देश के लाखों एथलीटों को डोपिंग से बचाएगा मोबाइल एप, नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी की ईजाद
नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी नाडा ने एक मोबाइल एप Know your medicine ईजाद किया है

By ETV Bharat Uttar Pradesh Team
Published : March 2, 2026 at 9:03 PM IST
लखनऊ: देश के लाखों एथलीटों को प्रतिबंधित दवाओं के सेवन से बचाने के लिए नेशनल एंटी डोपिंग एजेंसी नाडा ने एक मोबाइल एप ईजाद किया है. इस एप के जरिए एथलीट अगर कोई भी दवा या सप्लीमेंट ले रहा है, तो ऐप बता देगा कि इसमें कौन सी दवा प्रतिबंधित है. इस एप का नाम Know your medicine (KYM) है.
लॉस एंजेल्स ओलंपिक 2028 में क्रिकेट की भागीदारी को देखते हुए भारत के लिए नाडा का यह प्रयास और महत्वपूर्ण हो जाते हैं. ओलंपिक और एशियाड दोनों में क्रिकेट के आ जाने से अब डोपिंग एजेंसियों की नजर क्रिकेटरों पर भी होगी. इसलिए जूनियर स्तर पर क्रिकेटरों को डोपिंग के विषय में महत्वपूर्ण जानकारियां दी जानी बहुत जरूरी है.
लखनऊ में खेली गई अखिल भारतीय महिला तीरंदाजी प्रतियोगिता के दौरान नाडा के काउंसलर योगेश कुमार ने यह महत्वपूर्ण जानकारियां ईटीवी भारत को दीं. उन्होंने बताया कि नाडा का उद्देश्य है कि फेयर प्ले हो. निष्पक्ष तरीके से खेल खेले जाएं. जिसके लिए जरूरी है कि सभी एथलीटों को जूनियर स्तर से यह पता हो कि कौन सी दवा उनको लेनी है, कौन सी नही और किस तरह के एनर्जी बूस्टर का इस्तेमाल करना है, जिसमें कोई प्रतिबंधित दवा ना हो. इसलिए हम लोगों ने नो योर मेडिसिन नाम का एक मोबाइल ऐप शुरू किया है. जो गूगल प्ले स्टोर पर मौजूद है.
इस ऐप में जैसे ही आप दवा या सप्लीमेंट का नाम सर्च करेंगे तो आपको यह बता देगा कि दवा प्रतिबंधित है या नहीं, यहां से जानकारी लेकर खिलाड़ी अपनी दवाओं और सप्लीमेंट को जारी रख सकते है या बंद कर सकते हैं.
योगेश ने बताया कि किसी भी खाद्य पदार्थ में इस तरह की कोई चीज नहीं होती जो प्रतिबंधित हो. यह केवल दवाओं, सप्लीमेंट वगैरह पर लागू होता है. उन्होंने बताया कि खिलाड़ियों को हमेशा कोई भी दवा बिना किसी जानकारी के नहीं लेनी चाहिए, वह चाहे कोई भी दे रहा हो. किसी पर भी भरोसा मत कीजिए. दवा लेने से पहले नो योर मेडिसिन ऐप पर जाइए, उसके बारे में जानकारी लीजिए फिर दवा का इस्तेमाल कीजिए.
लॉस एंजेल्स ओलंपिक में क्रिकेट के शामिल होने के बाद देश के लाखों क्रिकेटर एंटी डोपिंग प्रोसीजर के अंदर आ जाएंगे. इसको लेकर उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल सही बात है. मैं तो कहता हूं जूनियर स्तर पर नहीं स्कूलों में भी इस संबंध में कम से कम एक लेसन जरूर होना चाहिए. जिसके जरिए बच्चों को पता चल सके कि डोपिंग क्या होती है और इससे कैसे बचा जा सकता है.
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