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चाय के प्याले ने बचाई 5 दोस्तों की नेपाल में जान, रायपुर लौटे लोगों ने सुनाई त्रासदी की दर्दनाक दास्तान

बाढ़ आने से मात्र कुछ मिनट पहले पांचों दोस्त चाय पीने के लिए होटल में रुके थे.

TEA BREAK SAVED LIVES OF 5 FRIENDS
चाय के प्याले ने बचाई 5 दोस्तों की नेपाल में जान (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : August 30, 2026 at 7:06 AM IST

5 Min Read
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रायपुर: टी ब्रेक के छोटे से फैसले ने रायपुर के पांच दोस्तों की जान बचा ली. पांचों दोस्त नेपाल घूमने गए थे. बुधवार को भोटे कोशी और त्रिशूली नदी में आई बाढ़ में डूबने से बाल-बाल बच गए. पांचों दोस्त शनिवार को अपने घर माना कैंप लौटे. नेपाल से जान बचाकर लौटे युवकों के नाम नारायण सेन, दिनेश ओझा, प्रेम सिंह जगत, यतेंद्र प्रकाश और दिनेश सिंह ठाकुर है. सभी पांचों की उम्र 50 से 60 साल के बीच है और वो रायपुर के माना कैंप इलाके के रहने वाले हैं.

चाय के प्याले ने बचाई पांच दोस्तों की जान

सैलून चलाने वाले नारायण सेन ने कहा, "हम खुशकिस्मत थे कि 26 अगस्त को जब अचानक बाढ़ आई, तो हम चाय पीने के लिए रुके थे. अगर हम 10-15 मिनट पहले निकल गए होते, तो शायद हम वहां बाढ़ में फंस जाते, फिर पता नहीं हमारा क्या होता."

यह ग्रुप 21 अगस्त को रायपुर से निकला था और अगले दिन 22 अगस्त को नेपाल पहुंचा था. पांच दोस्तों के इस ग्रुप ने एक कार किराए पर ली थी और पशुपतिनाथ मंदिर, मनकामना मंदिर और दूसरे पर्यटन स्थलों पर जाने का प्लान बनाया था. 26 अगस्त को सुबह करीब 9.30-10 बजे, वे धाडिंग जिले के मलेखु कस्बे में एक होटल में चाय के लिए रुके थे.

भारतीय होटल मालिक ने की मदद

नारायण सेन ने कहा, "वहां हमें पता चला कि आगे एक पुल बाढ़ में बह गया है. होटल एक भारतीय का था, जिन्होंने हमारी बहुत मदद की और हमें खाना भी खिलाया." नारायण सेन ने आगे कहा, "हमने त्रिशूली नदी में कारों को बहते देखा. लाशें और बहुत सी दूसरी चीजें भी पानी की तेज धारा के साथ बह रही थी. हम डरे हुए थे. हमेशा यह डर बना रहता था कि बाढ़ की स्थिति और खराब हो सकती है." दोस्तों के इस ग्रुप ने मलेखु में एक ऊंची जगह पर शरण ली और रात कार में बिताई. इन लोगों ने बताया कि स्थानीय लोगों और अधिकारियों ने उनकी काफी मदद की.

पुलिस हेड कॉन्स्टेबल दिनेश सिंह ठाकुर ने बताया कि जब बाढ़ आई, तो वे पशुपतिनाथ मंदिर से लगभग 50 किलोमीटर दूर थे. दिनेश सिंह ठाकुर बोले, "होटल में चाय पीते समय हमने देखा कि लोग अचानक बेचैन हो रहे हैं. बाद में हमें बाढ़ से हुई तबाही के बारे में पता चला. हमने सुना कि पूरा गांव, इमारतें, दफ़्तर और पनबिजली परियोजनाएँ बर्बाद हो गईं.''

भगवान शिव को दिया धन्यवाद

दिनेश सिंह ठाकुर ने बताया कि बाद में वो दोस्तों के साथ हालात का जायजा लेने के लिए त्रिशूली नदी के किनारे पहुंचे, जहां के हालात देखकर हमें बहुत दुख हुआ. दिनेश सिंह ठाकुर कहते हैं, "हमने जो देखा, उसे शब्दों में बयां करना बहुत मुश्किल है. हम भगवान शिव का नाम जपते रहे और हमें लगा कि उनके आशीर्वाद ने ही हमारी रक्षा की."

दिनेश सिंह ठाकुर ने स्थानीय प्रशासन और पुलिस की तारीफ़ करते हुए कहा, "बिजली और पानी नहीं था, लेकिन प्रशासन और पुलिस ने हमारी मदद की. उन्होंने हमें बताया कि हम ऊंची जगह पर हैं और हमें चिंता नहीं करनी चाहिए."

इंटरनेट और हेल्पलाइन नंबर के जरिए किया संपर्क

नेपाल के बाढ़ में फंसे दोस्तों के इस ग्रुप ने इंटरनेट के ज़रिए अपने परिवारों को संपर्क किया और अपनी लोकेशन बताने के लिए भारत सरकार की हेल्पलाइन का इस्तेमाल किया. दिनेश सिंह ठाकुर ने कहा, "वहां इंटरनेट सर्विस अच्छी तरह काम कर रहा था, इसलिए हम अपने परिवारों के संपर्क करने में आसानी हुई. हमने अपने परिवार वालों को बताया कि वो ठीक हैं और वो घबराए नहीं."

28 अगस्त को पांचों दोस्त नेपाल से रायपुर के लिए हुए रवाना

नेपाल त्रासदी से बचकर घर लौटे लोगों ने बताया कि उनको वहां की महिला सुरक्षाकर्मियों ने राखी बांधी, जो उनके लिए एक बड़ा ही भावुक करने वाला पल था. दर्जी की दुकान चलाने वाले दिनेश ओझा ने कहा कि बाढ़ के बाद उन्होंने जो मंज़र देखा, वह हमेशा उनके ज़हन में रहेगा. उन्होंने कहा, "हमने जो देखा, उसे हम कभी नहीं भूल पाएंगे. कई लोग अपने लापता परिवार के सदस्यों को बेताबी से ढूंढ रहे थे." दिनेश ओझा कहा, "हम अपनी कार में सोए, लेकिन ठीक से सो नहीं पा रहे थे, हमेशा यह डर बना रहता था कि कहीं फिर से बाढ़ न आ जाए." दिनेश कहते हैं कि हम भगवान के शुक्रगुजार हैं कि हम वापस लौट पाए.

(सोर्स PTI)

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