सीमांत क्षेत्र के छात्रों की शिक्षा की नींव होगी मजबूत, 'नींव' कार्यक्रम से मिला उच्च शिक्षा में दाखिले का मार्गदर्शन
'नींव' के माध्यम से विद्यार्थियों को समझाया गया कि CUET के जरिए देश के प्रमुख केंद्रीय विश्वविद्यालयों में कैसे प्रवेश प्राप्त किया जा सकता है.


Published : January 4, 2026 at 9:17 PM IST
जैसलमेर: पश्चिमी राजस्थान के सीमांत क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में 'नींव' कार्यक्रम सामने आया है. बाड़मेर के महावीर टाउन हॉल में आयोजित इस कार्यक्रम ने बाड़मेर, जैसलमेर और बालोतरा सहित आसपास के जिलों के हजारों विद्यार्थियों को कॉमन यूनिवर्सिटी एंट्रेंस टेस्ट (CUET) और देश की प्रतिष्ठित सेंट्रल यूनिवर्सिटीज से जुड़ी प्रामाणिक और व्यावहारिक जानकारी एक ही मंच पर उपलब्ध कराई. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवा और विद्यार्थी शामिल हुए, जिससे पूरा सभागार विद्यार्थियों के उत्साह, जिज्ञासा और सीखने की ऊर्जा से भरा नजर आया. सीमांत और दूरदराज क्षेत्रों से आए विद्यार्थियों के लिए यह कार्यक्रम उच्च शिक्षा के नए द्वार खोलने वाला साबित हुआ.
यह है 'नींव' का मकसद: 'नींव' कार्यक्रम का मकसद सीमांत क्षेत्रों के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं और विश्वविद्यालयों की जानकारी देकर उन्हें मुख्यधारा की उच्च शिक्षा से जोड़ना रहा. कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझाया गया कि CUET के जरिए देश के प्रमुख केंद्रीय विश्वविद्यालयों में समान और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत प्रवेश कैसे प्राप्त किया जा सकता है. कार्यक्रम के दौरान शिक्षा को समाज और क्षेत्र के विकास की आधारशिला बताते हुए वक्ताओं ने कहा कि सही समय पर सही मार्गदर्शन मिलने से विद्यार्थी अपनी प्रतिभा का बेहतर उपयोग कर सकते हैं. सीमांत क्षेत्रों में अक्सर जानकारी और संसाधनों की कमी के कारण विद्यार्थी पीछे रह जाते हैं, ऐसे में 'नींव' जैसे कार्यक्रम इस अंतर को कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं.
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— Ravindra Singh Bhati (@RavindraBhati__) January 4, 2026
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कार्यक्रम में देश के प्रतिष्ठित शिक्षाविदों ने CUET से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया. डॉ विक्रमादित्य राठौड़, असिस्टेंट प्रोफेसर (लॉ), ILS लॉ कॉलेज, पुणे विश्वविद्यालय ने CUET के तहत आने वाले विश्वविद्यालयों, उपलब्ध कोर्स विकल्पों और उनकी उपयोगिता पर प्रकाश डाला. उन्होंने बताया कि सेंट्रल यूनिवर्सिटीज न केवल गुणवत्तापूर्ण डिग्री प्रदान करती हैं, बल्कि विद्यार्थियों के व्यक्तित्व, सोचने-समझने की क्षमता और नेतृत्व कौशल को भी विकसित करती हैं. डॉ गोविन्द इनखिया, एसोसिएट प्रोफेसर, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली ने CUET की आवेदन प्रक्रिया, पात्रता, आवश्यक दस्तावेजों और काउंसलिंग प्रक्रिया को सरल भाषा में समझाया, जिससे विद्यार्थियों की कई शंकाओं का समाधान हुआ. वहीं डॉ ईश्वरदान चारण, असिस्टेंट प्रोफेसर, सत्यवती कॉलेज ने परीक्षा पैटर्न, सिलेबस और प्रभावी तैयारी की रणनीति पर उपयोगी सुझाव दिए, जिससे विद्यार्थियों को परीक्षा की स्पष्ट दिशा मिली.
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यह रहा कार्यक्रम को लेकर रुझान: कार्यक्रम के आखिर में धन्यवाद ज्ञापन और घोषणासत्र का संचालन गणपत सिंह राजपुरोहित ने किया. उन्होंने कहा कि नींव जैसे शैक्षणिक मार्गदर्शन कार्यक्रम सीमांत क्षेत्रों के विद्यार्थियों में आत्मविश्वास पैदा करने और उन्हें राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करने का सशक्त माध्यम बन रहे हैं. शिक्षक नेता प्रकाश विश्नोई ने बताया कि इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को CUET और सेंट्रल यूनिवर्सिटीज से जुड़ी सटीक, स्पष्ट और भरोसेमंद जानकारी एक ही मंच पर प्राप्त हुई. महानगरों में जाकर कोचिंग लेने की मजबूरी के बिना विद्यार्थियों को अपने ही क्षेत्र में विशेषज्ञों से मार्गदर्शन मिला, जिससे समय और संसाधनों दोनों की बचत हुई. कार्यक्रम के बाद विद्यार्थी उच्च शिक्षा को लेकर अधिक जागरूक, आत्मविश्वासी और तैयार नजर आए.

