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AK-47, एक AK-56, दो इंसास, 505 जिंदा कारतूस.. 3 लाख के इनामी नक्सली सुरेश कोड़ा का सरेंडर

बिहार में 3 लाख का इनामी नक्सली हथियारों के साथ सरेंडर किया है. मुंगेर में नक्सलियों का सफाया होने का दावा किया जा रहा है-

naxalite suresh koda surrender
इनामी नक्सली का सरेंडर (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : February 18, 2026 at 8:19 PM IST

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मुंगेर: चार दिन पहले बिहार के गृह विभाग के मंत्री सम्राट चौधरी ने मुंगेर सहित प्रदेश के नक्सल प्रभावित इलाकों से नक्सलियों के सफाए का दावा किया था. उनके इस बयान के महज चार दिन बाद मुंगेर जिला मुख्यालय से बड़ी खबर सामने आई है. सम्राट चौधरी ने कहा था कि 10 दिन के अंदर जितने नक्सली हैं वो सब साफ हो जाएंगे.

3 लाख के इनामी नक्सली का सरेंडर : लंबे समय से नक्सल गतिविधियों से प्रभावित रहे जिले में सुरक्षा बलों को बड़ी सफलता मिली है. सरकार द्वारा तीन लाख रुपये के इनामी और सक्रिय सशस्त्र नक्सली दस्ता के स्पेशल एरिया कमांडर सुरेश कोड़ा ने बुधवार को पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. प्रशासन ने इस आत्मसमर्पण के साथ मुंगेर को पूरी तरह नक्सल मुक्त होने का दावा किया है.

नक्सली सुरेश कोड़ा का सरेंडर (ETV Bharat)

वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में किया सरेंडर : नक्सली स्पेशल एरिया कमिटी के कमांडर और कुख्यात नक्सली सुरेश कोड़ा ने पुलिस केंद्र मुंगेर में डीआईजी मुंगेर, एसटीएफ डीआईजी, डीएम मुंगेर और अन्य वरीय अधिकारियों की मौजूदगी में आत्मसमर्पण किया. मुंगेर पुलिस और बिहार एसटीएफ के लगातार अभियान, दबिश और सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर उसने मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया.

भारी मात्रा में हथियार और कारतूस बरामद : आत्मसमर्पण के दौरान सुरेश कोड़ा ने एक AK-47, एक AK-56, दो इंसास राइफल और 505 जिंदा कारतूस पुलिस को सौंपे. वह करीब 60 आपराधिक और नक्सली मामलों में फरार चल रहा था और लंबे समय से मुंगेर के पहाड़ी व दुर्गम इलाकों में सक्रिय था. राजासराय क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ के बाद उसका दस्ता लगातार कमजोर पड़ता गया और उसके कई साथी पहले ही सरेंडर कर चुके थे.

naxalite suresh koda surrender
भारी मात्रा में हथियार और कारतूस बरामद (ETV Bharat)

पिछले एक साल में तेज हुआ अभियान : मुंगेर में पिछले एक वर्ष के दौरान नक्सल विरोधी अभियान तेज किया गया था. 28 दिसंबर 2025 को तीन नक्सली कमांडरों ने आत्मसमर्पण किया था, जबकि जुलाई 2025 में भी एक सक्रिय सदस्य ने हथियार छोड़ दिए थे. लगातार अभियान और जनसहयोग के कारण नक्सली संगठन कमजोर हुआ है और अब लोग मुख्यधारा में लौट रहे हैं.

विकास और पुनर्वास नीति का असर : प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा अभियान के साथ-साथ विकास योजनाओं, पुनर्वास सुविधाओं और जनसहयोग ने भी नक्सल प्रभाव खत्म करने में अहम भूमिका निभाई है. आत्मसमर्पण नीति के तहत सुरेश कोड़ा को तीन लाख रुपये का इनाम, पांच लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि, रोजगार प्रशिक्षण भत्ता और पुनर्वास से जुड़ी कई सरकारी सुविधाएं दी जाएंगी.

naxalite suresh koda surrender
नक्सली का सरेंडर (ETV Bharat)

''मुंगेर पुलिस और बिहार एसटीएफ के लगातार अभियान, दबिश और सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर उसने मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया.आत्मसमर्पण के दौरान सुरेश कोड़ा ने एक AK-47, एक AK-56, दो इंसास राइफल और 505 जिंदा कारतूस पुलिस को सौंपे.''- संजय कुमार सिंह, डीआईजी, एसटीएफ

25 वर्षों से फरार था सुरेश कोड़ा : करीब 25 वर्षों से फरार और 60 नक्सली कांडों में वांछित सुरेश कोड़ा ने आत्मसमर्पण के बाद लोगों से क्षमा मांगते हुए कहा कि वह अब कभी नक्सल कमिटी में वापस नहीं जाएगा. उसने एसटीएफ जिंदाबाद का नारा भी लगाया.

ग्रामीणों ने कहा, अब गांव नक्सल मुक्त : इस मामले में ग्रामीण सह सुरेश कोड़ा के भतीजे रंजन कोड़ा ने कहा कि उनका गांव अब पूरी तरह नक्सल मुक्त हो चुका है. गांव में कोई भी नक्सली नहीं है और युवा अब नक्सली गतिविधियों में शामिल नहीं होंगे. जिला प्रशासन द्वारा गांव में विकास कार्य और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जिससे युवाओं का रुझान सकारात्मक दिशा में बढ़ा है.

प्रशासन का दावा, मुंगेर पूरी तरह नक्सल मुक्त : प्रशासन ने दावा किया है कि इस आत्मसमर्पण के बाद मुंगेर जिला पूरी तरह नक्सल मुक्त हो चुका है. हालांकि अब नजर इस बात पर रहेगी कि विकास योजनाएं जमीन पर कितनी तेजी से उतरती हैं और इलाके में शांति कितनी स्थायी बनती है.

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