नेशनल डॉक्टर्स डे पर कांकेर के चिकित्सक भेषज रामटेके की कहानी, 23 साल से लोगों को जीवन किया समर्पित, सेवा की बनाई मिसाल
नेशनल डॉक्टर्स डे पर कांकेर अंतागढ़ के चिकित्सक भेषज कुमार रामटेके की अनोखी कहानी आज चर्चा का विषय बन गई है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : July 1, 2026 at 4:00 PM IST
कांकेर: राष्ट्रीय डॉक्टर्स दिवस के अवसर पर आज हम आपको ऐसे चिकित्सक की कहानी दिखाने जा रहे हैं, जिनका नाम और कर्म दोनों एक-दूसरे के पर्याय बन गए हैं. संस्कृत में ‘भेषज’ का अर्थ होता है औषधि या रोगों का इलाज करने वाला. कांकेर जिले के नक्सल प्रभावित अंतागढ़ क्षेत्र में पिछले 23 वर्षों से सेवा दे रहे खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. भेषज कुमार रामटेके ने अपने नाम के अर्थ को अपने जीवन में साकार किया है. उन्होंने केवल मरीजों का इलाज नहीं किया, बल्कि दुर्गम क्षेत्रों में रहकर हजारों लोगों का विश्वास भी जीता है. उन्होंने डॉक्टर धर्म का निर्वाह किया है.
साल 2003 से अंतागढ़ में दे रहे सेवा
1 अप्रैल 2003 को डॉ. भेषज कुमार रामटेके की पदस्थापना अंतागढ़ विकासखंड अस्पताल में हुई थी. उस समय अस्पताल में मरीजों की संख्या बेहद कम थी और ग्रामीण अस्पताल में भर्ती होने से भी कतराते थे. ऐसे हालात में उन्होंने अस्पताल तक मरीजों के आने का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद गांव-गांव जाकर लोगों के बीच भरोसा कायम किया.
चकित्सा मानव सेवा- भेषज कुमार रामटेके
शुरुआती दिनों में वे साइकिल से दूर दराज के गांवों तक पहुंचते थे. बरसात के मौसम में उफनते नालों और अस्थायी लकड़ी के पुलों को पार कर ग्रामीणों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था. कई बार घंटों की कठिन यात्रा के बाद मरीजों का उपचार कर वे उसी रास्ते से वापस लौटते थे. उनके लिए चिकित्सा सेवा केवल नौकरी नहीं, बल्कि मानव सेवा का मिशन था.

आपात स्थिति में दी सेवाएं
समय के साथ अंतागढ़ क्षेत्र के लोगों का भरोसा उन पर बढ़ता गया. नक्सल प्रभावित इलाके में सेवा के दौरान उन्होंने कई चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना किया. नक्सली घटनाओं में घायल सुरक्षा बल के जवानों का उपचार करने से लेकर जरूरत पड़ने पर घायल नक्सलियों का भी इलाज किया. उनके लिए हर मरीज सबसे पहले एक इंसान था और चिकित्सा उनका धर्म.

जनता की मांग पर तीन बार रुका तबादला
डॉ. रामटेके का तीन बार स्थानांतरण भी हुआ, लेकिन हर बार क्षेत्र की जनता उनके समर्थन में खड़ी हो गई. ग्रामीणों के विरोध और जनभावनाओं को देखते हुए उनके तबादले रोके गए. यह सम्मान किसी पद या आदेश से नहीं, बल्कि वर्षों की निस्वार्थ सेवा और जनता के विश्वास से मिला.


डॉक्टर दिवस पर डॉ. भेषज कुमार रामटेके की कहानी यह संदेश देती है कि एक सच्चा चिकित्सक केवल बीमारियों का उपचार नहीं करता, बल्कि समाज में विश्वास और उम्मीद भी जगाता है.भेषज नाम का अर्थ है औषधि और जीवन का अर्थ बन गया है मानव सेवा. अंतागढ़ के दुर्गम इलाकों में 23 वर्षों से लगातार सेवा दे रहे डॉ. भेषज कुमार रामटेके आज चिकित्सा सेवा, समर्पण और मानवता की मिसाल बन चुके हैं. डॉक्टर दिवस पर ऐसे समर्पित चिकित्सक को शत-शत नमन.

