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राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा ने किया राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का घेराव, जनगणना 2027 में ओबीसी के लिए अलग कॉलम की मांग

जनगणना 2027 में ओबीसी के लिए अलग कॉलम की मांग को लेकर राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा ने राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का घेराव किया.

NATIONAL OBC FRONT
प्रदर्शनकारी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : June 4, 2026 at 5:09 PM IST

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रांची: झारखंड में 2027 की जनगणना में आदिवासियों के लिए अलग सरना धर्म कोड की मांग के बाद अब पिछड़े वर्ग (OBC) समुदाय ने भी अपनी अलग पहचान की मांग तेज कर दी है. राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का घेराव कर प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार पर ओबीसी आबादी के अधिकारों की अनदेखी का आरोप लगाया.

ओबीसी के लिए अलग कोड की मांग

राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा के आह्वान पर बुधवार को सैकड़ों प्रदर्शनकारी ओल्ड विधानसभा से राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग कार्यालय तक आक्रोश मार्च निकालकर पहुंचे. मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने अलग से “ओबीसी कोड” देने की मांग को लेकर नारेबाजी की और आयोग अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा.

ओबीसी मोर्चा के नेताओं का बयान (ETV Bharat)

मोर्चा अध्यक्ष का केंद्र पर आरोप

राष्ट्रीय ओबीसी मोर्चा के अध्यक्ष राजेश गुप्ता ने प्रदर्शन के दौरान कहा कि केंद्र सरकार जानबूझकर देश की 52 प्रतिशत ओबीसी आबादी को “अन्य” श्रेणी में डालकर उनके हकों की हकमारी कर रही है. उन्होंने पूछा, “जब अनुसूचित जाति-जनजाति (SC-ST) की सामाजिक और आर्थिक स्थिति की जानकारी ली जा रही है, तो ओबीसी समाज की स्थिति का आंकड़ा क्यों नहीं लिया जा रहा? जनगणना के पहले चरण में कच्चा-पक्का मकान, कमरों की संख्या जैसी जानकारियां SC-ST के लिए ली जा रही हैं, तो ओबीसी के लिए क्यों नहीं?”

राजेश गुप्ता ने चेतावनी दी कि यदि जनगणना में ओबीसी का वास्तविक डेटा नहीं लिया गया तो उनके लिए अलग योजनाएं बनाने और अधिकार सुनिश्चित करने में बड़ी दिक्कत आएगी. उन्होंने इसे “साजिश” करार देते हुए कहा कि सरकार जातीय जनगणना के बावजूद पिछड़े समाज की समस्याओं को छिपाने की कोशिश कर रही है.

National OBC Front
प्रदर्शनकारी (ETV Bharat)

महिला मोर्चा की नाराजगी

प्रदेश ओबीसी महिला मोर्चा की अध्यक्ष उर्मिला यादव ने महिलाओं के अधिकारों को लेकर केंद्र की नीतियों पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, “नारी शक्ति वंदन अधिनियम में भी ओबीसी को छला गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को ओबीसी की गिनती पर स्पष्ट बताना चाहिए.”

उर्मिला यादव ने यह भी कहा कि एक पिछड़े वर्ग से आने वाले प्रधानमंत्री की सरकार में ही ओबीसी के साथ हकमारी की साजिश रची जा रही है, जिसका विरोध करने के लिए वे सड़क पर उतरे हैं.

मांग का आधार

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि SC-ST की तरह ओबीसी के लिए भी अलग कोड बनाए जाने से उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति का सही आकलन हो सकेगा और लक्षित योजनाओं का लाभ सही लोगों तक पहुंच सकेगा. फिलहाल जनगणना में ओबीसी को सामान्य श्रेणी में रखकर डेटा एकत्र किए जाने से उनकी वास्तविक संख्या और पिछड़ेपन का पता नहीं चल पाएगा.

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