धर्म परिवर्तन को रोकने के लिए कानून लाएगी बिहार सरकार? नीतीश के मंत्री ने दिया ये जवाब
बिहार विधानसभा में धर्म परिवर्तन का मुद्दा उठा. सत्ताधारी विधायकों ने नए कानून की मांग की. पढ़ें मंत्री ने क्या कहा?

Published : February 27, 2026 at 1:16 PM IST
पटना: बिहार विधानसभा के बजट सत्र के आखिरी दिन धर्म परिवर्तन को लेकर कड़े कानून बनाने का सवाल गूंजा. ध्यानाकर्षण के माध्यम से सत्ता पक्ष के कई सदस्यों ने इस सवाल को उठाया है. जिसमें मैथिली ठाकुर से लेकर मिथिलेश तिवारी, वीरेंद्र कुमार जनक सिंह, संजय कुमार सिंह, जीवेश कुमार तारकेश्वर प्रसाद, बैद्यनाथ प्रसाद सहित 18 विधायक शामिल थे.
बिहार में धर्मांतरण कानून की मांग: सत्ताधारी विधायकों ने कहा कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और गुजरात सहित अन्य प्रदेशों में धर्म परिवर्तन को लेकर कानून लागू है. धोखाधड़ी बाल विवाह प्रलोभन के माध्यम से धर्म परिवर्तन के खिलाफ इस कानून के अंतर्गत एक से 10 या 20 वर्षों तक सजा का प्रावधान है.
सत्ताधारी विधायकों ने उठाए सवाल: सदस्यों ने कहा कि बिहार में ईसाइयों और मुसलमान की जनसंख्या और सामान्य वृद्धि हुई है. बिहार में 5000 से अधिक चर्च की स्थापना हो चुकी है. ईसाइयों का राष्ट्रीय स्तर पर ग्रोथ रेट 15.5% है, जबकि बिहार में 143.23 प्रतिशत है. सत्तापक्ष के विधायकों ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्र में मुस्लिम आबादी में अत्याशित वृद्धि हुई है. धर्म परिवर्तन ईसाई मिशनरी और इस्लामी धर्म गुरुओं द्वारा धड़ल्ले से कराया जा रहा है, जिसकी सबसे ज्यादा शिकार हर वर्ग की युक्तियां हो रही है.
"उत्तर प्रदेश में सख्त कानून है, उसी तरह का कानून बिहार में बनाया जाना चाहिए. बक्सर में ही 1000 दलित परिवार ने धर्म परिवर्तन कर लिया है. सीमांचल का डेमोग्राफी चेंज हो गया है. इसलिए इस कानून की जरूरत है, सरकार को इस पर विचार करना चाहिए."- मिथिलेश तिवारी, विधायक, भारतीय जनता पार्टी
बीजेपी विधायक जिवेश कुमार मिश्रा ने कहा कि बाबा साहब के संविधान में जाति और धर्म बदलने की इजाजत नहीं है. जब जाति बदलने की इजाजत नहीं है तो धर्म कैसे बदल लेंगे. उन्होंने कहा कि धर्म बदलने के बाद आरक्षण का लाभ कैसे ले लेते हैं? इस पर कड़े कानून की जरूरत है.
बीजेपी के संजय सिंह ने कहा, 'यह धर्मांतरण सिर्फ धर्मांतरण नहीं बल्कि राष्ट्रांतरण है'. वहीं, अनिल सिंह ने कहा कि ईसाई धर्मावलंबियों ने धर्म परिवर्तन करवाए हैं. कड़े कानून बनाए जाए, इसको लेकर हमने प्रस्ताव लाए हैं.
क्या बोले सरकार के मंत्री?: इस पर जवाब देते हुए पर्यटन सह कला एवं संस्कृति विभाग के मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने साफ कर दिया कि बिहार सरकार ऐसा कोई कानून नहीं लाएगी. उन्होंने कहा, 'अभी इससे संबंधित कोई कानून बनाने का प्रस्ताव नहीं है'.

स्पीकर ने समीक्षा करने को कहा: जब बीजेपी सदस्य इस मामले में फिर से हंगामा करने लगे तो विधानसभा अध्यक्ष प्रेम कुमार ने कहा कि उन्होंने इसे नियमन दे दिया हैं, सरकार समीक्षा करेगी और जरूरत पड़ेगी तो कानून बनाएगी. अब इस पर चर्चा नहीं होगी.
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