PMFME स्कीम से लोन लेकर रत्ना चौधरी ने बदली किस्मत, सालभर में आत्ननिर्भर
नर्मदापुरम की रत्ना चौधरी ने बेकरी प्रोडक्ट तैयार कर कैसे खुद को आत्मनिर्भर बनाया. कहानी प्रेरणादायक है. संवाददाता देवेंद्र वैश की रिपोर्ट.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : June 3, 2026 at 4:13 PM IST
|Updated : June 3, 2026 at 5:23 PM IST
नर्मदापुरम : शहर के सेठानी घाट पर आम महोत्सव की धूम. इसमें 40 किस्मों के आम के अलावा आम से बने बेकरी प्रोडक्ट भी लोगों की पसंद बने हुए हैं. प्रदर्शनी में लगे आत्मनिर्भर काउंटर पर नर्मदापुरम की रत्ना चौधरी ने आम से बने बेकरी प्रोडक्ट का काउंटर लगाया है. इसमें आइसक्रीम, चॉकलेट, मिठाई, केक सहित अन्य प्रोडक्ट आम से बनाए गए हैं.
रत्ना चौधरी ने दो लोगों को रोजगार दिया
ईटीवी भारत से खास बातचीत में रत्ना चौधरी ने बताया "पहले वह बेकरी प्रोडक्ट का काम घर से करती थीं. उद्यानिकी विभाग से मिले ढाई लाख रुपए के पीएमएफएमई (PMFME) लोन से उन्हें काफी सहायता मिली. उन्होंने कई इक्यूपमेंट खरीदे और अपने व्यापार को बढ़ाया. इसके जरिए वह आत्मनिर्भर हो गई हैं. अब अन्य दो लोगों को रोजगार भी दे रही हैं. पहले छोटे रूप में बेकरी प्रोडक्ट का काम घर से करती थी. एक्यूपमेंट की कमी थी. काम में समय भी ज्यादा लगता था. लेकिन अब काम करने में मजा आ रहा है."
ढेर सारे प्रोडक्ट बनाती हैं रत्ना चौधरी
रत्ना चौधरी बताती हैं "ढाई लाख रुपए का लोन नवंबर 2025 में लिया. इससे एडवांस्ड इक्विपमेंट खरीदे, जिससे मेरा काम आसान हो गया. प्रोडक्ट में फिनिशिंग आने लगी. आम महोत्सव के दौरान प्रोडक्ट में बेकरी प्रोडक्ट में आम से बनी वस्तुओं की प्रदर्शनी लगाई, जिसमें सिर्फ मैंगो फ्लेवर के बनाए गए प्रोडक्ट रखे गए हैं. वह शाम को रोड साइड स्टॉल लगाती हैं. ये सारी चीज एगलेस हैं. केमिकल का उपयोग नहीं किया गया. इन वस्तुओं की उपयोगिता 3 से 5 दिन होती है. इन वस्तुओं के अलावा बहुत सारे प्रोडक्ट भी हैं, जो नर्मदापुरम शहर में जो नई जनरेशन के लिए हैं."

नर्मदापुरम में विदेशी फ्लेवर का इंडियन टेस्ट
रत्ना चौधरी बताती हैं "जो प्रोडक्ट शहर में टेस्ट करने को भी नहीं मिलते, ऐसी चीजों को मैं नई जनरेशन को रोडसाइड टेस्ट कराती हूं. कई सारे फॉरेन फ्लेवर हैं, जिन्हें इंडियन के आम के फ्लेवर में इन्फ्यूज किया है. हम बहुत सारी चीजें क्रिएटिव कर सकते हैं. मार्केट में जो आइसक्रीम हैं, वह एक तरह से हाइड्रोजेनिटिव होती हैं. हमारी जो आइसक्रीम है, इसमें पूरे इनग्रेडिएंट है, मिल्क प्रोडक्ट है, फ्रेश आम लिया गया है."

उद्यानिकी विभाग लोन दिलाने में मदद करता है
सीनियर हॉर्टिकल्चर डेवलपमेंट ऑफिसर विजया ने बताया "एक ग्रुप के माध्यम से समूह की महिलाओं के माध्यम से कैंपेन किया. इसमें पीएमएफएमई योजना के प्रति जागरूक किया गया. उसी के जरिए रत्ना जी से मुलाकात हुई थी. फूड प्रोसेसिंग की कला बहुत इंटरनल होती है, जो इंटरेस्टेड होते हैं, वहीं इस काम को कर पाते हैं. रत्ना जी अच्छे से प्रोडक्ट कर रही हैं जो ब्लॉक लेवल पर काम करती हैं. यह बेकरी प्रोडक्ट पर काम करती हैं. एक्सटेंशन करने के दौरान इन्हें बैंक प्रपोजल तैयार कर लोन की पूरी प्रक्रिया कर, स्कीम के तहत उद्यानिकी विभाग ने लोन कराया. लोन के जरिए बड़ा रेफ्रिजरेटर सहित अन्य सामान खरीदा."
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PMFME स्कीम के तहत ले सकते हैं लोन
विजया ने सभी से अपील की है "आजकल जो युवा आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं, वे प्रधानमंत्री खाद्य सूक्ष्म उद्यम उन्नयन योजना (PMFME) के तहत आवेदन कर सकते हैं. हॉर्टिकल्चर विभाग द्वारा ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से इसके लिए एप्लाई किया जा सकता हैं. इस योजना में अधिकतम अनुदान राशि 10 लाख रुपए तक है. एग्रीकल्चर से जुड़े हुए लोग इसके फंड के माध्यम से ब्याज दर की छूट पा सकते हैं."

