बिहार का हाल-ए-स्वास्थ्य व्यवस्था देखिए, 30 करोड़ से बने अस्पताल में 18 दिनों से टेस्ट तक नहीं हो रहा
मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल में स्वास्थ्य व्यवस्था फेल दिख रहा है. CBC केमिकल खत्म होने से 10 फरवरी से जांच बंद है. पढ़ें खबर

Published : February 28, 2026 at 6:05 PM IST
रिपोर्ट : विवेक कुमार
मुजफ्फरपुर : बिहार में स्वास्थ्य सेवा को उच्च स्तरीय बनाने के लिए सरकार भारी-भरकम बजट रखती है. 2026-27 में स्वास्थ्य विभाग के लिए ₹21,270.40 करोड़ का प्रावधान किया गया. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से लेकर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय अपनी पीठ थपथपाते नजर आते हैं. पर जमीनी हकीकत क्या है चलिए आपको उससे रू-ब-रू करवाते हैं.
सदर अस्पताल में ब्लड जांच नहीं : मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल जो अब मॉडल अस्पताल के रूप में विख्यात है, उसमें स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही सामने आई है. अस्पताल के पैथोलॉजी विभाग में आवश्यक CBC केमिकल उपलब्ध नहीं होने के कारण 10 फरवरी से ब्लड से संबंधित सभी प्रमुख जांच पूरी तरह ठप पड़ी हुई हैं. इसका सीधा असर मरीजों पर पड़ रहा है.
सैकड़ों मरीजों को परेशानी : रोजाना लगभग 150 मरीज बिना जांच कराए ही अस्पताल से लौटने को मजबूर हैं. स्थिति यह है कि डॉक्टर मरीजों को इलाज के लिए जरूरी जांच लिख रहे हैं, लेकिन पैथोलॉजी काउंटर पर पहुंचते ही उन्हें बताया जा रहा है कि जांच संभव नहीं है. इससे खासकर गरीब और ग्रामीण इलाकों से आने वाले मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
जितने लोग उतनी समस्या : अहियापुर से इलाज कराने आई जंगलिया देवी ने बताया कि उनके हाथ में कई दिनों से घाव है और तेज दर्द हो रहा है. उन्होंने कहा, ''आज सदर अस्पताल इलाज के लिए आए थे. डॉक्टर ने ब्लड जांच लिखी, लेकिन जब पैथोलॉजी विभाग पहुंचे तो बताया गया कि जांच नहीं होगी, क्योंकि केमिकल नहीं है.''

सकरा गांव से पेट दर्द की शिकायत लेकर आई राधा देवी ने बताया कि डॉक्टर ने ब्लड टेस्ट और अन्य जांच लिखी थी, लेकिन जांच काउंटर पर पहुंचने पर कहा गया कि फिलहाल कोई भी जांच संभव नहीं है. वहीं राघनी श्रीवास्तव ने बताया कि उन्हें काफी समय से ज्यादा कफ और किडनी की समस्या है.
''डॉक्टर ने CBC और ब्लड शुगर जांच लिखी है, लेकिन यहां कहा जा रहा है कि जांच नहीं होगी. पति-पत्नी दोनों बीमार हैं. बाहर जांच कराने के लिए फिलहाल पैसे भी नहीं हैं. अब घर जाकर पैसे की व्यवस्था करेंगे, फिर बाहर से जांच करानी पड़ेगी.''- राघनी श्रीवास्तव, सदर अस्पताल पहुंचे मरीज

तिलक मैदान रोड से आए मधुकुंज श्रीवास्तव ने बताया कि वह पहले दिल्ली में रहते थे, वहीं बीमार पड़े थे. उन्होंने कहा, ''किडनी की परेशानी है. डॉक्टर ने CBC, किडनी टेस्ट और अन्य जांच लिखी है, लेकिन सदर अस्पताल में जांच नहीं हो पा रही है. इतने बड़े अस्पताल में भी अगर जांच नहीं होगी तो गरीब मरीज कहां जाएंगे?''
वरीय अधिकारियों को दी जा चुकी है सूचना : पैथोलॉजी विभाग के कर्मी मिथलेश कुमार ने बताया कि CBC केमिकल खत्म होने के कारण प्रतिदिन 100 से 150 मरीज जांच कराए बिना लौट रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह समस्या पिछले 10 फरवरी से बनी हुई है. इसकी सूचना अस्पताल प्रबंधक सहित वरीय अधिकारियों को पहले ही दी जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकाला गया है.

कैमरा पर बोलने से बचे प्रबंधक : अस्पताल प्रबंधक प्रवीण कुमार ने कहा कि मामले की जानकारी हमने दी है. वरीय अधिकारी और मुख्यालय को सूचना दे दी गई है. हालांकि ऑन कैमरा कुछ भी बताने से बचते रहे.
स्वास्थ्य विभाग पर सवाल : मॉडल सदर अस्पताल को जिले के लिए एक बड़ी उपलब्धि बताया गया था, लेकिन मौजूदा स्थिति से स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं. मरीजों का कहना है कि अगर समय पर जरूरी दवाएं और केमिकल की आपूर्ति नहीं हो सकती, तो करोड़ों रुपये खर्च कर मॉडल अस्पताल बनाने का क्या फायदा?
दरअसल, मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल परिसर में 14 मई 2025 को करीब 29 करोड़ 80 लाख रुपये की लागत से बने 100 बेड के तीन मंजिला मॉडल सदर अस्पताल का उद्घाटन किया गया था. इस मॉडल अस्पताल में ओपीडी, पंजीयन कक्ष, आधुनिक पैथोलॉजी लैब, एक्स-रे, दवा वितरण केंद्र और अन्य अत्याधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने का दावा किया गया था.
उद्देश्य था कि जिले के ग्रामीण और दूर-दराज के इलाकों से आने वाले मरीजों को बेहतर इलाज मिल सके और उन्हें निजी अस्पतालों में महंगी जांच न करानी पड़े. लेकिन मौजूदा हालात इन दावों की पोल खोल रहे हैं. करोड़ों रुपये की लागत से बने मॉडल अस्पताल में जरूरी केमिकल की कमी के कारण बुनियादी जांच तक नहीं हो पा रही है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि CBC जैसी बुनियादी जांच के बिना सही इलाज संभव नहीं है. ऐसे में मरीजों को या तो इलाज अधूरा छोड़ना पड़ता है या निजी जांच केंद्रों में महंगी जांच करानी पड़ती है, जो गरीब तबके के लिए मुश्किल है.

उठते सवाल..? : अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि स्वास्थ्य विभाग कब तक इस गंभीर समस्या का समाधान करेगा और मॉडल सदर अस्पताल में जांच सुविधाएं फिर से बहाल होंगी. जब तक केमिकल की आपूर्ति नहीं होती, तब तक मरीजों की परेशानी यूं ही जारी रहने की आशंका है.
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