इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर में न्यू इनोवेशन, प्लास्टिक का विकल्प तैयार, इको फ्रेंडली होगा
इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (IITF) में कई इनोवेटिव उत्पादों का प्रदर्शन, भारत सरकार के कोयर बोर्ड पवेलियन में प्राकृतिक रेशों से प्लास्टिक का विकल्प तैयार

Published : November 17, 2025 at 5:47 PM IST
नई दिल्ली: पर्यावरण संरक्षण और प्लास्टिक उपयोग में कमी को लेकर भारत मंडपम में चल रहे इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर (IITF) में कई इनोवेटिव उत्पाद प्रदर्शित किए गए. भारत सरकार के कोयर बोर्ड पवेलियन में ऐसे कई उत्पाद उपलब्ध हैं जिनमें कोको पॉड, कोयर नेट हाउस, जियो-टेक्सटाइल और वर्टिकल गार्डन बैग्स, आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. इन उत्पादों की मदद से ना सिर्फ प्राकृतिक रेशों से प्लास्टिक का विकल्प तैयार हो रहा है, बल्कि पर्यावरण को भी बड़ा लाभ मिल रहा है. यह केवल खेतों में ही नहीं बल्कि हाईवे, सड़क बनाने में भी इसका उपयोग किया जा रहा है.
कोयर पिट और कम्पोस्टेड पिट से बनाया गया विकल्प : कोयर बोर्ड के सेंटर कोयर रिसर्च इंस्टिट्यूट के एक्स्टेंशन सूरज एस. ने बताया कि सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाला उत्पाद कोको पॉड है, जिसमें कोयर पिट और कम्पोस्टेड पिट को मोल्ड में कम्प्रेस कर दो हिस्सों में तैयार किया गया है. इसके अंदर एक सीड पहले से रखा होता है. बारिश या पानी पड़ते ही कोको घुलने लगता है और उसके अंदर रखा बीज अपने आप पौधे के रूप में निकल आता है.

पिट को मोल्ड में कम्प्रेस कर दो हिस्सों में बांटा: यह तरीका विशेष रूप से फॉरेस्टेशन यानी वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए कारगर माना जा रहा है, जहां पौधे नहीं हैं, वहां बस कोको पॉड डालते जाइए और प्राकृतिक बारिश के साथ नए पौधे उग आते हैं. इसके अलावा प्रदर्शनी में कोयर नेट हाउस का भी मॉडल दिखाया गया, जो शेड-लविंग प्लांट्स के लिए बेहद उपयोगी है.

कोयर नेट देता है प्राकृतिक छाया : पारंपरिक प्लास्टिक की ग्रीन नेट के बजाय कोयर नेट प्राकृतिक छाया देता है. इसकी खासियत यह है कि यह पानी को फिल्टर होकर गिरने देता है, जिससे पौधों पर बारिश का झटका नहीं पड़ता और नई पौध रोपाई की ग्रोथ बेहतर होती है. वही सूर्य की अल्ट्रावायलेट किरणों से बचने के लिए कोयर नेट का उपयोग कर छाता भी बनाया जा रहा हैं, जो एक आकर्षण का केंद्र है.

पहाड़ोंं पर मिट्टी को बहने से रोकने में कारगर : सूरज एस. ने बताया कि कोयर जियो-टेक्सटाइल, जिसका उपयोग स्लोप स्टेबिलाइजेशन और सॉयल इरोजन कंट्रोल में बढ़ रहा है. पहाड़ी ढलानों, हाईवे किनारों और निर्माण स्थलों पर मिट्टी को बहने से रोकने में यह काम आ रहा है. उन्होंने बताया कि यह 6-7 वर्षों में प्राकृतिक रूप से डिग्रेड हो जाता है, जबकि पहले नायलान या प्लास्टिक नेट का उपयोग होता था, जो पर्यावरण के लिए हानिकारक और लंबे समय तक नष्ट न होने वाला था.

मल्चिंग मैट और वर्टिकल गार्डन बैग्स हैं बहुत उपयोगी : सूरज एस. ने बताया कि पर्यावरण संरक्षण और प्लास्टिक उपयोग में कमी लाने की इसी श्रेणी में मल्चिंग मैट और वर्टिकल गार्डन बैग्स भी शामिल हैं. मल्चिंग मैट पेड़ों के नीचे बिछाकर वीड कंट्रोल करता है, जबकि वर्टिकल गार्डन बैग्स शहरों में मेट्रो पिलर्स और हाईवे स्ट्रक्चर्स पर हरियाली बढ़ाने के लिए बड़ी संख्या में इस्तेमाल हो रहे हैं.

44वां इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर IITF : बता दें कि 44वां इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर IITF भारत मंडपम (प्रगति मैदान) में 2025 14 नवंबर से शुरू हुआ है और 27 नवंबर 2025 तक चलेगा. ट्रेड फेयर 2025 की थीम इस बार एक भारत, श्रेष्ठ भारत रखी गई है. इसमें 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों और 12 देशों के कारोबारी और कंपनियां हिस्सा ले रही हैं. साथ ही, सरकार के 55 मंत्रालयों और विभागों के स्टॉल हैं.

इंडिया इंटरनेशनल ट्रेड फेयर का समय : कारोबारियों के लिए मेला प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 7.30 बजे तक खुला रहेगा. आम दर्शक शाम साढ़े पांच बजे तक ही प्रवेश कर सकेंगे.
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