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केंदू पत्ता कारोबार से लेवी वसूलना चाहता है टीएसपीसी, संगठन को करना चाहता है मजबूत

नक्सल संगठन टीएसपीसी पलामू के इलाके में केंदू पत्ते के कारोबार से लेवी वसूली करना चाहता है. पलामू से नीरज कुमार की रिपोर्ट.

Naxal organization TSPC
केंदू पत्ता (Etv Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : June 3, 2026 at 2:23 PM IST

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पलामू: प्रतिबंधित नक्सली संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति (टीएसपीसी) झारखंड में अंतिम सांसें गिन रहा है. टीएसपीसी के बचे हुए कमांडर फिर से संगठन को मजबूत करने की फिराक में हैं. यही वजह है कि इनकी नजर अब केंदू पत्ता के कारोबार पर है.

टीएसपीसी केंदू पत्ता के कारोबार से लेवी वसूलना चाहता है ताकि संगठन को मजबूत कर सके. इसके लिए केंदू पत्ता के ठेकेदारों को चेतावनी जारी करते हुए पर्चा भी जारी किया गया है. लेवी के लिए नक्सलियों ने पांकी के डेमा के इलाके में आगजनी भी की.

केंदू पत्ता कारोबार से लेवी वसूलना चाहता है टीएसपीसी (Etv Bharat)

प्रति बैग 60 से 70 रुपए लेवी

दरअसल, 2005-06 में टीएसपीसी की नजर केंदू पत्ता के कारोबार पर गई. पहले भाकपा माओवादी संगठन इस कारोबार से लेवी वसूलता था. 2010-11 तक माओवादियों का इस कारोबार पर एक तरफा कब्जा था. बाद में टीएसपीसी ने अपने प्रभाव क्षेत्र को बढ़ाया और केंदू पत्ता के कारोबार में मोटी रकम वसूलना शुरू किया. 2010-11 तक प्रतिबैग 30 से 40 रुपए लेवी वसूली जाती थी, बाद में यह बढ़कर 60 से 70 रुपए तक हो गई.

कारोबार से मिलने वाली लेवी को लेकर माओवादियों और टीएसपीसी के बीच कई बार खूनी संघर्ष भी हुए. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, वर्चस्व की लड़ाई में 2005-06 से लेकर 2016-17 तक 40 से भी अधिक कमांडर मारे गए. 2009-10 में पलामू-चतरा सीमा पर माओवादियों के 10 कमांडर मारे गए जबकि 2013-14 में पलामू के बिश्रामपुर में टीएसपीसी के 15 कमांडर मारे गए.

टीएसपीसी कमांडर शशिकांत और नथुनी कर रहे हैं नेतृत्व

प्रतिबंधित नक्सल संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी के जोनल कमांडर सह कथित सुप्रीमो शशिकांत गंझू और नथुनी सिंह दस्ते का नेतृत्व कर रहे हैं. कुछ महीना पहले ही नथुनी सिंह जेल से बाहर निकला है और शशिकांत गंझू के दस्ते में शामिल हुआ है. नथुनी सिंह ने ही केंदू पत्ता कारोबारियों को चेतावनी जारी की है. शशिकांत गंझू पलामू के मनातू के केदल का रहने वाला है, उस पर झारखंड सरकार ने 10 लाख का इनाम रखा हुआ है, जबकि नथुनी सिंह लातेहार के मनिका का रहने वाला है.

पलामू, चतरा और लातेहार के इलाके में शशिकांत गंझू ही टीएसपीसी का सबसे बड़ा कमांडर है. पलामू पुलिस ने 2025 में उसके खिलाफ बड़ी कार्रवाई की थी. इस कार्रवाई में उसके दस्ते में शामिल पांच लाख का इनामी मुखदेव मारा गया था, जबकि दो सदस्यों ने चतरा में सरेंडर कर दिया था. बाद में टीएसपीसी का एक बड़ा कमांडर यूपी एटीएस के हत्थे चढ़ गया था.

कई जिलों में टीएसपीसी का रहा है प्रभाव

टीएसपीसी का प्रभाव पलामू, चतरा, लातेहार, हजारीबाग, गढ़वा, रांची, रामगढ़ जैसे जिलों में रहा है. सुरक्षाबलों के अभियान के बाद टीएसपीसी की गतिविधि पलामू, चतरा और लातेहार की सीमावर्ती इलाकों तक ही सिमट कर रह गई है. पिछले कुछ वर्षों में टीएसपीसी के कई बड़े कमांडर पकड़े गए हैं या विभिन्न मुठभेड़ में मारे गए हैं.

केंदू पत्ता के कारोबार से टीएसपीसी का रीजनल कमेटी सदस्य आक्रमण गंझू सबसे अधिक लेवी वसूलता था. 2024 में आक्रमण गंझू को चतरा पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया. उसके बाद से शशिकांत को संगठन की जिम्मेदारी मिली.

टीएसपीसी का पूर्व सब जोनल कमांडर बिरसाय का कहना है कि केंदू पत्ता के कारोबार के लिए कई बार संघर्ष हुए हैं. लेवी के पैसों से हथियार और गोली खरीदी जाती थी. दूसरे कैडर में भी पैसे बांटे जाते थे जबकि इस पैसे को ऊपर भी भेजा जाता था.

पलामू से निकलता है 95 हजार बोरा से अधिक केंदू पत्ता

पलामू जिले में बड़े स्तर पर केंदु पत्ते का कारोबार होता है. यहां से 95 हजार से भी अधिक केंदू पत्ता के बोरे निकाले जाते हैं. जबकि प्रतिवर्ष चार अरब से भी अधिक पत्तों की तुड़ाई होती है. टीएसपीसी को केंदू पता के कारोबार से लाखों रुपए की लेवी सिर्फ पलामू जिले से मिलती रही है.

अप्रैल के महीने में केंदू पत्ता के कारोबार की रेट तय की जाती है जबकि मई महीने में पत्तों की तुड़ाई शुरू होती है. बाद में पत्तों को सुखाया जाता है और इन्हें बोरे में पैक कर दिया जाता है. मानसून के आगमन के साथ ही केंदू पत्ता का कारोबार बंद हो जाता है. करीब 30 दिनों तक केंदू पत्ता का कारोबार सक्रिय रूप से जारी रहता है. इसी दौरान टीएसपीसी लेवी वसूलता है और लेवी के लिए हिंसक घटनाओं को भी अंजाम देता है.

पुलिस के रडार पर टॉप कमांडर और उनके समर्थक

पिछले कुछ वर्षों में पलामू, गढ़वा और लातेहार के इलाके में टीएसपीसी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई हुई है. केंदू पत्ता से लेवी वसूलने आए कई टीएसपीसी के कमांडर पकड़े गए हैं और उनसे लेवी की रकम भी जब्त हुई है. बाकी बचे हुए कमांडरों को पुलिस ने रडार पर लिया है और उनके समर्थकों को भी चिन्हित किया है. टीएसपीसी के खिलाफ पुलिस लगातार अभियान चला रही है.

पलामू डीआईजी किशोर कौशल ने कहा कि टीएसपीसी के छिटपुट कमांडर बचे हुए हैं और सभी के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है. अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं. जल्द ही टीएसपीसी का पूरी तरह से सफाया हो जाएगा. डीआईजी ने कहा कि वैसे लोग जो टीएसपीसी के लिए लेवी वसूलते हैं या उन्हें लेवी देते हैं, उन लोगों पर भी पुलिस की नजर है और उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है. टीएसपीसी के आर्थिक ढांचे को पूरी तरह से खत्म कर दिया जाएगा.

दक्षिण भारत और पश्चिम बंगाल में होती है सप्लाई

पलामू, गढ़वा एवं लातेहार के इलाके से निकलने वाला केंदू पत्ता दक्षिण भारत और पश्चिम बंगाल के इलाके में भेजा जाता है. तीनों जिलों के केंदू पत्ता की क्वालिटी बेस्ट मानी जाती है, जिसकी मांग दूसरे राज्यों में सबसे अधिक है. केंदू पत्ता के कारोबार से जुड़े हुए अधिकतर ठेकेदार छत्तीसगढ़ के इलाके के रहने वाले हैं. 2026 में प्रति बोरा मजदूरी 1,921 रुपए निर्धारित की गयी है. 2018 में प्रति बोरा 1,883 मजदूरी निर्धारित की गयी थी.

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