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नेपाल से बहकर गंडक पहुंचीं 100 किलो की मछली, एक झलक देखने उमड़ी भीड़

नेपाल त्रासदी के बाद गंडक नदी में बड़ी संख्या में मछलियां बहकर गोपालगंज पहुंच रही हैं. रिपोर्ट अटल पांडेय

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मछली ले जाते लोग (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : August 29, 2026 at 11:00 PM IST

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गोपालगंज: नेपाल की त्रिशूली नदी क्षेत्र में बुधवार को हुए भूस्खलन के बाद गंडक नदी में बड़ी संख्या में मृत मवेशी, मछली, लकड़ी और गैस सिलेंडर बहकर आ रहे हैं. एक तरफ मछुआरे इन्हें पकड़ने के लिए जाल लगा रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ जिला प्रशासन और वन विभाग ने जंगली जानवरों के दिखने पर तत्काल सूचना देने की अपील की है.

नेपाल से बहकर आ रहीं बड़ी मछलियां : वाल्मीकिनगर गंडक बराज से करीब 1.50 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के दौरान गुरुवार को नदी में बहकर आई सामग्री को देखने और निकालने के लिए बड़ी संख्या में लोग गंडक के किनारे पहुंच गए.

मछली का वजन 100 किलो : इस दौरान एक मछुआरे जनेश्वर ने बताया कि उसे एक बड़ी मछली मिली, जिसका वजन करीब 100 किलो है. मछुआरे के मुताबिक, नेपाल में बाढ़ के कारण ये मछलियां नदी नदी के तेज बहाव में गंडक में पहुंची हैं.

एक मछुआरे बच्चा सिंह ने बताया कि, हमारे गंडक में कई बड़ी मछलियां मिली हैं. कुछ का वजन 40 किलो तो कुछ का 50 किलो है, छोटी मछलियां भी हैं. मछलियों को तौलने के लिए मशीन भी रखी गई हैं. मछलियां नेपाल के बाढ़ के पानी के साथ यहां गंडक में पहुंची हैं.

''ये जरूर नेपाल की मछलियां हैं, देखकर लगता हैं कि ये बराली, गोइता और रोहू प्रजाति की हैं. हम लोगों ने इन मछलियों को पकड़ा हैं, जिसे बाजार में बेचेंगे.'' - बच्चा सिंह, मछुआरा

इन मछलियों को देखने के लिए वाल्मीकिनगर से लेकर धनहा गौतम बुद्ध सेतु तक लोगों की भीड़ जमा हो गई. वहीं मंगलपुर और वाल्मीकिनगर क्षेत्र में मछुआरों ने नदी से एक बघार मछली पकड़ी. मछुआरों के अनुसार पकड़ी गई मछलियों का वजन करीब 10 से 90 किलो तक था.

मंगलपुर पुल गंडक नदी के मुहाने पर स्थित है, जहां नदी का पाट चौड़ा है और पानी का बहाव बेहद तेज रहता है. नेपाल के जलाशयों और नदियों के टूटने या उनका जलस्तर अत्यधिक बढ़ने के कारण तिब्बती व हिमाचली नस्ल की भारी-भरकम मछलियां रोहू, कतला, बोआ और मांगुर बहकर नीचे मैदानी इलाकों में आ गई हैं. इन मछलियों का वजन 5 किलो से लेकर 15-20 किलो तक देखा जा रहा है.

तटीय गांवों के सैकड़ों मछुआरे अपनी जान की परवाह किए बिना दिन-रात मंगलपुर पुल पर डटे हुए हैं. वे महाजाल, फेंका जाल और कांटा का इस्तेमाल करके उफनती नदी से मछलियां निकाल रहे हैं. पुल की रेलिंग से जाल फेंककर विशालकाय मछलियों को खींचने का नजारा देखने के लिए आसपास के गांवों की भीड़ भी उमड़ रही है.

वहीं स्थानीय मछुआरों के लिए यह आपदा एक तरह से आर्थिक वरदान सिद्ध हुई है. रोजाना क्विंटल के हिसाब से पकड़ी जा रही इन मछलियों को किनारे पर ही 200 से 400 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा जा रहा है. इससे उन परिवारों को आर्थिक राहत मिली है जो हालिया बाढ़ और बारिश से प्रभावित हुए थे.

हालांकि, गंडक का रौद्र रूप बेहद खतरनाक है. तेज धार के बीच बोट उतारना या पुल के किनारों से जोखिम उठाकर मछली पकड़ना बेहद संवेदनशील है. स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा चेतावनी जारी की है, फिर भी पेट की आग और अच्छे मुनाफे की उम्मीद में मछुआरे इस सैलाब से अपनी किस्मत का जाल निकाल रहे हैं.

वहीं कई लोगों ने नदी से गैस सिलेंडर और लकड़ियां भी निकालीं. स्थानीय लोगों के अनुसार नदी में बड़ी संख्या में गैस सिलेंडर बहकर आए हैं. धनहा पुल पर नदी से बहकर आई सामग्री देखने और निकालने के लिए भीड़ जमा होने से मुख्य मार्ग पर जाम लग गया.

सूचना पर धनहा थानाध्यक्ष अमित कुमार सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और लोगों को हटाकर यातायात बहाल कराया. पुलिस ने नदी से निकाले गए कुछ गैस सिलेंडरों को जब्त भी किया है. इस दौरान पुलिस लोगों को नदी में उतरकर बहकर आ रही सामग्री पकड़ने से रोकती रही इसके बावजूद कई लोग नदी में उतरते रहे इससे हादसे की आशंका बनी रही.

''प्रशासन नदी में घुसने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है और छोटी नावों के परिचालन पर रोक लगा दी गई है. गंडक नदी में लाश दिखने का दावा किया जा रहा है. इसकी जांच की गई. लेकिन एसडीआरएफ को कोई लाश नहीं मिली.'' - समीर सौरभ. डीएम, गोपालगंज

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