नियद नेल्लानार योजना की धमक,अबूझमाड़ में पहुंची सुशासन की 'मशाल'
बाइक में सवार होकर नारायणपुर कलेक्टर और प्रशासन जिले के अंतिम गांव पहुंचा. इस दौरान ग्रामीणों की कई समस्याओं का तुरंत समाधान किया गया.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : February 26, 2026 at 7:20 PM IST
नारायणपुर: जिले का अबूझमाड़ जैसे-जैसे नक्सलियों से मुक्त हो रहा है वैसे-वैसे विकास भी अंदरूनी इलाकों तक पहुंचने लगा है. अब जहां सड़कें खत्म हो जाती है वहां भी सरकार की नियद नेल्लानार योजना से विकास होने लगा है.
जिले के अंतिम छोर 'जटवर' पहुंची कलेक्टर
नारायणपुर के अबूझमाड़ में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिल रहा है. गुरुवार को दुर्गम रास्तों पर नदी-नालों और घने जंगलों की परवाह किए बिना कलेक्टर नम्रता जैन खुद मोटरसाइकिल पर सवार होकर जिले के अंतिम छोर 'जटवर' पहुंच गईं. यह सिर्फ एक दौरा नहीं, बल्कि 'नियद नेल्लानार' (आपका अच्छा गांव) योजना के तहत उस भरोसे की बहाली है, जो दशकों से माड़ के जंगलों में नक्सल छाया में कहीं खोया हुआ था.
अबूझमाड़ में सुशासन आपके द्वार
अबूझमाड़ के अति-संवेदनशील क्षेत्र ग्राम पंचायत घमंडी और उसके आश्रित गांवों में पहली बार 'सुशासन आपके द्वार' का शंखनाद हुआ. कलेक्टर ने न केवल ग्रामीणों की समस्याओं को उनके गांव में चौपाल लगाकर सुना, बल्कि मौके पर ही समाधान भी किया. कलेक्टर ने कोड़ेनार पुलिस कैंप में बच्चों को स्वेटर और ग्रामीणों को दैनिक उपयोगी सामग्री वितरित किया.

शिविर की बड़ी बातें:
फटाफट एक्शन: विभिन्न शासकीय विभागों के स्टॉल्स पर 158 आवेदनों का त्वरित निराकरण किया गया.
दस्तावेजों का वितरण: ग्रामीणों के हाथों में 21 राशन कार्ड, 34 नरेगा जॉब कार्ड और 60 जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र थमाए गए.
शिक्षा और स्वास्थ्य पर ज़ोर: कोड़ेनार, तोके और जटवर जैसे गाँवों में नए आंगनबाड़ी केंद्र और प्राथमिक शालाएं खोलने की घोषणा हुई.
सराहना: दुर्गम क्षेत्र में पहला स्कूल संचालित करने वाले 'शिक्षा दूत' की पीठ थपथपाई गई.
बाजार की सौगात: जटवर में साप्ताहिक बाजार शुरू करने की मांग पर मुहर लगी, जिससे अब माड़ की अर्थव्यवस्था को नई रफ़्तार मिलेगी.

नियद नेल्लानार क्या है
'नियद नेल्लानार' का अर्थ है 'आपका अच्छा गांव'. एसडीएम और जनपद सीईओ सहित पूरी प्रशासनिक टीम के साथ जंगल और पहाड़ लांघकर पहुंची कलेक्टर ने यह साफ़ कर दिया है कि अब भूगोल विकास के रास्ते का रोड़ा नहीं बनेगा. अबूझमाड़ का हर वो गांव जो अब तक उपेक्षित था, अब विकास की मुख्यधारा में 'अंतिम नहीं, बल्कि प्रथम' पंक्ति में खड़ा होगा.


