रांची में है भगवान भास्कर का अति प्राचीन मंदिर! जानें, किसने कराया था इसका निर्माण
रांची में भगवान सूर्य का करीब दो सौ साल पुराना मंदिर स्थित है. जानें, इसकी कहानी.

Published : October 24, 2025 at 5:39 PM IST
रांची: सूर्य उपासना और लोक आस्था का महापर्व छठ शनिवार 25 अक्टूबर से नहाय-खाय के साथ शुरू हो जाएगा. रविवार 26 अक्टूबर को खरना के बाद 36 घंटों का निर्जला उपवास शुरू होगा. वहीं 27 अक्टूबर को छठव्रती अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को अर्घ्य देंगे. इसके बाद 28 अक्टूबर को उदयाचलगामी सूर्य को अर्घ्य के साथ महापर्व का समापन हो जाएगा.
छठमय हो चुकी राजधानी रांची में ईटीवी भारत आपको बताने जा रहा है. एक ऐसे प्राचीन सूर्य मंदिर के बारे में जिसके बारे में ऐसी मान्यता है कि जो भी भक्त या श्रद्धालु सच्चे मन से यहां आकर भगवान भास्कर की आराधना करते हैं, उनकी सारी मनोकामनाएं पूरी हो जाती है.
छठ पूजा समिति एवं अन्य धार्मिक कार्यों में हमेशा शामिल होने वाले स्थानीय राजीव रंजन मिश्रा हों या मंदिर में भगवान की अनवरत आराधना करने वाली विंध्यवासिनी देवी. सब का एक ही मत है कि उन्होंने न जानें कितने लोगों को देखा जो यहां आकर भगवान भास्कर की आराधना की और मन्नत पूरी होने पर फिर यहां दर्शन करने आये.

'किसी को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई तो किसी की काया निरोगी हुई'
भगवान सूर्यदेव की पूजा-अर्चना करने में अपना जीवन गुजार देने वाली विंध्यवासिनी देवी कहती हैं कि उनकी चौथी पीढ़ी भगवान भास्कर की सेवा में लगी हैं. वह बताती हैं कि उन्होंने ऐसे बहुत सारे लोगों को देखा है जो मन्नत पूरा होने पर यहां आए, भगवान की आराधना की और उन्हें भी उपहार दिया.

करीब 190 वर्ष पुराना है रांची का सूर्य मंदिर
राजीव रंजन मिश्रा बताते हैं कि राजधानी में बड़ा तालाब (विवेकानंद सरोवर) के पास का सूर्य मंदिर अति प्राचीन मंदिर है. वह बताते हैं कि नागवंशी राजाओं ने इस मंदिर का निर्माण 1836 के आसपास कराया था और तब से रांची में छठ पूजा की शुरुआत हुई.

वह बताते हैं कि बड़ा तालाब में छठव्रती भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के बाद इस अति प्राचीन मंदिर में रथ पर सवार सूर्य भगवान का दर्शन और आराधना जरूर करते हैं. करीब 190 वर्ष पुराना इस सूर्य मंदिर में भगवान भास्कर की तीन प्रतिमाएं हैं. वहीं अन्य भगवान की भी प्रतिमाएं विराजमान हैं.

भगवान सूर्यदेव को समर्पित करीब 190 वर्ष पुराना मंदिर को लेकर ऐसी मान्यता है कि रांची में सूर्योपासना का महापर्व छठ पर्व का आरंभ के दौरान ही इस मंदिर का निर्माण नागवंशी राजाओं ने कराया था. आज भी अर्घ्य देने के बाद व्रती इस सूर्य मंदिर में भगवान भास्कर का दर्शन कर ही पारण करते हैं.

मंदिर ने झेला असामाजिक तत्वों का विद्वेष
राजीव रंजन मिश्रा इस अति प्राचीन मंदिर के महत्व की चर्चा करते हुए कहते हैं कि यह कितना सिद्ध मंदिर है. इसका अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि कुछ वर्ष पहले अराजक तत्वों ने इसे नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी लेकिन प्राचीन मंदिर भवन का बाल बांका भी नहीं हुआ.

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