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बिहार में शराब पर से बैन हटेगा या नहीं? आ गया नीतीश सरकार का फाइनल जवाब!

शराबबंदी कानून की समीक्षा की लगातार मांग उठ रही है. इस बीच सीएम नीतीश के सबसे करीबी मंत्री ने स्थिति स्पष्ट कर दी है. पढ़ें..

NITISH KUMAR
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : February 25, 2026 at 1:43 PM IST

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पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जब से एनडीए की प्रचंड जीत हुई है, तब से शराबबंदी कानून को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही है. कभी कानून वापस लेने की चर्चा होती है तो कभी सत्ताधारी विधायक इसकी समीक्षा की मांग करते हैं लेकिन क्या सच में इस पर सरकार पुनर्विचार कर सकती है? इस पर अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के भरोसेमंद मंत्री विजय चौधरी ने बड़ा बयान दिया है.

शराबबंदी पर समझौता नहीं करेगी सरकार: विजय कुमार चौधरी ने सवालिया लहजे में कहा कि जो लोग घाटे की बात कह रहे हैं, उन्हें बता देना चाहते हैं कि सरकार ने जब साल 2016 में शराबबंदी लागू किया था, तब भी राजस्व घाटे का आंकलन किया गया था. उन्होंने कहा कि सरकार ने सारी बातों को ध्यान में रखते हुए ही इस कानून को लाया था.

शराबबंदी पर विजय चौधरी का बड़ा बयान (ETV Bharat)

राजस्व घाटे के बावजूद विकास हुआ: मंत्री ने कहा कि शराबबंदी-शराबबंदी कहकर इस कानून के मकसद को ही ढीला किया जा रहा है. कानून बिहार उत्पाद मद्य निषेध अधिनियम है, जिसमें शराब पीने को अपराध माना किया है. शराब लोगों को नहीं पीना चाहिए. इसके बावजूद इसे मुद्दा बनाना गलत है. विजय चौधरी ने अपने बयान से साफ कर दिया कि शराबबंदी लागू रहेगी.

Nitish Kumar
नीतीश कुमार (ETV Bharat)

"सरकार को राजस्व का नुकसान होगा, ये जानते हुए लागू किया गया. शराबबंदी नहीं कानून तो बिहार उत्पाद मद्य निषेध कानून ना है. इसमें शराब पीने को अपराध माना गया कि शराब लोगों को नहीं पीना चाहिए. ये नीतीश सरकार की खासियत है कि राजस्व का घाटा के बावजूद विकास के सभी पैमामे पर सरकार ने अपना प्रदर्शन अव्वल किया है, ये सराहनीय है."- विजय कुमार चौधरी, संसदीय कार्य मंत्री, बिहार

Vijay Kumar Choudhary
मंत्री विजय कुमार चौधरी (ETV Bharat)

आरएलएम ने की थी समीक्षा की मांग: पिछले दिनों बिहार विधानसभा के बजट सत्र के दौरान शराबबंदी कानून की समीक्षा की मांग उठी थी. सरकार में सहयोगी आरएलएम के विधायक माधव आनंद ने मुख्यमंत्री के सामने समीक्षा की मांग की थी. उन्होंने कहा, 'सर अब वो वक्त आ गया है, जब शराबबंदी की समीक्षा होनी चाहिए. इसे और अच्छे ढंग से लागू किया जाना चाहिए.'

जीतनराम मांझी ने भी की समीक्षा की मांग: एनडीए के अहम पार्टनर हम के संरक्षक और केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी तो लगातार समीक्षा की मांग करते रहते हैं. आरएलएम की मांग का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि कानून अच्छा है लेकिन क्रियान्वयन में बहुत गड़बड़ियां हैं.

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