिक ग्राम सभा के प्रधान और सदस्यों के साथ मिलकर करेंगे.नियमावली के अनुसार ग्राम सभा की बैठक महीने में काम से कम एक बार होगी. जो ग्राम सभा के सदस्यों की कुल संख्या के 1/10 सदस्यों अथवा 50 सदस्यों जो भी कम हो के लिखित अपेक्षा किए जाने पर या ग्राम प्रधान ग्राम पंचायत के मुखिया, पंचायत समिति, जिला परिषद या जिला दंडाधिकारी या उपायुक्त द्वारा अपेक्षित किए जाने पर ग्राम सभा की बैठक सात दिनों के अंदर भी बुलाई जा सकती है.
ग्राम सभा के कुल सदस्यों की संख्या के एक तिहाई सदस्यों की संख्या कोणों के लिए अनिवार्य है वहीं इन एक तिहाई सदस्यों की संख्या में भी एक तिहाई महिला सदस्यों की उपस्थिति भी अनिवार्य होगी. ग्राम सभा की बैठक का संचालन इसकी अध्यक्षता करने वाली व्यक्ति द्वारा किया जाएगा जो अध्यक्ष के नाम से संबोधित किया जाएगा. ग्राम सभा के निर्णय के आलोक में ग्राम पंचायत यथासंभव कार्य करेगी. ग्राम सभा के सरकारी योजनाओं एवं चयनित लाभुकों की योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी ग्राम पंचायत की कार्यकारिणी समिति की होगी.

ग्राम सभा को दंडित करने के अलावा कई अधिकार
पेसा नियमावली के तहत ग्राम सभा को छोटे मोटे अपराध के लिए जहां किसी दोषी व्यक्ति को दंडित करने का अधिकार संपन्न बनाया गया है. वहीं अनुसूचित क्षेत्र को लेकर कई अधिकार दिए गए हैं. नियमावली के अनुसार राज्य सरकार द्वारा गांव के अधिकार एवं दायित्व के संबंध में निर्गत नियम अनुसूचित जनजाति की प्रथा सामाजिक धार्मिक और पारंपरिक प्रबंधन के अनुरूप होगा. जिसके तहत यदि ग्राम सभा में या राय हो कि कोई नियम जिसे अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तारित किया गया है.
वह उनकी प्रथम सामाजिक और धार्मिक प्रथाओं और समुदायों के पारंपरिक प्रबंधन प्रथाओं या कोई भी विषय जो अनुसूचित क्षेत्र के दायरे में आता है कि अनुरूप नहीं है तो ग्राम सभा इससे संबंधित प्रस्ताव पर बैठक में निर्णय लेगी इस प्रकार के पारित प्रस्ताव को ग्राम सभा उपयुक्त को अग्रसारित करेगी जिसे उपायुक्त राज्य सरकार को प्रेषित करेंगे.
राज्य सरकार ऐसे संकल्प प्राप्ति के 30 दिनों के अंतर्गत आवश्यक कार्रवाई हेतु एक उच्च स्तरीय समिति की गठन करेगी जो 90 दिनों के अंदर अपनी सलाह राज्य सरकार को प्रेषित करेगी. सरकार ऐसे संकल्प प्राप्ति के 160 दिनों के अंदर लिए जा रहे निर्णय या लिए गए निर्णय को ग्राम सभा को सूचित करेगी.
इसके अलावा ग्राम सभा अपने समुदाय की परम्परा के अनुरूप ग्राम सभा क्षेत्र में निम्न कारवाईयों/कार्यों के लिए सक्षम होगी.
भय रहित शांत माहीत कायम करना, ग्राम सभा के नागरिकों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं आत्मसम्मान की रक्षा करना, महिलाओं, वृद्धों एवं बच्चों के साथ दुर्व्यवहार, सार्वजनिक स्थानों पर झगड़े इत्यादि सहित असामाजिक तत्वों के द्वारा किये जाने वाले दुराचार पर रोक लगाना और विवादों का समाधान पारम्परिक रीति रिवाजों एवं प्रथागत कानून के अनुसार किया जाना शामिल है.

पेसा नियमावली पर भाजपा ने कसा तंज, आदिवासियों को छलने का लगाया आरोप
विपक्षी दल भाजपा ने झारखंड सरकार द्वारा पिछले महीने पारित पेसा कानून को आज सार्वजनिक किए जाने के बाद तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि आदिवासी समाज के साथ छल करने का स्पष्ट प्रयास इससे प्रतीत होता है. पूर्व मंत्री अमर कुमार बाउरी ने कहा है कि सरकार ने इस कानून की आत्मा को ही कुचलने का काम किया है. उन्होंने कहा है कि सरकार ने रूढ़िवादी जनजातीय परंपराओं को स्पष्ट रूप से परिभाषित नहीं किया है, जिसके कारण ऐसे लोगों को भी इसका लाभ मिल सकता है, जिनका इस वर्ग से कोई संबंध नहीं है.
यह आदिवासी समाज के अधिकारों के साथ अन्याय है. वन उपज, खनिज संसाधन एवं जल स्रोतों पर ग्राम सभा को नियंत्रण देने के बजाय सरकार और जिला अधिकारियों ने कई महत्वपूर्ण अधिकार अपने पास ही सुरक्षित रखे हैं. यह ग्राम सभा की संवैधानिक शक्तियों को सीधे-सीधे कुंठित करने का प्रयास है. यह पूरी तरह स्पष्ट है कि झारखंड सरकार ने पेशा कानून को अपने नियंत्रण में रखने का प्रयास किया है, जबकि इसका मूल उद्देश्य ग्राम सभा को सशक्त बनाना था.
वर्तमान स्वरूप में लाया गया यह कानून 1996 के मूल पेशा कानून की भावना के विपरीत है और इसे सरकार ने अपने स्वार्थों की पूर्ति के लिए तैयार किया है.हम इसका पुरजोर विरोध करते हैं और आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए हर संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक मंच पर संघर्ष जारी रहेगा.
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