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सड़क पर उतरे पॉलिटेक्निक के नीड बेस्ड लेक्चरर, नियुक्ति नियमावली के खिलाफ किया विरोध प्रदर्शन

रांची में नीड बेस्ड लेक्चररों ने नियुक्ति विज्ञापन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया. लोगों ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है.

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सड़क पर उतरे नीड बेस्ड लेक्चरर (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : February 19, 2026 at 12:41 PM IST

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रांची: राज्य के विभिन्न पॉलिटेक्निक कॉलेजों में कार्यरत नीड बेस्ड लेक्चरर अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतर आए हैं. मुख्यमंत्री आवास के समीप बड़ी संख्या में एकत्रित इन शिक्षकों ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) द्वारा जारी पॉलिटेक्निक लेक्चरर नियुक्ति विज्ञापन का विरोध जताया. प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का कहना है कि नई नियमावली उनके साथ अन्यायपूर्ण है. इससे वर्षों से सेवा दे रहे लेक्चररों का भविष्य संकट में पड़ सकता है.

जानकारी देते नीड बेस्ड शिक्षक (Etv Bharat)

नियुक्ति विज्ञापन का क्यों हो रहा विरोध

प्रदर्शनकारियों के अनुसार, राज्य में पूर्व में 252 नीड बेस्ड लेक्चररों की नियुक्ति की गई थी, जिनकी न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता बीटेक निर्धारित की गई थी. ये सभी लेक्चरर पिछले कई वर्षों से पॉलिटेक्निक कॉलेजों में नियमित रूप से अध्यापन कार्य कर रहे हैं और संस्थानों की शैक्षणिक गतिविधियों को सुचारू रूप से संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

उनका कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने तकनीकी शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने में योगदान दिया है. इसी बीच, जेपीएससी ने 13 फरवरी को 355 पदों पर पॉलिटेक्निक लेक्चरर की नियुक्ति के लिए नया विज्ञापन जारी किया है. नई नियुक्ति नियमावली में एमटेक, पीएचडी, जीईटी (ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट) तथा रिसर्च से संबंधित अर्हताएं अनिवार्य की गई हैं.

लेक्चररों सरकार से हस्तक्षेप की मांग

नीड बेस्ड लेक्चररों का कहना है कि इन नई शर्तों को वे पूरा नहीं कर पा रहे हैं, जिसके कारण वे इस भर्ती प्रक्रिया से बाहर हो जाएंगे. प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों का तर्क है कि जब उनकी नियुक्ति हुई थी, तब निर्धारित नियमों के तहत ही चयन किया गया था. ऐसे में अब नई और उच्च अर्हताएं लागू कर देना उनके साथ अन्याय है.

उन्होंने मांग की है कि जेपीएससी द्वारा जारी विज्ञापन को रद्द किया जाए या उसमें संशोधन कर वर्तमान में कार्यरत नीड बेस्ड लेक्चररों को प्राथमिकता दी जाए अथवा उन्हें आवश्यक छूट प्रदान की जाए. मुख्यमंत्री आवास के पास प्रदर्शन कर रहे लेक्चररों ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है.

उनका कहना है कि यदि जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा. फिलहाल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन शिक्षकों का आंदोलन राज्य की तकनीकी शिक्षा व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनता जा रहा है.

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