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मऊगंज हिंसा मामले में CBI जांच आवश्यक नहीं, हाईकोर्ट में मध्य प्रदेश सरकार का जवाब

आदिवासी परिवारों के साथ हिंसा मामले में की गई थी सीबीआई जांच की मांग, सरकार के तर्क पर याचिकाकर्ता को जवाब पेश करने के निर्देश.

MAUGANJ CASE HEARING HIGHCOURT
मऊगंज हिंसा मामले में सीबीआई की जांच आवश्यक नहीं (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 10, 2026 at 11:45 AM IST

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जबलपुर : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में शुक्रवार को मऊगंज के आदिवासी परिवारों के साथ हुई हिंसा के मामले में सुनवाई हुई. इस मामले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसमें मामले की सीबीआई जांच करने की मांग की गई थी. सीबीआई जांच की मांग संबंधी याचिका पर चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा व जस्टिस विनय सराफ की युगलपीठ ने सरकार द्वारा स्टेटस रिपोर्ट देखने के बाद फैसला सुनाया है.

क्या है मऊगंज हिंसा का पूरा मामला?

इस मामले में रीवा हनुमना निवासी पूर्व विधायक सुखेन्द्र सिंह बन्ना की ओर से याचिका दायर की गई थी. याचिका में कहा गया था कि मऊगंज के ग्राम गडरा में आदिवासी परिवारों की भूमि खाली कराने को लेकर भू-माफियाओं ने मारपीट की थी. पूरे मामले के हिंसक रूप लेने के दौरान जमकर उपद्रव मचा था, जिसमें ड्यूटी पर तैनात एक एएसआई की भी मौत हो गई थी. इसके बाद माफियाओं ने कई आदिवासियों की हत्या कर दी, इतना ही नहीं एक ही परिवार के तीन लोग फांसी के फंदे पर लटके हुए भी पाए गए थे. इतना सब होने के बावजूद मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई.

मामले की सीबीआई जांच करने की थी मांग

आवेदक की ओर से याचिका में आगे कहा गया कि हिंसा में करीब 6 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी, वहीं करीब डेढ़ से दो सौ आदिवासी परिवार अपना घर बार छोड़कर गायब हो गए, जिनका अब तक कुछ पता नहीं चला है. इस मामले की संबंधित अधिकारियों से लेकर उच्चाधिकारियों को शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिसपर सीबीआई जांच की मांग करते हुए हाईकोर्ट की शरण ली गई है. मामले में गृह विभाग के प्रमुख सचिव, डीजीपी रीवा, आईजी रीवा, कलेक्टर व एसपी मऊगंज, केन्द्र सरकार के गृह मंत्रालय के सचिव व सीबीआई को पक्षकार बनाया गया है.

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सरकार ने कहा सीबीआई जांच की जरूरत नहीं

युगलपीठ ने सुनवाई पश्चात सरकार को स्टेट्स रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए थे. सरकार की ओर से दस्तावेजों के साथ रिपोर्ट पेश करते हुए बताया गया कि याचिका में लगाए गए आरोप निराधार हैं. सीबीआई पर पहले ही अतिरिक्त वर्क लोड है, ऐसी स्थिति में सीबीआई की जांच आवश्यक नहीं है. इसपर युगलपीठ ने सरकार की ओर से पेश किए गए जवाब पर याचिकाकर्ता को अपना पक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं. इस मामले में अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की गई है.