न्यू ईयर में भी रसोइया बहनों का आंदोलन जारी, अमित और ऋचा जोगी टिफिन लेकर पहुंचे धरनास्थल
धरने पर बैठी महिलाओं को खाना परोसकर खिलाया. सरकार से की मांगें मानने की अपील.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : January 1, 2026 at 7:10 AM IST
रायपुर: बहनें और माताएं जो रोज लाखों बच्चों के लिए भोजन बनाती हैं, वही आज अपने हक़ और सम्मान के लिए सड़कों पर बैठी हैं. छत्तीसगढ़ की आंदोलनरत मध्यान्ह भोजन रसोइया बहनों के समर्थन में, जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी अपनी पत्नी ऋचा जोगी के साथ नवा रायपुर के धरना स्थल पहुंचे. दोनों ने अपने हाथों से खाना बनाकर रसोइया बहनों को परोसा और उनके साथ बैठकर भोजन किया.
धरना स्थल पर बना ‘सम्मान का टिफिन’
नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर अमित जोगी और ऋचा जोगी दाल-भात, लाल भाजी, रखिया बरी और पताल की चटनी से भरा टिफिन लेकर पहुंचे. जब रसोइया बहनों के साथ दोनों ने मिलकर खाना खाया. अपने लिए इस तरह का सम्मान देख रसोइया बहनों और माताओं की आंखें भर आई. धरने पर बैठे आंदोलनकारियों ने अमित जोगी को अपना दुखड़ा सुनाया और शासन से बात करने की अपील की. अमित जोगी ने भी भरोसा दिलाया कि उनके हित के लिए वो शासन से बात करेंगे.
‘₹65 रोज़ी अपमान है, मोदी की गारंटी अधूरी’
इस मौके पर अमित जोगी ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि मोदी की गारंटी अब तक पूरी नहीं हुई है. 50% वेतन वृद्धि का वादा आज भी अधूरा है और ₹2000 महीने यानी ₹65 रोज़ पर काम करना किसी भी मेहनतकश महिला के लिए अपमान से कम नही. जोगी ने मौजूदा सरकार को “लबरा इंजन सरकार” बताते हुए कहा कि यह शासन केवल नारों में तेज़ है, ज़मीन पर नहीं.

सोशल मीडिया पोस्ट में झलकी संवेदना
अमित जोगी ने आंदोलनकारियों से मुलाकात का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया है. जिसमें लिखा, “नया साल, नई शुरुआत.. दिल से..इस बार नया साल हमने किसी पार्टी के साथ नहीं मनाया, हमने उसे बाँटा है. धरने पर बैठी 87,820 रसोइया माताओं के साथ. यह पूरा विचार ऋचा जोगी का था, जिन्होंने तय किया कि नया साल उन्हीं बहनों के साथ मनाया जाएगा, जो खुद भूखी हैं, लेकिन बच्चों को खाना खिलाती हैं.''

‘ये सिर्फ रसोइया नहीं, बच्चों की सेहत की पहरेदार हैं’
अपने एक्स पोस्ट में अमित जोगी ने लिखा, रसोइया माताएं सिर्फ कर्मचारी नहीं, बल्कि बच्चों की सेहत की पहरेदार हैं, जो सुबह सबसे पहले चूल्हा जलाती हैं और सबसे आख़िर में खाना खाती हैं. जोगी ने आगे लिखा कि धरना स्थल पर बैठकर उन्हें “सम्मान” का असली अर्थ समझ में आया.

अनिश्चितकालीन धरने पर रसोइया संघ
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ स्कूल मध्यान्ह भोजन रसोइया संयुक्त संघ अपनी तीन सूत्री मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठा है. नवा रायपुर के तूता धरना स्थल पर सैकड़ों की संख्या में महिला और पुरुष रसोइया जुटे हुए हैं, जो सरकार से न्याय की मांग कर रहे हैं.


रसोइया संघ की मांगें
- छत्तीसगढ़ मध्यान्ह भोजन रसोइया संघ को कलेक्टर दर से मानदेय दिया जाए.
- सरकार द्वारा घोषित 50% मानदेय वृद्धि का वादा तुरंत पूरा किया जाए.
- छात्र संख्या कम होने के नाम पर रसोइयों को निकाले जाने की प्रक्रिया बंद हो.
- अंशकालीन रसोइयों को पूर्णकालीन किया जाए.

