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राष्ट्रीय खेल दिवस : 'द्रोणाचार्य' के बिना कैसे 'अर्जुन' बनेंगे खिलाड़ी? राजस्थान में 40 खेलों के लिए 50 कोच, जरूरत 1700 की

राष्ट्रीय खेल दिवस पर पढ़िए राजस्थान में खेल के विकास के दावों और खिलाड़ियों को मिल रही सुविधाओं की जमीनी हकीकत. आदित्य आत्रेय की रिपोर्ट...

राष्ट्रीय खेल दिवस
राष्ट्रीय खेल दिवस (ETV Bharat GFX)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : August 29, 2026 at 8:20 AM IST

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जयपुर : 29 अगस्त को राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में मनाया जाता है. खेलों के परिपेक्ष में राजस्थान की बात की जाए तो आज भी प्रदेश की गिनती पिछड़े राज्यों में की जाती है. राजस्थान में खेलों के विकास और खिलाड़ियों को मिल रही सुविधाओं के दावों की जमीनी तस्वीर कई सवाल खड़े करती है. राजस्थान की बास्केटबॉल टीम के पूर्व कप्तान दानवीर भाटी का कहना है कि प्रदेश में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, लेकिन उन्हें तराशने के लिए प्रशिक्षित कोच, पर्याप्त खेल मैदान और नियमित प्रशिक्षण सुविधाओं का अभाव बड़ी चुनौती बना हुआ है.

भाटी का कहना है कि राजस्थान स्पोर्ट्स काउंसिल से करीब 40 खेल रजिस्टर्ड हैं. इन खेलों में खिलाड़ियों को कोचिंग के लिए प्रशिक्षित कोचों की जरूरत है, लेकिन कोच की कमी आज भी राजस्थान के खेलों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. प्रदेश में करीब 1700 कोचों की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान में खेल सिखाने के लिए महज 50 के आसपास कोच उपलब्ध हैं. इस तरह जरूरत और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर है.

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कई खेलों के लिए सिर्फ एक कोच : भाटी का कहना है कि प्रदेश में कई खेल ऐसे हैं, जिनके लिए पूरे राजस्थान में महज एक कोच उपलब्ध है. प्रदेश में बॉक्सिंग, साइकिलिंग और बैडमिंटन जैसे खेलों में सिर्फ एक-एक कोच उपलब्ध हैं. खिलाड़ी तैयार करने के लिए केवल प्रतिभा और सुविधाओं की घोषणा पर्याप्त नहीं है. खिलाड़ी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाने में कोच की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है.

राष्ट्रीय खेल दिवस
खेल में पिछड़ा राज्य. (ETV Bharat GFX)

उन्होंने कहा कि एक प्रतिभावान खिलाड़ी को तकनीक, फिटनेस, रणनीति और मानसिक तौर पर मजबूत करने के लिए लंबे समय तक विशेष प्रशिक्षण की जरूरत होती है. ऐसे में अगर 'द्रोणाचार्य' नहीं होंगे तो 'अर्जुन' की कल्पना व्यर्थ है. राजस्थान में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं, लेकिन उन्हें सही दिशा देने वाले प्रशिक्षकों की कमी लगातार बनी हुई है. गांव-कस्बों से निकलने वाली प्रतिभाओं को शुरुआती स्तर पर ही बेहतर प्रशिक्षण नहीं मिल पाता और कई खिलाड़ी आगे बढ़ने के लिए दूसरे राज्यों का रुख करते हैं.

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सीएम के सामने भी रखी समस्या : जयपुर में 'माय भारत खेलो इंडिया संवाद' कार्यक्रम का आयोजन किया गया था, जिसमें मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने युवाओं और खिलाड़ियों से संवाद किया. इस दौरान कई खिलाड़ियों ने प्रशिक्षित कोच और खेल संसाधनों की कमी का जिक्र किया. उन्होंने बताया कि शुरुआत में खिलाड़ियों को यदि बेहतर ट्रेनिंग और डाइट मिले तो खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का ही नहीं बल्कि राज्य का नाम भी रोशन कर सकते हैं. प्रदेश में खेल मैदानों की कमी और सीमित संसाधन खिलाड़ियों के सामने बड़ी समस्या है. कई जिलों में खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए पर्याप्त मैदान उपलब्ध नहीं है. खिलाड़ियों ने यह भी कहा कि अगर स्कूल स्तर पर मैदान और खिलाड़ी तैयार किए जाएं तो आने वाले समय में देश को मेडल के लिए नहीं तरसना पड़ेगा.

ग्राउंड में खेलते बच्चे
ग्राउंड में खेलते बच्चे (फोटो ईटीवी भारत जयपुर)

बाहर जाकर सीखनी पड़ी खेल की बारीकी : दानवीर भाटी का कहना है कि राजस्थान की खेल व्यवस्था की चुनौती को समझने के लिए कॉमनवेल्थ खेलों में पदक जीतने वाली अरुंधति का उदाहरण भी महत्वपूर्ण है. प्रदेश से निकलने वाली इस प्रतिभा को खेल की बारीकियां और उच्च स्तर का प्रशिक्षण राजस्थान के बाहर जाकर हासिल करना पड़ा. इसके बाद ही वह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने में सफल हुईं. उनका कहना है कि प्रतिभा राजस्थान में पैदा हो सकती है, लेकिन उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनाने के लिए कई बार राज्य से बाहर की सुविधाओं और प्रशिक्षित कोच की जरूरत पड़ती है. यही सुविधाएं प्रदेश में उपलब्ध हों तो राजस्थान के खिलाड़ियों को प्रशिक्षण के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा.

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स्पोर्ट्स स्कूल के हालात भी ठीक नहीं : उनका कहना है कि राजस्थान में खेलों को बढ़ावा देने के लिए समय-समय पर नई योजनाओं और खेल सुविधाओं की घोषणाएं होती रही हैं. राजस्थान की एकमात्र आवासीय स्पोर्ट्स स्कूल बीकानेर में है, लेकिन उसके हालात भी कुछ ठीक नहीं हैं. 17 साल से खिलाड़ियों की डाइट में एक रुपए का भी इजाफा नहीं हुआ है. हाल ही में सरकार ने आमेर में महाराणा प्रताप खेलकूद विश्वविद्यालय की स्थापना की बात भी कही है, लेकिन केवल बड़े संस्थान बनाने से तस्वीर नहीं बदलेगी. जमीनी स्तर पर खेल मैदान, प्रशिक्षक, उपकरण, फिजियोथेरेपिस्ट और नियमित प्रतियोगिताओं की व्यवस्था एक साथ विकसित करनी होगी.

खिलाड़ियों को कोचिंग के लिए प्रशिक्षित कोचों की जरूरत
खिलाड़ियों को कोचिंग के लिए प्रशिक्षित कोचों की जरूरत (फोटो ईटीवी भारत जयपुर)

अवॉर्ड का इंतजार : राज्य के सर्वोच्च खेल पुरस्कार महाराणा प्रताप और प्रशिक्षकों को दिए जाने वाले गुरु वशिष्ठ अवार्ड का इंतजार भी बढ़ता जा रहा है. बीते 9 सालों से खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों को दिए जाने वाले इस अवार्ड को सरकारें भुला चुकी हैं. स्पोर्ट्स काउंसिल ने महाराणा प्रताप और गुरु वशिष्ठ अवार्ड देने के लिए कई बार आवेदन तो मांगे, लेकिन आवेदनों को ठंडे बस्ते में डाल दिया.