डेढ़ साल की निकिता को सौंपी 21 लाख की एफडी, अब नहीं होगी भविष्य की चिंता
डीसी मंडी ने निकिता को 21 लाख की एफडी सौंपी. निकिता इस समय अपनी बुआ के साथ रह रही हैं.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : January 10, 2026 at 10:28 AM IST
मंडी: आपदा में अपने माता-पिता को खोने वाली निकिता के नाम 21 लाख रुपये की एफडी करके उज्ज्वल भविष्य की आर्थिक सुरक्षा सुनिश्चित की गई है. उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन ने सराज क्षेत्र के शिकावरी गांव में निकिता के नाम तैयार की गई एफडी की प्रति उसकी बुआ एवं कानूनी संरक्षक किरन देवी को सौंपी. मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने मंडी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान निकिता के लिए 21 लाख रुपये की आर्थिक सहायता की घोषणा की थी.
बता दें कि 30 जून 2025 को सराज क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ ने निकिता से उसका पूरा परिवार छीन लिया था. उस समय उसकी उम्र मात्र 11 माह थी. इतनी छोटी उम्र में निकिता यह भी समझने की स्थिति में नहीं थी कि उसके जीवन में कितना बड़ा खालीपन आ गया है. उसने अपने माता-पिता को हमेशा के लिए खो दिया. इसके साथ ही प्रदेश सरकार निकिता को सुख आश्रय योजना के अंतर्गत प्रति माह 4,000 रुपये की सहायता भी प्रदान कर रही है, ताकि उसके पालन-पोषण और देखभाल में कोई कमी न आए और उसे प्रेम, सुरक्षा व सम्मान के वातावरण में आगे बढ़ने का अवसर मिल सके. वहीं 10 नवंबर को निकिता को मंडी में सीएम सुक्खू ने 7.95 लाख का चेक सौंपा था.
एक साथ खोया था परिवार
बता दें कि इस साल आई आपदा में सराज के परवाड़ा गांव की निकिता ने अपने पूरे परिवार को खो दिया था. 30 जुलाई की रात लगातार हो रही बारिश के कारण नाले का बहाव घर की तरफ होने लगा. पिता रमेश कुमार (31), मां राधा देवी (24) और दादी पूर्णो देवी (59) घर पर मौजूद थे. रमेश नाले का बहाव मोड़ने के लिए बाहर निकले. पीछे से रमेश की मां और पत्नी निकिता को बिस्तर पर सुलाकरउसकी मदद के लिए पहुंची. नाले का बहाव मोड़ते समय अचानक भारी मलबा आया और तीनों को निगल गया. इसके बाद फिर तीनों कभी वापस नहीं लौटे, लेकिन घर सही सलामत रहा.
अगले दिन चला हादसे का पता
अगली सुबह गांव वालों ने जब घर के अंदर कदम रखा, तो निकिता बिस्तर पर रोती हुई मिली. उस समय निकिता की उम्र महज 11 माह थी, लेकिन उस सन्नाटे के बीच, बिस्तर पर लिपटी निकिता जीवित थी. लोगों ने निकिता के परिवार को ढूंढा, लेकिन आस पास का मंजर देख समझ में आ गया कि अब तीनों इस दुनिया में नहीं है. लोगों ने तुरंत निकिता को गोद में उठाया और प्रशासन को सूचना दी. इसके बाद निकिता को उसकी बुआ के पास सौंप दिया.
ये भी पढ़ें: कौन है हरिपुरधार बस हादसे का जिम्मेदार, मातम में बदली माघी के त्यौहार की खुशियां

