नेतरहाट की नाशपाती को मिला संगठित बाजार, महिला किसानों को बेहतर कीमत की उम्मीद
झारखंड में जेएसएलपीएस के तहत नेतरहाट की नाशपाती को संगठित बाजारों से जोड़ा जा रहा है. चंदन भट्टाचार्य की रिपोर्ट.

Published : August 31, 2026 at 5:42 PM IST
रांचीः झारखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल नेतरहाट की पहाड़ियों में उत्पादित प्रीमियम गुणवत्ता वाली नाशपाती अब स्थानीय बाजारों तक सीमित नहीं रहेगी. किसानों की उपज को बड़े और संगठित बाजारों से जोड़ने की पहल शुरू की गई है.
जेएसएलपीएस के SETU (Scaling and Enabling for Trade Upliftment) Cell की पहल के तहत महिला-नेतृत्व वाले किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) के माध्यम से नेतरहाट के किसानों को संगठित बाजारों और संस्थागत खरीदारों से जोड़ा जा रहा है. इससे किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार और बेहतर मूल्य मिलने का अवसर मिल रहा है.

इस पहल के तहत करीब 5 मीट्रिक टन प्रीमियम गुणवत्ता वाली नेतरहाट नाशपाती पहले ही संगठित खरीदारों तक पहुंच चुकी है. वहीं करीब 10 मीट्रिक टन नाशपाती की एक और खेप तैयार की जा रही है, जिसे गुवाहाटी, असम भेजने की तैयारी है. इस पूरी प्रक्रिया में किसानों की उपज के सामूहिक संग्रहण से लेकर ग्रेडिंग, छंटाई, गुणवत्ता जांच, पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स को व्यवस्थित किया जा रहा है.
जेएसएलपीएस की पहल का उद्देश्य सिर्फ किसानों को बाजार उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि नाशपाती की पूरी वैल्यू चेन को मजबूत करना है. इसके लिए किसानों की उपज को एकत्रित कर वैज्ञानिक तरीके से ग्रेडिंग और छंटाई की जा रही है. गुणवत्ता की जांच के बाद आधुनिक पैकेजिंग और बेहतर लॉजिस्टिक्स की व्यवस्था की जा रही है, ताकि उत्पाद को बड़े बाजारों तक गुणवत्तापूर्ण तरीके से पहुंचाया जा सके.

वर्तमान में एग्री अर्जुना के माध्यम से नेतरहाट की नाशपाती संगठित रिटेल चेन तक पहुंच रही है. इसमें कई निजी संस्थान भी शामिल है. इसके अलावा Tincture Agri के माध्यम से भी नाशपाती की अतिरिक्त खेपों को प्रीमियम घरेलू बाजारों तक पहुंचाया जा रहा है. संगठित खरीदारों तक उपज पहुंचने से किसानों को स्थानीय और पारंपरिक बाजारों के मुकाबले व्यापक बाजार उपलब्ध हो रहा है.

नेतरहाट की ठंडी जलवायु नाशपाती की खेती के लिए अनुकूल मानी जाती है. यह क्षेत्र झारखंड के प्रमुख नाशपाती उत्पादक क्षेत्रों में शामिल है. यहां उत्पादित नाशपाती की गुणवत्ता को देखते हुए अब इसे बड़े बाजारों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है. किसानों की उपज को बाजार की मांग के अनुरूप तैयार करने के लिए ग्रेडिंग और गुणवत्ता जांच जैसी प्रक्रियाओं को भी व्यवस्थित किया गया है.

महिला-नेतृत्व वाले FPOs की भूमिका इस पूरी पहल में महत्वपूर्ण है. इनके माध्यम से स्थानीय किसानों को एक साथ संगठित कर उनकी उपज के लिए बाजार तलाशने और संस्थागत खरीदारों तक पहुंच बनाने में मदद मिल रही है. इससे छोटे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए केवल पारंपरिक स्थानीय बाजारों पर निर्भर रहने की जरूरत कम होगी.

करीब 5 मीट्रिक टन नाशपाती की पहली खेप के संगठित खरीदारों तक पहुंचने और 10 मीट्रिक टन की अगली खेप गुवाहाटी भेजे जाने की तैयारी से इस पहल के विस्तार का संकेत मिल रहा है. यदि यह बाजार व्यवस्था आगे भी मजबूत होती है, तो नेतरहाट की नाशपाती को झारखंड के प्रमुख बागवानी उत्पाद के रूप में नई पहचान मिल सकती है. साथ ही किसानों को अपनी उपज के लिए बेहतर बाजार और मूल्य मिलने की संभावनाएं भी बढ़ेंगी.

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