"कहानी धरती की": रेडियो पर वैज्ञानिकों की ज़ुबानी,अपनी पृथ्वी की अनकही दास्तां
कार्यक्रम में सामूहिक विलुप्ति की घटनाएं, डायनासोर का युग, उल्कापिंडीय टक्करें, ज्वालामुखीय विस्फोट जैसे विषयों को बताया जाएगा.

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : February 28, 2026 at 4:17 PM IST
|Updated : February 28, 2026 at 6:40 PM IST
लखनऊ: एशिया का एकमात्र संस्थान, जो विशेष रूप से पुराविज्ञान (पैलियोसाइंसेज़) को समर्पित है, बीरबल साहनी पुराविज्ञान संस्थान (बीएसआईपी) ने विज्ञान को समाज के निकट लाने की दिशा में एक अभिनव पहल करते हुए साप्ताहिक रेडियो कार्यक्रम “कहानी धरती की जहां धरती बोलेगी और हम सब सुनेंगे” का शुभारंभ किया. कार्यक्रम का औपचारिक उद्घाटन राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर बीएसआईपी ऑडिटोरियम, लखनऊ में संपन्न हुआ.
यह कार्यक्रम 3 मार्च 2026 से प्रत्येक मंगलवार दोपहर 3 बजे से 4 बजे तक रेडियो केजीएमयू गूंज 89.6 मेगाहर्ट्ज़ एफएम पर प्रसारित होगा. साथ ही, केजीएमयू गूंज मोबाइल ऐप के माध्यम से देश-विदेश के श्रोता भी इसे सुन सकेंगे.
यह पहल BSIP के ‘साइंस कम्युनिकेशन फॉर पब्लिक एंगेजमेंट एंड पार्टनरशिप’ कार्यक्रम के अंतर्गत रेडियो KGMU गूंज के सहयोग से तैयार की गई है. इसका उद्देश्य पृथ्वी के करोड़ों वर्षों के इतिहास, वैज्ञानिक तथ्यों और प्रमुख भूवैज्ञानिक घटनाओं को सरल व रोचक भाषा में विद्यार्थियों, युवाओं और आम श्रोताओं तक पहुंचाना है, ताकि पृथ्वी के विकासक्रम की गहन समझ विकसित हो सके.

पोस्टर एवं प्रोमो का विमोचन: इस अवसर पर BSIP के निदेशक प्रो. महेश जी. ठक्कर तथा रेडियो केजीएमयू गूंज के कार्यकारी प्रमुख प्रो. के.के. सिंह ने संयुक्त रूप से कार्यक्रम के आधिकारिक पोस्टर एवं प्रोमो ऑडियो का विमोचन किया. उद्घाटन कड़ी का संक्षिप्त ऑडियो अंश भी उपस्थित श्रोताओं को सुनाया गया.
अनुसंधान और समाज के बीच सेतु: निदेशक प्रो. महेश जी. ठक्कर ने कहा, “कहानी धरती की” का उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान और समाज के बीच की दूरी को कम करना है. उन्होंने बताया कि कार्यक्रम में सामूहिक विलुप्ति की घटनाएं, डायनासोर का युग, उल्कापिंडीय टक्करें, ज्वालामुखीय विस्फोट, मानव विकास और अंतिम हिमयुग जैसे विषयों को सरल एवं आकर्षक शैली में प्रस्तुत किया जाएगा.
विज्ञान जनसंपर्क का सशक्त माध्यम: मुख्य अतिथि प्रो. के.के. सिंह ने कहा कि सामुदायिक रेडियो विज्ञान संचार का प्रभावी माध्यम बनकर उभरा है. उन्होंने वैश्विक तापन, विकासवाद और जलवायु परिवर्तन को वर्तमान समय की गंभीर वैज्ञानिक चुनौतियां बताते हुए कहा कि ऐतिहासिक जलवायु परिवर्तनों ने प्रजातियों के विकास और विलुप्ति को प्रभावित किया है. इन प्रक्रियाओं की समझ वर्तमान पर्यावरणीय संकट से निपटने में सहायक सिद्ध हो सकती है.
डॉ. अरविंद माथुर ने पृथ्वी की आयु निर्धारण से जुड़ी वैज्ञानिक खोजों को आधुनिक भूविज्ञान की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया और विज्ञान में महिलाओं की भागीदारी को सशक्त बनाने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि विज्ञान विविधता और समावेशन से और अधिक समृद्ध होता है.
बीएसआईपी के वैज्ञानिक-जी डॉ. अनुपम शर्मा ने “सभी के लिए विज्ञान” की भावना को इस पहल की प्रेरणा बताया और इसे समाज में वैज्ञानिक चेतना के विस्तार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम कहा. रेडियो केजीएमयू गूंज की स्टेशन मैनेजर डॉ. शालिनी गुप्ता ने कहा कि रेडियो आज भी जमीनी स्तर पर लोगों से जुड़ने का सबसे सशक्त माध्यम है.
कार्यक्रम की परिकल्पना: कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. निमिष कपूर ने बताया कि “कहानी धरती की” के अंतर्गत BSIP के वैज्ञानिक सीधे श्रोताओं से संवाद करेंगे. वे पुराविज्ञान, जीवाश्म विज्ञान, पुरावनस्पति विज्ञान और भूविज्ञान की प्रासंगिकता को समझाते हुए पृथ्वी के अतीत, वर्तमान और भविष्य को जोड़ेंगे.
प्रत्येक कड़ी में यह भी बताया जाएगा कि बीएसआईपी के वैज्ञानिक भूवैज्ञानिक साक्ष्यों का विश्लेषण कर किस प्रकार जलवायु परिवर्तन अनुसंधान, पर्यावरणीय पुनर्निर्माण, जैव-विविधता विकास और सतत योजना में योगदान दे रहे हैं.
प्रसारण और उपलब्धता: रेडियो केजीएमयू गूंज को 89.6 मेगाहर्ट्ज़ एफएम, केजीएमयू गूंज मोबाइल ऐप तथा केजीएमयू की आधिकारिक वेबसाइट पर लाइव सुना जा सकता है. कार्यक्रम की कड़ियां शीघ्र ही बीएसआईपी की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उपलब्ध होंगी. “कहानी धरती की” का मूल उद्देश्य पृथ्वी विज्ञान से जुड़े शोध और खोजों को सरल, रोचक और समावेशी भाषा में समाज तक पहुंचाना है, ताकि विज्ञान केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित न रहकर जन-जन तक पहुंचे.
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