ETV Bharat / state

नौरादेही में बाघ की मौत के मामले में डीएफओ को नोटिस, 3 दिन में देना होगा जबाव

नौरादेही टाइगर रिजर्व में मिले मृत बाघ के मामले में डीएफओ को नोटिस, वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट ने उठाए बड़े सवाल.

Nauradehi DFO asked reply in 3 days
टाइगर के स्टैटिक अलर्ट की अनदेखी पर उठे सवाल (Getty Image)
author img

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : February 18, 2026 at 10:35 PM IST

3 Min Read
Choose ETV Bharat

सागर: वीरांगना रानी दुर्गावती (नौरादेही) टाइगर रिजर्व में रविवार को बाघ की मौत के मामले में टाइगर रिजर्व के डीएफओ को नोटिस जारी किया गया है. डीएफओ को 3 दिन के अंदर इस मामले में जवाब देना होगा. वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने रेडियो कॉलर पहने हुए बाघ की मौत को लेकर कई सवाल खड़े किए थे. शिकायत को गंभीरता से लेते हुए प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख ने नौरादेही टाइगर रिजर्व के डीएफओ रजनीश कुमार सिंह को नोटिस जारी किया गया.

पोस्टमार्टम में मौत की वजह बताया टेरिटोरियल फाइट

रविवार शाम को नौरादेही टाइगर रिजर्व में कान्हा से महीने भर पहले आया बाघ मृत अवस्था में मिला था. यह बात सामने आई थी कि लगातार 2 दिन तक एक ही जगह लोकेशन पाए जाने के बाद जब वन अमले ने जाकर देखा, तो बाघ मारा हुआ था. पोस्टमार्टम की शुरुआती रिपोर्ट में बाघ की मौत का कारण टेरिटोरियल फाइट बताया गया है. बाघ को 18-19 जनवरी की दरमियानी रात रेडियो कॉलर लगाकर वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के में छोड़ा गया था. तब से ही उसकी लगातार मॉनीटरिंग कर रहे थी.

Nauradehi Tiger Reserve DFO Noticed
नौरादेही टाइगर रिजर्व में मिले मृत बाघ के मामले में डीएफओ को नोटिस (ETV Bharat)

3 दिन के भीतर मांगा गया जवाब

मध्य प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षण व वन बल प्रमुख विजय कुमार नामदेव अंबाडे ने कहा, "बाघ की संदेहास्पद मौत के मामले में अजय दुबे ने गंभीर शिकायत की है. डीएफओ रजनीश कुमार सिंह को 3 दिन के अंदर जांच कर रिपोर्ट पेश करने को कहा गया है. यह आदेश बुधवार शाम जारी किया गया है."

स्टैटिक अलर्ट की अनदेखी पर उठाया सवाल

वाइल्डलाइफ एक्टिविस्ट अजय दुबे ने अपनी शिकायत में कहा था कि एक रेडियो-कॉलर वाले बाघ का मृत पाया जाना और आधिकारिक प्रेस नोट कई संदेहास्पद प्रश्न खड़े करता है. 2 दिनों तक स्टैटिक अलर्ट की अनदेखी क्यों की गई? रेडियो कॉलर से हर 8 घंटे में मिलने वाले स्टैटिक अलर्ट यह संकेत देते हैं कि बाघ की गतिविधि रुक गई है. उन्हें 2 दिनों तक नजरअंदाज क्यों किया गया?

निगरानी चूक के लिए जवाबदेही तय करना जरूरी

अजय दुबे ने शिकायत में पूछा है कि निगरानी टीम को संघर्ष की भनक क्यों नहीं लगी? बाघों की क्षेत्रीय लड़ाई की आवाज या हलचल निगरानी टीमों द्वारा अनसुनी कैसे रह गई. इस फाइट में शामिल दूसरा बाघ वर्तमान में कहाँ है? क्या अन्य बाघ भी खतरे में हैं? क्या यह लापरवाही इलाके के बाकी 3-4 कॉलर वाले बाघों की सुरक्षा को भी जोखिम में डालती है? इस निगरानी चूक के लिए तत्काल जवाबदेही तय करने की आवश्यकता है.

मॉनिटरिंग प्रोटोकॉल का बताया विफलता

उन्होंने मांग की है कि जिम्मेदार स्टाफ को निलंबित कर जांच हो. क्योंकि आमतौर पर रेडियो-कॉलर का मुख्य उद्देश्य ही यही होता है कि बाघ के असामान्य व्यवहार या उसकी मृत्यु की स्थिति में तुरंत मोर्चुअरी अलर्ट मिल जाए. यदि अलर्ट मिलने के बावजूद 48 घंटों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो यह न केवल फील्ड स्टाफ की कार्यक्षमता पर सवाल उठाता है, बल्कि पूरे मॉनिटरिंग प्रोटोकॉल की विफलता को दर्शाता है.