कारगिल हीरो कैप्टन योगेंद्र बोले- युवाओं की ताकत से 2037 से पहले विकसित राष्ट्र बन सकता है भारत
कारगिल हीरो ने कहा कि फिल्मी कलाकार हीरो नहीं हैं, बल्कि देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीद ही हमारे वास्तविक नायक हैं.

Published : May 31, 2026 at 3:59 PM IST
|Updated : May 31, 2026 at 4:20 PM IST
कुचामनसिटी: देश में सबसे कम उम्र में परमवीर चक्र हासिल करने वाले और कारगिल युद्ध के नायक कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का सपना देखा है. लेकिन देश के युवाओं में इतनी शक्ति, क्षमता और सामर्थ्य है कि भारत इससे पहले ही विकसित देशों की श्रेणी में शामिल हो सकता है.
कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव डीडवाना-कुचामन जिले के कुचामन सिटी में शहीदों के सम्मान में आयोजित राष्ट्र सेवा प्रेरणा एवं सम्मान समारोह को संबोधित कर रहे थे. कार्यक्रम में क्षेत्र के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गई और शहीद की वीरांगनाओं और उनके परिजनों का सम्मान किया गया. कार्यक्रम के दौरान पूर्व सैन्य अधिकारी कर्नल नंद किशोर ढाका ने कहा कि डीडवाना-कुचामन जिले की धरती वीरों की धरती रही है. प्रथम विश्व युद्ध से लेकर कारगिल युद्ध तक जिले के वीर सपूतों ने देश की रक्षा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है. अनेक जवानों ने राष्ट्र की सुरक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है.
पढे़ं. बानसूर के नीमूचणा नरसंहार की 101वीं बरसी आज, आंदोलन में फायरिंग में शहीद हुए थे 250 से अधिक किसान
उन्होंने कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव के शौर्य का उल्लेख करते हुए बताया कि कारगिल युद्ध के दौरान महज 19 वर्ष की आयु में उन्होंने अदम्य साहस का परिचय दिया. हाथों और पैरों में गोलियां लगने के बावजूद उन्होंने अपने कर्तव्य का निर्वहन जारी रखा. उनकी इसी वीरता के लिए उन्हें देश के सर्वोच्च सैन्य सम्मान परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया और सबसे कम उम्र में यह सम्मान प्राप्त करने का गौरव हासिल हुआ.
मीडिया से बातचीत में कैप्टन योगेंद्र सिंह यादव ने कहा कि वर्तमान समय तकनीक का युग है और आधुनिक युद्धों में तकनीक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो गई है. इसी तकनीकी क्षमता और रणनीतिक दक्षता के दम पर भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में सफलता हासिल की. देश के युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी को रील और रियल के बीच का अंतर समझना चाहिए. फिल्मी कलाकार हमारे हीरो नहीं हैं, बल्कि देश के लिए अपने प्राण न्योछावर करने वाले शहीद ही हमारे वास्तविक नायक हैं. युवाओं को उनके जीवन से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभानी चाहिए.

