डीएसपीएमयू का निरीक्षण, रांची पहुंचे एनएचआरसी के स्पेशल ऑब्जर्वर
रांची में डीएसपीएमयू का NHRC के स्पेशल ऑब्जर्वर ने निरीक्षण किया.

Published : April 23, 2026 at 10:33 PM IST
रांचीः डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी यूनिवर्सिटी (डीएसपीएमयू) में गुरुवार को नेशनल ह्यूमन राइट्स कमीशन (NHRC) के स्पेशल ऑब्जर्वर प्रो. कन्हैया त्रिपाठी पहुंचे. इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय के कुलपति, डीन, विभागाध्यक्षों (HOD) और छात्र-छात्राओं के साथ बैठक कर शैक्षणिक, प्रशासनिक और मानवाधिकार से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की.
इस बैठक के दौरान प्रो. त्रिपाठी ने विश्वविद्यालय में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया. उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि विश्वविद्यालय परिसर में एक स्थायी मेडिकल डॉक्टर की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए. जिससे किसी भी आपात स्थिति में छात्रों को तत्काल स्वास्थ्य सुविधा मिल सके.
छात्राओं की सुरक्षा और सुविधा को लेकर उन्होंने विशेष चिंता जताई. उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया कि छात्राओं के लिए अलग से महिला कॉमन रूम का निर्माण किया जाए. साथ ही, कैंपस में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की बात कही, ताकि छात्राएं सुरक्षित माहौल में अपनी पढ़ाई जारी रख सकें.
शैक्षणिक विस्तार की दिशा में भी महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। प्रो. त्रिपाठी ने कहा कि बदलते समय के साथ साइबर सुरक्षा एक अहम विषय बन चुका है. ऐसे में विश्वविद्यालय में साइबर हैकिंग जैसे विषयों की पढ़ाई शुरू की जानी चाहिए. इससे छात्रों को नए तकनीकी क्षेत्र में अवसर मिलेंगे और उनकी रोजगार क्षमता बढ़ेगी.
उन्होंने विश्वविद्यालय में लंबित मामलों के शीघ्र निष्पादन पर भी जोर दिया. प्रशासनिक प्रक्रियाओं में तेजी लाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई, ताकि छात्रों और शिक्षकों को अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े.
मानवाधिकार जागरूकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय में जल्द ही ह्यूमन राइट्स क्लब के गठन की बात कही गई. इसके माध्यम से छात्रों को उनके अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक किया जाएगा. वहीं, रांची विश्वविद्यालय में मानवाधिकार से जुड़ी एक विशेष गैलरी स्थापित करने का भी प्रस्ताव सामने आया, जो शिक्षा और जागरूकता का केंद्र बनेगी.
प्रो. कन्हैया त्रिपाठी ने कहा कि विश्वविद्यालयों में रिसर्च गतिविधियों को बढ़ावा देना बेहद जरूरी है. उन्होंने शिक्षकों और छात्रों को अनुसंधान पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी, ताकि शिक्षा का स्तर और गुणवत्ता दोनों बेहतर हो सके. इस दौरे को विश्वविद्यालय के समग्र विकास और मानवाधिकार आधारित शैक्षणिक वातावरण को मजबूत करने की दिशा में एक अहम पहल माना जा रहा है.
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