प्लास्टिक प्रदूषण से गौवंश के अस्तित्व पर संकट, शुरू किया देशव्यापी 'प्लास्टिक-मुक्त गौशाला अभियान'
अखिल भारतीय गौशाला सहयोग परिषद का कहना है कि देशभर की सभी गौशालाओं को चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह प्लास्टिक-मुक्त बनाया जाएगा.


Published : January 11, 2026 at 7:48 PM IST
जयपुर: प्लास्टिक प्रदूषण अब सिर्फ पर्यावरण की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि ये देसी गौवंश के अस्तित्व, स्वास्थ्य, किसान की आजीविका और सामाजिक चेतना से जुड़ा गंभीर राष्ट्रीय संकट बनता जा रहा है. इसी को लेकर अखिल भारतीय गौशाला सहयोग परिषद ने रविवार को देशव्यापी 'प्लास्टिक-मुक्त गौशाला अभियान' की शुरुआत की. इस अभियान के साथ हर गौशाला को प्लास्टिक मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया.
प्लास्टिक अब केवल कचरा नहीं, बल्कि एक सामाजिक अपराध बन चुका है और इसका सबसे ज्यादा शिकार गौवंश हुआ है. इसे लेकर अखिल भारतीय गौशाला सहयोग परिषद ने जयपुर में राष्ट्रीय स्तर पर मंथन किया. परिषद के अंतरराष्ट्रीय संयोजक डॉ अतुल गुप्ता ने बताया कि प्लास्टिक-मुक्त गौशालाएं अब विकल्प नहीं, बल्कि राष्ट्रीय अनिवार्यता हैं. गौशालाओं के आसपास फैल रहा प्लास्टिक गौ-माताओं की अकाल मौत का बड़ा कारण बन रहा है, जिसे रोकने के लिए समाज को आगे आना होगा.
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उन्होंने बताया कि इस दौरान सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि देशभर की सभी गौशालाओं को चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह प्लास्टिक-मुक्त बनाया जाएगा. गौशालाओं में प्लास्टिक थैलियों में भोजन सामग्री लाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाएगा और श्रद्धालुओं को कपड़े या कागज के थैले निशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे. साथ ही पशु चिकित्सा विभाग के सहयोग से गौवंश के पेट से प्लास्टिक निकालने के लिए शल्य-चिकित्सा की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी.

आंकड़े बढ़ा रहे चिंता:
- शहरी क्षेत्रों में करीब 30 से 35 प्रतिशत गौवंश प्लास्टिक निगलने को विवश
- करीब 50 लाख से ज्यादा गौवंश के पेट में प्लास्टिक जमा
- राजस्थान में करीब 8 लाख गौवंश प्लास्टिक प्रदूषण से प्रभावित
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इस दौरान मौजूद रहे एडवोकेट खेमचंद शर्मा ने प्लास्टिक प्रदूषण के विरुद्ध ठोस कानून और सख्त क्रियान्वयन की आवश्यकता पर जोर दिया. साथ ही कहा कि सीमावर्ती और ग्रामीण क्षेत्रों में प्रभावी प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के बिना गौवंश का संरक्षण संभव नहीं है. उन्होंने नगरीय निकायों और पंचायतों से गौशालाओं के आसपास विशेष स्वच्छता अभियान चलाने की मांग की. देहरादून से आए गौ भक्त दुष्यंत सिंह ने कहा कि प्लास्टिक प्रदूषण का असर अब पहाड़ी राज्यों में भी तेजी से बढ़ रहा है, जिससे पर्यावरण और गौवंश दोनों को नुकसान हो रहा है. ऐसे में शुरुआत शहरी क्षेत्रों में खुले कचरा स्थलों को खत्म करने से करनी होगी. वहीं बरेली से आए डॉ ओम प्रकाश ने बताया कि प्लास्टिक गौ-माता के पाचन तंत्र को स्थायी रूप से क्षतिग्रस्त कर देता है, जिससे उनका जीवन धीरे-धीरे समाप्त हो जाता है. ऐसे में प्लास्टिक-मुक्त गौशाला अभियान को जनआंदोलन बनाने की आवश्यकता है.

