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स्वर्ग से निकली शिप्रा नदी में शाही स्नान पर ग्रहण! NGT की धमाकेदार रिपोर्ट से नर्मदा पर टिकी आस

सिंहस्थ महाकुंभ 2028 में शिप्रा स्नान पर एनजीटी की विस्फोटक रिपोर्ट. क्या नामुमकिन होगा बिना नर्मदा जल के धार्मिक स्नान संपन्न कराना. राहुल सिंह राठौड़ की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट.

NGT report Shipra river pollution
शिप्रा की हालत पर एनजीटी की डरावनी रिपोर्ट (ETV BHARAT)
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By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : August 20, 2026 at 8:46 PM IST

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Updated : August 20, 2026 at 10:06 PM IST

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उज्जैन : मध्य प्रदेश में सरकारें आईं और गईं. सभी ने उज्जैन की शिप्रा नदी के शुद्धिकरण के दावे किए. करोड़ों रुपये की योजनाएं बनी. पानी की तरह पैसा बहाया गया. लेकिन शिप्रा नदी की हालत और बिगड़ती गई. अब फिर उज्जैन सिंहस्थ 2028 के मद्देनजर व्यापक स्तर पर निर्माण कार्य चल रहे हैं. शिप्रा के शुद्धिकरण, नदी को कलकल प्रवाहित करने के दावे और वादों के बीच करोड़ों रुपये की योजनाएं फिर बनी है. इन योजनाओं पर काम भी जारी है. इस बीच नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की रिपोर्ट ने सरकार के दावों पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

आखिर क्यों निर्मल नहीं हो पा रही शिप्रा

सरकार के साथ ही प्रशासन सिंहस्थ के दौरान निर्मल शिप्रा बनाने के दावे कर रहा है. आइए जानते हैं कि बीते 20 साल में किस सरकार ने शिप्रा शुद्धिकरण के लिए क्या-क्या प्रयास किए, कितना धन फूंका, इसका नतीजा क्या मिला और वर्तमान सरकार ने फिर से कितना बजट इसी काम के लिए रखा और क्या सिंहस्थ 2028 में श्रद्धालुओं को मां शिप्रा का आंचल साफ-सुथरा मिलेगा?

शिप्रा नदी में मिलने वाले नाले बने नासूर (ETV BHARAT)

सिंहस्थ 2028 में नहाने लायक नहीं होगी शिप्रा

एनजीटी की रिपोर्ट में बताया गया है "उज्जैन के 3 बड़े नालों के कारण सिंहस्थ 2028 में शिप्रा नदी में सीवेज प्रदूषण 85 MLD से बढ़कर 350 MLD होने का अनुमान है. अभी भी शिप्रा का पानी नहाने लायक नहीं है." NGT की रिपोर्ट ने एक बार फिर सिंहस्थ 2028 की तैयारियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस सवाल के जवाब उज्जैन ही नहीं, पूरा मध्य प्रदेश दशकों से तलाश रहा है.

NGT की रिपोर्ट में शिप्रा के कुछ हिस्सों में BOD (biochemical oxygen demand) 8 से 12 mg/L तक पाया गया, जबकि स्नान योग्य जल के लिए BOD का मानक अधिकतम 3 mg/L होता है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की 2022-2023 की रिपोर्ट में शिप्रा के कई हिस्सों में भारी प्रदूषण का जिक्र है. इससे इतर इंदौर से उज्जैन तक कान्ह नदी का नाले जैसा पानी भी बड़ी समस्या है.

NGT report Shipra pollution Ujjain Simhastha 2028
सिंहस्थ के दौरान शिप्रा को निर्मल करने का दावा (ETV BHARAT)

11 नाले बंद लेकिन 3 नाले नासूर बने

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की संयुक्त समिति के मुताबिक "उज्जैन के 14 प्रमुख नालों में से 11 को रोकने के लिए व्यवस्थाएं की गई हैं. इसके बावजूद 3 बड़े नाले पीलियाखाल, भैरवगढ़ और हाटकेश्वर चुनौती बने हुए हैं." NGT ने कलेक्टर और नगर निगम की जवाबदेही तय कर दी है. निर्देश दिए हैं "किसी भी परिस्थिति में सीवेज का पानी शिप्रा में न मिलने पाए. हर 15 दिन में नदी से जुड़े नालों का निरीक्षण करें, जहां नियमों का उल्लंघन दिखे तो कार्रवाईं करें, मुआवजा वसूलें."

उज्जैन नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा ने ETV भारत को बताया "पीलियाखाल और भैरवगढ़ क्षेत्र में सीवेज नेटवर्क ट्रीटमेंट का काम शुरू कर दिया गया है, जोकि शहर में अमृत योजना 2.0 के तहत किया जा रहा है. ये काम सिंहस्थ 2028 से पहले पूरा कर लिया जाएगा. शहर में सीवरेज नेटवर्क, पंपिंग स्टेशन और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट जैसी व्यवस्थाएं विकसित हुई हैं."

NGT report Shipra pollution Ujjain Simhastha 2028
शिप्रा को शुद्ध करने की महात्वाकांक्षी परियोजना (ETV BHARAT)

शिप्रा शुद्धिकरण के लिए 1600 करोड़ के प्रोजेक्ट

सिंहस्थ मेला अधिकारी एवं उज्जैन कमिश्नर आशीष सिंह ने ETV भारत से चर्चा में बताया "शिप्रा नदी की सफाई के मौजूदा अभियान में सबसे महत्वपूर्ण परियोजना कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट और सेवरखेड़ी सिलारखेड़ी परियोजना है, जिसे 1600 करोड़ से अधिक की लागत से धरातल पर लाया जा रहा है. जून 2026 में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने परियोजना का निरीक्षण किया था. दोनों ने टनल के अंदर उतरकर निर्माण की प्रगति और गुणवत्ता का जायजा लिया."

"साथ ही चिंतामन जवासिया के पास शाफ्ट नंबर 2 पर फेस नंबर 3 के काम की जानकारी भी ली. परियोजना की तकनीकी संरचना, टनल तक पहुंच और भविष्य के रखरखाव की जानकारी दी गई. परियोजना का मूल उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट है कि कान्ह नदी का दूषित पानी शिप्रा में मिलने से रोकना और आगामी सिंहस्थ में शुद्ध स्वच्छ जल से लोगों को स्नान करवाना."

कान्ह क्लोज डक्ट परियोजना

कान्ह क्लोज डक्ट परियोजना 919.94 करोड़ की लागत से तैयार हो रही है. इसके तहत इंदौर से आने वाले कान्ह नदी के प्रदूषित पानी को शिप्रा में मिलने से पहले ही अलग रास्ते पर भेजना है. नदी को जमीन के 100 फीटअंदर ले जाकर डायवर्ट करने की योजना. इसके लिए जमालपुरा गांव के पास कान्ह नदी पर बैराज बनाया जा रहा है. यहां से पानी को नियंत्रित करके क्लोज डक्ट 100 फीट गहरी टनल में डाला जाएगा. इसके बाद करीब 30.15 किलोमीटर का मार्ग तय करते हुए इसे गंभीर बांध के डाउनस्ट्रीम में छोड़ा जाएगा. इस 30.15 किलोमीटर के मार्ग में करीब 18.15 किलोमीटर कट एंड कवर डक्ट और 12 किलोमीटर लंबी भूमिगत डी आकार की टनल है.

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दूर से इतनी मनमोहक दिखती है शिप्रा नदी (ETV BHARAT)

सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना

कमिश्नर एवं सिंहस्थ मेला अधिकारी आशीष सिंह ने बताया "कान्ह क्लोज डक्ट जहां शिप्रा नदी में आने वाले प्रदूषित पानी को रोकने के लिए है. सेवरखेड़ी सिलारखेड़ी परियोजना का उद्देश्य जल उपलब्धता और शिप्रा के प्रवाह को मजबूत करना है. उज्जैन से 20 किमी दूर सेवरखेड़ी से सिलारखेड़ी डैम तक 30 मीटर व्यास की 6.5 किमी लंबी पाइप लाइन बिछेगी."

सेवरखेड़ी के पास एक बैराज से क्षिप्रा के पानी को लिफ्ट कर सिलारखेड़ी डैम में डाला जाएगा. डैम से दूसरी पाइप लाइन सिलारखेड़ी से त्रिवेणी संगम के यहां पास शिप्रा नदी तक बिछेगी. 1.80 मीटर व्यास वाली 7 किलोमीटर लंबी लाइन से कुंवारिया गांव के पास शिप्रा में जल प्रवाहित होगा.

केवल कान्ह का पानी रोकना काफी नहीं

कान्ह डायवर्सन से शिप्रा में आने वाले प्रदूषण के बड़े स्रोत को नियंत्रित करने की कोशिश होगी, लेकिन शहर के दूसरे नालों का सीवेज भी नदी में नहीं पहुंचना चाहिए. यही वजह है कि पीलियाखाल, भैरवगढ़ और हाटकेश्वर जैसे नालों पर सीवरेज नेटवर्क और STP की व्यवस्था को समय पर पूरा करना उतना ही जरूरी है.

उमा भारती के कार्यकाल का सिंहस्थ 2004

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के कार्यकाल में सिंहस्थ 2004 से लेकर शिवराज सिंह चौहान के सिंहस्थ 2016, कमलनाथ सरकार के छोटे कार्यकाल और अब डॉ. मोहन यादव सरकार तक शिप्रा को साफ और प्रवाहमान बनाने के लिए अलग-अलग दौर में अलग-अलग प्रयोग होते रहे हैं. साल 2004 में उमा भारती के कार्यकाल में सिंहस्थ के लिए बड़े स्तर पर प्रशासनिक और आधारभूत काम करने के दावे हुए. शिप्रा की सफाई, सीवरेज, अस्थायी शौचालय और स्वच्छता व्यवस्था दुरुस्त के दावे किए गए. लेकिन शिप्रा की हालत में रत्तीभर भी सुधार नहीं दिखा.

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उज्जैन में रामघाट से कुछ ही दूरी पर शिप्रा नदी का ये हाल (ETV BHARAT)

शिवराज सिंह चौहान के सिंहस्थ 2016 नर्मदा शिप्रा लिंक प्लान संकटमोचक

शिवराज सिंह चौहान की सरकार के दौर में शिप्रा को लेकर सबसे चर्चित प्रयोग था नर्मदा शिप्रा सिंहस्थ लिंक परियोजना. करीब 432 करोड़ की इस परियोजना में नर्मदा का पानी पंप करके करीब 350 मीटर की ऊंचाई तक लिफ्ट करके लगभग 50 किलोमीटर दूर शिप्रा के उद्गम क्षेत्र में पहुंचाया गया. परियोजना का उद्देश्य शिप्रा में पानी की उपलब्धता बढ़ाना और सिंहस्थ के दौरान स्नान के लिए पर्याप्त जल सुनिश्चित करना था. 2014 में परियोजना पूरी होने के बाद शिप्रा में नर्मदा का पानी पहुंचा और 2016 के सिंहस्थ के लिए इसे महत्वपूर्ण आधार माना गया.

नर्मदा में फिर से होगा सिंहस्थ का स्नान?

नर्मदा का पानी शिप्रा में पहुंचाने से नदी में पानी तो आया, लेकिन शिप्रा में आने वाला प्रदूषण खत्म नहीं हुआ. शिप्रा के प्रदूषण पर हुए वैज्ञानिक रिसर्च ने भी कान्ह नदी को प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में से एक बताया गया. यही वह समस्या है, जिसने आगे चलकर कान्ह डायवर्सन को स्थायी समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण बनाया. माना जा रहा है कि हालात ना सुधरे तो फिर से नर्मदा ही सिंहस्थ 2028 में शाही स्नान समेत तमाम श्रद्धालुओं के लिए तारणहार बनेंगी.

सिंहस्थ 2016 में प्रदूषण पर हुए जमकर प्रयोग

सिंहस्थ 2016 के दौरान सरकार ने शिप्रा को स्वच्छ रखने के लिए कई तात्कालिक उपाय किए. एक साइंटिफिक रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2016 में कान्ह नदी को पाइपलाइन के माध्यम से डायवर्ट किया गया और सिंहस्थ के दौरान नर्मदा का पानी भी शिप्रा में पहुंचाया गया. उस समय शिप्रा के जल को उपचारित करने के लिए ओजोनाइजेशन जैसी तकनीक का भी प्रयोग किया गया. कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार नदी के अलग-अलग स्थानों पर ओजोन छोड़ने के लिए पाइपलाइन और व्यवस्था तैयार की गई. लेकिन सिंहस्थ खत्म होने के बाद सवाल फिर वही रह गया, क्या अस्थायी व्यवस्था के बजाय स्थायी समाधान होगा?

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इस प्रकार का सीवेज मिलता है शिप्रा में (ETV BHARAT)

कमलनाथ सरकार में रिवर ट्रस्ट एक्शन

कांग्रेस की कमलनाथ सरकार का कार्यकाल करीब 15 महीने का रहा, इसमें शिप्रा को लेकर कुछ कदम उठाए गए. मार्च 2019 में कमलनाथ सरकार ने 'मा नर्मदा, मां शिप्रा एवं मा मंदाकिनी नदी न्यास' के अध्यक्ष के रूप में नामदेव दास त्यागी उर्फ कंप्यूटर बाबा की नियुक्ति की. इसका उद्देश्य नदियों के संरक्षण से जुड़ी गतिविधियों को संस्थागत रूप देना था. इससे पहले फरवरी 2019 में सरकार ने नर्मदा के साथ साथ शिप्रा और मंदाकिनी के लिए अलग-अलग नदी न्यास बनाने की योजना भी सामने रखी थी, जिसमें नदी संरक्षण और अवैध रेत खनन पर नियंत्रण जैसे उद्देश्य शामिल थे. लेकिन ये सरकार बहुत जल्द गिर गई.

Last Updated : August 20, 2026 at 10:06 PM IST