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होली से पहले अनोखी परंपरा, गांव को आपदा-महामारी से बचाने जनकपुर में गांव के बाहर छोड़ी गई मुर्गी

गांवों में पारंपरिक प्रथाएं आज भी निभाई जा रही है. MCB जिले में भी आपदाओं से बचाने लिए पारंपरिक ‘निकारि’ प्रथा निभाई गई.

Unique Nikari tradition
होले से पहले गांव को आपदा या महामारी से बचाने के लिए अनोखी परंपरा (ETV BHARAT CHHATTISGARH)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : March 1, 2026 at 2:59 PM IST

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Updated : March 1, 2026 at 5:15 PM IST

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मनेंद्रगढ़ चिरमिरी भरतपुर: जिले के भरतपुर विकासखंड के जनकपुर क्षेत्र में होली से पहले सदियों पुरानी ‘निकारि’ प्रथा आज भी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है. यह इलाका आदिवासी बहुल है, जहां बैगा समाज की परंपराएं आज भी जीवंत हैं. ग्रामीणों का मानना है कि इस अनुष्ठान से गांव को आपदा और बीमारियों से सुरक्षा मिलती है.

गांव को आपदा-महामारी से बचाने जनकपुर में गांव के बाहर छोड़ी गई मुर्गी (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

होली से पहले होता है विशेष अनुष्ठान

जनकपुर के पुजारी गरीबा मौर्य ने बताया कि गांव बसने के समय से ही यह परंपरा चली आ रही है. होली से पहले ‘डांग न गढ़ने’ की परंपरा से पूर्व निकारि की जाती है. पहले गांव के बैगा इस प्रथा को निभाते थे, वहीं वर्ष 2006 से गरीबा मौर्य ठाकुर बाबा से जुड़कर इस अनुष्ठान को आगे बढ़ा रहे हैं.

बीमारियों से बचाव की मान्यता

ग्रामीणों के अनुसार, निकारि प्रथा का मुख्य उद्देश्य गांव को हैजा, कॉलरा जैसी गंभीर बीमारियों और अन्य आपदाओं से बचाना है. इस अनुष्ठान के दौरान बैगा द्वारा मुर्गी चराई जाती है. गांव के हर चौक-चौराहे पर यह प्रक्रिया पूरी की जाती है, ताकि नकारात्मक शक्तियां गांव में प्रवेश न कर सकें.

Unique Nikari tradition
जनकपुर में निभाई गई पारंपरिक ‘निकारि’ प्रथा (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

गांव की सीमा के बाहर छोड़ी जाती है मुर्गी

मान्यता है कि अनुष्ठान के बाद मुर्गी को गांव की सीमा पार, नदी के उस पार छोड़ दिया जाता है. इससे किसी भी प्रकार की विपत्ति गांव में प्रवेश नहीं कर पाती. इस मौके पर गांव के सभी टोला-मोहल्लों के लोग मिलकर बैगा को अखत, झाड़ू और पूजन सामग्री देते हैं.

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गांवों में पारंपरिक प्रथाएं आज भी निभाई जा रही हैं (ETV BHARAT CHHATTISGARH)

एकजुटता और आस्था का प्रतीक

गरीबा मौर्य का कहना है कि यह केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि गांव की एकता और सामूहिक सुरक्षा का प्रतीक है. ग्रामीणों का विश्वास है कि निकारि प्रथा से गांव में शांति, सुख-समृद्धि और निरोगी जीवन बना रहता है. जनकपुर क्षेत्र में आज भी परंपरा और आधुनिकता के बीच संतुलन देखने को मिलता है.

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Last Updated : March 1, 2026 at 5:15 PM IST