एसएमएस अस्पताल में शुरू होगी नाइट ओपीडी, अलग से डॉक्टर तैनात होंगे
सवाई मानसिंह अस्पताल की इमरजेंसी में आने वाले गंभीर रोगियों एवं सामान्य रोगियों के लिए उपचार की अलग-अलग व्यवस्थाएं की जाएंगी.

Published : December 2, 2025 at 1:42 PM IST
जयपुर : प्रदेश के सबसे बड़े सवाई मानसिंह अस्पताल में अब मरीजों को रात में भी ओपीडी सुविधा मिलेगी. अस्पताल प्रशासन अस्पताल की इमरजेंसी में नाइट ओपीडी की शुरुआत करने जा रहा, जिसे सबसे पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में एसएमएस अस्पताल में लागू किया जाएगा. अस्पताल की इमरजेंसी में इस ओपीडी को शुरू किया जाएगा, अस्पताल की इमरजेंसी में बड़ी संख्या में रात में ऐसे मरीज आते है जो बुखार, सर्दी जुकाम, पेट दर्द से जूझ रहे होते हैं.
ऐसे में मरीजों को राहत देने के लिए चिकित्सको को OPD में लगाया जाएगा. सवाई मानसिंह मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉक्टर दीपक माहेश्वरी का कहना है कि अस्पताल के इमरजेंसी 24 घंटे संचालित रहती है और कई बार यह देखने को मिलता है कि ऐसे मरीज़ भी शाम को या रात को अस्पताल की इमरजेंसी में पहुंच गए हैं जिन्हें भर्ती करने की आवश्यकता नहीं रहती वो साधारण सी बीमारी से जूझ रहे होते हैं, जिसे देखते हुए एक अलग से नाइट OPD शुरू करने की कवायद चल रही है.
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गंभीर रोगी परेशान : डॉक्टर माहेश्वरी का कहना है कि कई बार साधारण सी बीमारी से जूझ रहे मरीज इमरजेंसी में पहुंचते हैं तो कई बार इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक उनके इलाज में लग जाते हैं ऐसे में गंभीर या फिर आपातकालीन स्थिति में पहुंचे मरीज़ों के इलाज में देरी हो जाती है. डॉक्टर माहेश्वरी ने बताया कि फ़िलहाल इमरजेंसी में मेडिसिन के चिकित्सकों को तैनात किया जाएगा और शाम चार से रात आठ बजे तक यह OPD चलाई जाएगी, इसके बाद मरीजों की संख्या के आधार पर आने वाले महीनों में अन्य विभाग भी जोड़े जा सकते हैं. चिकित्सा विभाग का कहना है कि यदि पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है तो इसे प्रदेश के अन्य बड़े अस्पतालों में भी शुरू किया जाएगा.
अलग-अलग उपचार : चिकित्सा शिक्षा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ का कहना है कि सवाई मानसिंह अस्पताल की इमरजेंसी में आने वाले गंभीर रोगियों एवं सामान्य रोगियों के लिए उपचार की अलग-अलग व्यवस्थाएं की जाएंगी, ताकि एक ही कक्ष में रोगी भार अधिक नहीं हो और गंभीर मरीजों को तुरंत ओर बेहतर उपचार मिल सके. साथ ही अस्पताल में मरीज़ों की बढ़ती संख्या को देखते हुए बेड बढ़ाने और अधिक संसाधन लगाने के भी निर्देश दिए गए हैं.

