ETV Bharat / state

नरसिंहपुर में स्कूल भवन जर्जर, खुले आसमान में पढ़ाई करने को मजबूर छात्र

नरसिंहपुर में स्कूल की बिल्डिंग जर्जर होने के चलते कड़कड़ाती ठंड में खुले आसमान के नीचे छात्र पढ़ाई करने को मजबूर.

narsinghpur govt School Buildings Dilapidated
नरसिंहपुर में खुले आसमान के नीचे छात्र पढ़ाई करने को मजबूर (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team

Published : January 3, 2026 at 4:24 PM IST

2 Min Read
Choose ETV Bharat

नरसिंहपुर: मध्य प्रदेश के शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के गृह जिले नरसिंहपुर से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है. यहां चीचली ब्लॉक में एक सरकारी स्कूल की इमारतें जर्जर होने के कारण छात्र खुले आसमान के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर हैं. स्कूल में नौनिहालों को गर्मी, बारिश और ठंड में बाहर पढ़ने पर मजबूर होना पड़ रहा है.

खुले आसमान में पढ़ने को मजबूर छात्र

पूरा मामला नरसिंहपुर जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर चीचली ब्लॉक के बरखेड़ा प्राथमिक स्कूल से सामने आई है. जहां 21वीं सदी में छात्र खुले आसमान के नीचे पढ़ाई करने को मजबूर हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि स्कूल की बिल्डिंग पूरी तरह जर्जर होने के कारण बच्चे कड़कड़ाती ठंड में बाहर बैठकर पढ़ाई करने को विवश है. नौनिहालों को मिड-डे-मील सहित सभी सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है.

नरसिंहपुर में स्कूल भवन जर्जर हालत में (ETV Bharat)

अव्यवस्थाओं के बीच पढ़ रहे नौनिहाल

बरखेड़ा प्राथमिक स्कूल के अतिथि शिक्षक राजेंद्र मेहरा ने बताया कि "स्कूल की इमारतें जर्जर होने के चलते बच्चों को खुले आसमान में पढ़ाया जा रहा है. बिल्डिंग की छत टूट कर गिर रही है, जिसके चलते छात्रों को अंदर नहीं बैठने दिया जा रहा है. स्कूल में 35 नौनिहाल पढ़ते हैं, जो करीब एक साल से बाहर बैठकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं."

जल्द इमारतों की मरम्मत का आश्वासन

जिला शिक्षा अधिकारी प्रतुल इन्दुराख्या ने बताया कि "बीआरसी चीचली से हमने बात की है, इमारत की मरम्मत के लिए राशि सेंकशन हो चुकी है, लेकिन टेक्निकल समस्याओं के कारण उनके खाते में रुपए ट्रांसफर नहीं हो सका है. जल्द ही स्कूल की इमारत का मरम्मत कराया जाएगा. फिलहाल जर्जर भवन होने के चलते बच्चों को बाहर बैठाया जा रहा है."

चीचली ब्लॉक के बरखेड़ा प्राथमिक शाला के बीआरसी डी के पटेल ने बताया कि "शाला के मरम्मत कार्य के लिए राशि स्वीकृत कर दी गई है, जोकि लगभग 75 हजार रुपए है. इस काम को शाला प्रबंधन समिति द्वारा एक महीने में पूरा कर लिया जाएगा." मध्य प्रदेश में शिक्षा का बजट भले ही 36 हजार करोड़ कर दिया गया हो, लेकिन स्कूलों की भवनों और शिक्षकों की कार्यशैली में बदलाव दिखाई नहीं दे रहा है.