हरियाणा में '90 के दशक' का गांव, मोबाइल नेटवर्क की तलाश में नवाजपुर, तीन किलोमीटर दूर जाकर मिलती है 'सिग्नल की भीख'
नवाजपुर गांव आज भी मोबाइल नेटवर्क के लिए तरस रहा. घर-घर WiFi, फिर भी डिजिटल सुविधाओं से दूर ग्रामीण. यमुनानगर से सुनील कुमार की रिपोर्ट.

Published : September 3, 2026 at 2:14 PM IST
यमुनानगर: एक तरफ सरकार डिजिटल इंडिया पर जोर दे रही है. योजनाएं सीधा लोगों तक पहुंचे इसलिए 5G मोबाइल नेटवर्क, पोर्टल और वेबसाइट पर जोर दिया जा रहा है. दूसरी तरफ हरियाणा में '90 के दशक' का गांव मोबाइल नेटवर्क की डंडियों के लिए तरस रहा है. हरियाणा और उत्तर प्रदेश के बॉर्डर पर स्थित यमुनानगर का नवाजपुर गांव 21वीं सदी में भी मोबाइल नेटवर्क की सुविधा से महरूम है.
यमुनानगर के नवाजपुर गांव में नहीं मोबाइल नेटवर्क: करीब 850 की आबादी वाले नवाजपुर गांव में किसी भी मोबाइल कंपनी का टावर नहीं है. जिसके चलते मोबाइल में नेटवर्क ना के बरारबर आता है. हालात ये हैं कि फोन कॉल करने या रिसीव करने के लिए ग्रामीणों को गांव से 3-4 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है. मोबाइल नेटवर्क नहीं होने का असर बच्चों की पढ़ाई से लेकर ऑनलाइन पेमेंट तक पर पड़ रहा है.
एक कॉल के लिए 3-4 किलोमीटर का सफर: नवाजपुर के निवास संजय गुर्जर के मुताबिक गांव में मोबाइल नेटवर्क की स्थिति बेहद खराब है. किसी को फोन करना हो या बाहर से आने वाली कॉल रिसीव करनी हो, तो ग्रामीणों को गांव से बाहर जाना पड़ता है. कई बार लोग ऊंची छतों पर जाकर नेटवर्क तलाशते हैं, लेकिन वहां भी सिग्नल स्थिर नहीं रहता.

UPI पेमेंट नहीं कर पा रहे लोग: मोबाइल नेटवर्क नहीं होने के कारण सिर्फ बातचीत ही प्रभावित नहीं हो रही, बल्कि रोजमर्रा के कई जरूरी काम भी रुक जाते हैं. किसी रिश्तेदार की तबीयत खराब होने या कोई आपात स्थिति होने पर समय पर फोन पर सूचना मिलना मुश्किल हो जाता है. आज UPI और ऑनलाइन बैंकिंग ने लेन-देन को आसान बना दिया है, लेकिन नवाजपुर में मोबाइल नेटवर्क नहीं होने से डिजिटल पेमेंट भी बड़ी समस्या है. ग्रामीणों को ऑनलाइन भुगतान के लिए दूसरे गांव की ओर जाना पड़ता है ग्रामीण सवाल उठा रहे हैं कि जब गांव में मोबाइल नेटवर्क ही नहीं है, तो डिजिटल इंडिया और ऑनलाइन बैंकिंग जैसी सुविधाओं का लाभ उन्हें कैसे मिलेगा?

WhatsApp पर आता है होमवर्क, नेटवर्क के कारण पढ़ाई प्रभावित: मोबाइल नेटवर्क की समस्या का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है. स्कूलों में कई बार होमवर्क और जरूरी सूचनाएं WhatsApp ग्रुप के माध्यम से भेजी जाती हैं, लेकिन नवाजपुर में मोबाइल इंटरनेट नहीं होने के कारण बच्चों को परेशानी होती है. गांव की छात्रा दृष्टि ने बताया कि घर पर पढ़ाई करने में दिक्कत आती है. पढ़ाई के लिए जब गांव से बाहर जाना पड़ता है, तो वहां से माता-पिता से संपर्क करने की समस्या भी बनी रहती है.

घर-घर WiFi, कई परिवारों ने लगाए दो-दो कनेक्शन: मोबाइल नेटवर्क नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने अपने स्तर पर वैकल्पिक इंतजाम किए हैं. गांव के 70 से 80 फीसदी घरों में WiFi कनेक्शन हैं. कई परिवारों ने तो दो अलग-अलग कंपनियों के WiFi तक लगवा रखे हैं, ताकि एक कनेक्शन बंद होने पर दूसरे से काम चलाया जा सके. इसके बावजूद WiFi मोबाइल नेटवर्क का पूरा विकल्प नहीं बन पा रहा. खासकर घर से बाहर निकलते ही किसान और ग्रामीण मोबाइल नेटवर्क से पूरी तरह कट जाते हैं. वहीं मोबाइल का और WIFI का अलग-अलग रिचार्ज करवाना पड़ता है.

सरपंच प्रतिनिधि बोले- टावर के लिए जमीन देने को तैयार: सरपंच प्रतिनिधि संजीव कुमार का कहना है कि पंचायत की ओर से कई बार अधिकारियों, विधायक और सांसद के सामने मोबाइल नेटवर्क की समस्या रखी जा चुकी है. बीएसएनएल से भी संपर्क किया गया, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक उन्हें बताया गया कि गांव की आबादी कम होने के कारण यहां टावर लगाना संभव नहीं है. नवाजपुर से करीब 4-5 किलोमीटर दूर तेलीपुरा गांव में मोबाइल टावर हैं, लेकिन उसका नेटवर्क नवाजपुर तक नहीं पहुंचता. ग्रामीण किसी भी मोबाइल कंपनी को टावर लगाने के लिए जमीन उपलब्ध कराने को तैयार हैं.

प्रशासन ने लिए संज्ञान, जल्द कार्रवाई का आश्वासन: गांव की इस समस्या को लेकर जब छछरौली के एसडीएम से बातचीत की गई, तो उन्होंने जांच का आश्वासन दिया. उन्होंने दावा किया कि जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा.
ये मामला अभी मेरे संज्ञान में आया है. संबंधित मोबाइल कंपनी से बात कर गांव की नेटवर्क समस्या का समाधान कराने का प्रयास किया जाएगा, जल्द ही इस समस्या का समधान किया जाएगा. -जसपाल गिल, SDM छछरौली
850 की आबादी, डिजिटल दौर में नेटवर्क का इंतजार: नवाजपुर के ग्रामीणों की परेशानी सिर्फ मोबाइल पर बात करने तक सीमित नहीं है. नेटवर्क नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई, डिजिटल पेमेंट, ऑनलाइन बैंकिंग और आपातकालीन संपर्क जैसी जरूरी सुविधाएं प्रभावित हो रही हैं. ग्रामीणों का कहना है कि वो टावर के लिए जमीन देने को तैयार हैं, जरूरत सिर्फ प्रशासन और मोबाइल कंपनियों की पहल की है. भारत देश को आजाद हुए 79 साल पूरे हो चुके हैं, लेकिन यमुनानगर का ये गांव आज भी मोबाइल नेटवर्क के एक-एक डंडे के लिए तरस रहा है. अब देखना होगा कि करीब 850 की आबादी वाले नवाजपुर गांव की ‘डिजिटल पुकार’ कब सुनी जाती है और ग्रामीणों को मोबाइल नेटवर्क की सुविधा कब मिलती है.

