NHM के अभियान निदेशक ने राज्य के सभी सिविल सर्जनों को जारी की एडवाइजरी, हीट वेव को लेकर करे विशेष इंतेजाम
हीट वेव से बचने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन ने राज्य के सभी सिविल सर्जनों को अस्पताल में विशेष इंतजाम करने के निर्देश दिए हैं.

Published : March 3, 2026 at 12:23 PM IST
रिपोर्ट: उपेंद्र कुमार
रांची: राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन और मानव स्वास्थ्य कार्यक्रम द्वारा बढ़ती ग्लोबर वार्मिंग और आबादी के आलोक में वर्ष 2026 में अत्यधिक गर्मी से बचाव, रोकथाम, निगरानी और उपचार के लिए तैयारी को अत्यंत आवश्यक बताया. राज्य के NHM अभियान निदेशक शशि प्रकाश झा ने सभी जिलों के सिविल सर्जन के लिए एडवाइजरी जारी की है. यह एडवाइजरी राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय द्वारा Advisory Summer 2026 के आलोक में जारी किया गया है.
इस एडवाइजरी के माध्यम से राज्य के सभी जिलों के सिविल सर्जनों को हीट वेव और उससे होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के दौरान प्रबंधन के लिए सभी तैयारियां पूरी कर लेने को कहा गया है. लू की वजह से होने वाली मौत को कम करने के उद्देश्य से लू लगे व्यक्ति को अस्पताल या किसी भी स्वास्थ्य संस्थान पहुंचने पर सर्वप्रथम COOL FIRST THEN TRANSPORT SECOND की नीति अपनाते हुए जरूरत पड़ने पर 108 एंबुलेंस से हायर सेंटर भेजने की सलाह दी गई है.

क्यों 1 मार्च से हीट वेव को लेकर विशेष एडवाइजरी करनी पड़ी जारी
भारत में लगातार बढ़ते तापमान और हीट वेव की घटनाओं को देखते हुए National Centre for Disease Control (NCDC) और स्वास्थ्य मंत्रालाय ने वर्ष 2026 के लिए राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को विस्तृत एडवाइजरी जारी की है. 2024 और 2025 में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के बाद 2026 में भी कई क्षेत्रों में सामान्य से अधिक तापमान दर्ज किया जा रहा है. ऐसे में हीट रिलेटेड बीमारियों (HRI) की रोकथाम और प्रबंधन को लेकर स्वास्थ्य तंत्र की तैयारी बेहद आवश्यक है. झारखंड में भी 1 मार्च को न्यूनतम तापमान कई जिलों में सामान्य से अधिक रहा है और मौसम केन्द्र रांची ने मार्च महीने में तापमान बढ़ोतरी की बात कही है.

क्या है हीट रिलेटेड बीमारियां
सामान्यतः मानव शरीर का तापमान 36.4°C से 37.2°C के बीच होता है. अत्यधिक गर्मी के संपर्क में आने से शरीर में 'हीट स्ट्रेस' उत्पन्न होता है. जिससे कई स्वास्थ्य संबंधी बीमारियां होती है. जैसे:-
- हीट रैश (घमौरियां), हीट ओडीमा (हाथ-पैरों में सूजन)
- हीट क्रैंप्स (मांसपेशियों में ऐंठन), हीट सिंकोप (बेहोशी)
- हीट एग्जॉशन (गंभीर थकान)
- हीट स्ट्रोक (सबसे गंभीर और जानलेवा स्थिति), जो एक मेडिकल इमरजेंसी है
- हीट स्ट्रेस के सामान्य लक्षण
- चक्कर आना या बेहोशी
- सिरदर्द, अत्यधिक प्यास लगना, मतली या उल्टी
- कम पेशाब और गहरे रंग का मूत्र
- तेज सांस और धड़कन खतरनाक संकेत, ऐसे में मरीज को तुरंत अस्पताल ले जाए
- शरीर का तापमान 40°C या उससे अधिक होने पर भ्रम, घबराहट या बेहोशी
- लाल और सूखी त्वचा, दौरे पड़ना
- पसीना बंद हो जाने की स्थिति में तुरंत 108 एम्बुलेंस सेवा को कॉल करें और मरीज पर ठंडा पानी डाले या पंखा चलाए

राज्यों के लिए केंद्र से मिले मुख्य निर्देश
केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग के द्वारा राज्यों में हीट-हेल्थ एक्शन प्लान जिला स्तर पर लागू करने की बात कही है. इसके अलावा 1 मार्च 2026 से हीट स्ट्रोक मामलों की दैनिक रिपोर्टिंग IHIP पोर्टल पर दर्ज करना अनिवार्य किया है. साथ ही मृत्यु की जांच और सत्यापन करने का भी निर्देश दिया है. हीट वेव और अत्यधिक गर्मी से ORS, आई वी फ्लूड, आइस पैक और आवश्यक दवाओं का पर्याप्त स्टॉक सेकेंडरी और टर्शियरी अस्पतालों में रखने और एंबुलेंस में ठंडा करने की व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही है.
भारतीय मौसम विभाग के द्वारा जारी हीट वेव अलर्ट को रोजाना स्वास्थ्य संस्थानों और जनता तक पहुंचाने के लिए अलर्मिंग सिस्टम करने की बात कही है. स्वास्थ्य विभाग के निर्देशानुसार हीट वेव के दौरान दोपहर 12 से 3 बजे के बीच आउटडोर कार्यक्रम से बचें. प्रति व्यक्ति कम से कम 2 लीटर मुफ्त पेयजल उपलब्ध कराएं. आम जनता को संचार के विभिन्न माध्यमों की सहायता से यह बताएं कि हीट वेव में क्या करें और क्या न करें.
हीट वेव में क्या करें
- पर्याप्त पानी पिएं (प्यास लगने का इंतजार न करें)
- हल्के, ढीले और सूती कपड़े पहनें
- सिर को टोपी/छाते से ढकें
- सुबह-शाम के समय ही बाहर निकलें
- घर में खिड़कियां दिन में बंद और रात में खुली रखें
हीट वेव में क्या न करें
- बहुत जरूरी न तो तो दोपहर को धूप में न निकलें
- शराब, ज्यादा चाय-कॉफी या मीठे पेय से बचें
- बच्चों या पालतू जानवरों को बंद गाड़ी में न छोड़ें
- अधिक प्रोटीन और बासी भोजन से बचें
- संवेदनशील समूहों पर विशेष ध्यान दें
- बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, छोटे बच्चे, हृदय/किडनी रोगी खुले में ना जाए
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