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नेशनल डॉक्टर्स डे: जब मरीज ही बन जाता है पहली प्राथमिकता, तब डॉक्टर भूल जाते हैं अपनी थकान

आज नेशनल डॉक्टर्स डे है. मरीजों को नया जीवन दान देने वाले डॉक्टर्स कैसे अपनी चुनौतियों से निपटते हैं. आइए जानते हैं.

DR VISHNU JINJA
डॉ. विष्णु जिंजा (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Haryana Team

Published : July 1, 2026 at 8:20 PM IST

3 Min Read
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चंडीगढ़: अस्पतालों में डॉक्टरों को अक्सर मरीजों का इलाज करते हुए देखा जाता है, लेकिन उनके सफेद कोट के पीछे छिपी मेहनत, संघर्ष और त्याग बहुत कम लोगों तक पहुंच पाता है. उत्तर भारत के सबसे बड़े चिकित्सा संस्थानों में शामिल पीजीआई चंडीगढ़ के रेजिडेंट डॉक्टर ऐसे ही हजारों मरीजों की जिंदगी बचाने के लिए दिन-रात ड्यूटी निभा रहे हैं. कई बार 24 से 36 घंटे तक लगातार काम करने के बावजूद उनकी प्राथमिकता सिर्फ मरीज होता है. नेशनल डॉक्टर्स डे के अवसर पर ऑल रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (ARD) के अध्यक्ष डॉ. विष्णु जिंजा से विशेष बातचीत में डॉक्टरों की जिंदगी का वह पक्ष सामने आया, जिसे आम लोग शायद ही देख पाते हैं.

कई बार बिना खाना खाए करना पड़ता है कामः डॉ. विष्णु जिंजा ने बताया कि "इमरजेंसी, आईसीयू और ऑपरेशन थिएटर में समय का कोई निश्चित हिसाब नहीं होता. कई बार खाना खाने या कुछ देर आराम करने का भी मौका नहीं मिलता. मरीज की हालत गंभीर हो तो डॉक्टर घंटों बिना रुके उसकी जान बचाने में लगे रहते हैं."

नेशनल डॉक्टर्स डे (ETV Bharat)

'मरीजों के परिवार की मुस्कान ही सबसे बड़ी खुशी': डॉ. जिंजा का कहना है कि "इलाज सफल होने पर मरीज और उसके परिवार की मुस्कान ही उनकी सबसे बड़ी खुशी होती है. लेकिन जब कोई मरीज अस्पताल बहुत देर से पहुंचता है और तमाम कोशिशों के बावजूद उसे बचाया नहीं जा पाता, तो उसका दर्द डॉक्टर भी लंबे समय तक महसूस करते हैं." उनका कहना है कि "अस्पतालों में आने वाले कई गंभीर मरीजों की बीमारी समय रहते रोकी जा सकती थी, यदि उन्होंने अपनी जीवनशैली पर ध्यान दिया होता."

बिना आराम लंबी ड्यूटी आसान नहींः हालांकि डॉक्टरों ने यह भी स्वीकार किया कि भारी कार्यभार के कारण वे स्वयं भी कई बार इन नियमों का पालन नहीं कर पाते हैं. लगातार लंबी ड्यूटी, रातभर जागना और मरीजों की जिम्मेदारी के बीच उनके लिए नियमित भोजन, पर्याप्त नींद और व्यायाम करना आसान नहीं होता. लेकिन इस बीच प्रशासन को डॉक्टरों के पक्ष को देखते हुए उन्हें राहत देनी चाहिए. ताकि वे मरीज के साथ-साथ अपने शरीर का ध्यान रख पाए.

संतुलित खान-पान, स्वस्थ जीवनशैली जरूरीः नेशनल डॉक्टर्स डे सिर्फ डॉक्टरों का सम्मान करने का दिन नहीं है, बल्कि यह याद दिलाने का अवसर भी है कि डॉक्टर अपना कर्तव्य पूरी निष्ठा से निभाते हैं, लेकिन अच्छी सेहत की जिम्मेदारी हर व्यक्ति को खुद भी उठानी होगी. सही समय पर जांच, संतुलित खान-पान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर न केवल खुद को सुरक्षित रखा जा सकता है, बल्कि अस्पतालों पर बढ़ते दबाव को भी कम किया जा सकता है.

चीनी और तली-भुनी चीजों से बनाएं रखें: डॉक्टर विष्णु ने सलाह देते हैं कि "जंक फूड कम खाएं, चीनी और तली-भुनी चीजों से दूरी रखें, प्राकृतिक भोजन अपनाएं और रोज कम से कम 30 मिनट व्यायाम करें." उनका मानना है कि "स्वस्थ जीवनशैली कई गंभीर बीमारियों का खतरा काफी हद तक कम कर सकती है."

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