No Bag Day पर 'सत्ता की गतिविधियां' की चर्चा पर छिड़ी बहस, सरकारी स्कूलों में अख़बार पढ़ाने का स्वागत
शिक्षा विभाग के हालिया आदेश ने नई बहस छेड़ दी. इसमें प्रार्थना सभा में अखबार पढ़ना और सम सामयिक चर्चा को अनिवार्य किया है.

Published : January 2, 2026 at 2:04 PM IST
जयपुर : राज्य के सरकारी स्कूलों की प्रार्थना सभा अब सिर्फ प्रार्थना और अनुशासन का मंच नहीं रहेगी, बल्कि उसे 'न्यूज क्लासरूम' का रूप दिया जा रहा है. इस संबंध में शिक्षा विभाग ने आदेश जारी कर प्रार्थना सभा में अखबार पढ़ना और समसामयिक चर्चा को अनिवार्य कर दिया. हालांकि इस आदेश में No Bag Day के दिन 'सत्ता की गतिविधियों' पर चर्चा के निर्देश ने शिक्षा के राजनीतिकरण को लेकर नई बहस छेड़ दी.
No Bag Day और विवाद की जड़: शिक्षा विभाग के आदेश का सबसे चर्चित बिंदु No Bag Day से जुड़ा है. निर्देशों में कहा कि इस दिन विद्यार्थियों से सत्ता की गतिविधियों पर चर्चा कराई जाए. विभाग का दावा है कि इससे छात्र प्रशासनिक कार्यप्रणाली और नागरिक जिम्मेदारियों को बेहतर समझ पाएंगे.
शिक्षक संगठनों ने भी उठाए सवाल: हालांकि No Bag Day की शुरुआत रचनात्मक और तनावमुक्त सीख के लिए हुई थी, लेकिन कहीं ये दिन राजनीतिक मंच में न बदल जाए. इस पर शिक्षक संघ शेखावत के प्रदेश अध्यक्ष महावीर सिहाग ने तीखी आपत्ति जताते हुए कहा कि No Bag Day पर सत्ता की गतिविधियों पर चर्चा से क्या सरकार विद्यार्थियों को केवल 'प्रजा' बनाना चाहती है? शिक्षा का उद्देश्य तार्किक सोच, वैज्ञानिक दृष्टि और विश्लेषण क्षमता विकसित करना है, न कि सामंती मानसिकता को बढ़ावा देना. संघ ने इस निर्देश को वापस लेने की मांग की. वहीं शिक्षक संघ एकीकृत के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. रणजीत मीणा ने बताया कि अखबार और पत्रिकाओं का पठन स्वागत योग्य है. स्कूलों में प्रार्थना सभा और लास्ट पीरियड में पूर्व में भी ये गतिविधि हो रही है, लेकिन स्कूलों में राजनीतिक गतिविधियों की चर्चा उचित नहीं. उन्होंने कहा कि इतिहास गवाह है कि जहां-जहां राजनीति ने शिक्षा में प्रवेश किया, वहां पढ़ाई का स्तर गिरा है.
प्रार्थना सभा बनेगी 'न्यूज क्लासरूम': आदेश के अनुसार प्रदेश के सभी सरकारी स्कूलों में प्रार्थना सभा के दौरान नियमित अखबार पढ़ना और चर्चा अनिवार्य होगी ताकि छात्रों को राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और खेल जगत की घटनाओं की जानकारी मिल सके. उनमें पढ़ने की आदत विकसित होगी. भाषा-ज्ञान भी मजबूत होगा. स्कूलों में हिंदी और इंग्लिश दोनों भाषाओं में अखबार होने की अनिवार्यता की गई है. जिस कक्षा को समाचार पढ़ने की जिम्मेदारी दी जाएगी, उसके विद्यार्थियों को स्कूल समय से 30 मिनट पहले पहुंचकर महत्वपूर्ण खबरों का चयन करना होगा. यही छात्र प्रार्थना सभा में समाचार पढ़ेंगे ताकि उनमें आत्मविश्वास, नेतृत्व और प्रस्तुतीकरण कौशल विकसित हो. ये एक्टिविटी पूरी तरह Reading and Remediation अभियान से जुड़ी है. इसमें छात्रों को नए शब्द सीखने को भी मिलेंगे. उनका श्रुतिलेख भी करवाने के निर्देश दिए गए. इस पर शिक्षक संघ सियाराम के प्रदेश प्रवक्ता मुकेश मीणा ने कहा कि प्रार्थना सभा में अखबार पढ़ाना सराहनीय पहल है. इससे छात्रों का करंट अफेयर्स और जनरल नॉलेज मजबूत होगा. साथ ही शिक्षक भी अपडेट रहेंगे.
स्कूलों में लोकतंत्र की पढ़ाई या...: आदेश में स्पष्ट है कि अखबारों के लिए आवश्यक राशि राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी. अनुपालना की जिम्मेदारी विद्यालय प्रशासन और संबंधित शिक्षा अधिकारियों की होगी. हालांकि इसके इतर शिक्षा जगत में उठ रही बहस बताती है कि मामला सिर्फ अखबार पढ़ने तक सीमित नहीं है. असली सवाल यही है कि क्या स्कूलों में लोकतंत्र की पढ़ाई होगी या सत्ता की व्याख्या?

