पचमढ़ी के जटाशंकर मंदिर में त्रिशूल पर नागदेव का सर्कस, शिव भक्त मांगने लगे आशीर्वाद
जटाशंकर मंदिर में नागदेव का स्वच्छंद विचरण देख श्रद्धालु रोमांचित. भगवान शिव का आशीर्वाद समझ करने लगे पूजा-पाठ.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : June 30, 2026 at 7:30 PM IST
पचमढ़ी (नर्मदापुरम): पचमढ़ी के मशहूर जटाशंकर मंदिर में त्रिशूल पर एक नागदेवता आकर लिपट गए. ये देखकर श्रद्धालु रोमांचित हो गए. लोगों ने वीडियो बनाने शुरू कर दिए. कई श्रद्धालु इसे महादेव की कृपा बताने लगे. ये नागदेव शिवलिंग पर लगे त्रिशूल के ऊपर चढ़कर लिपटे रहे. मंदिर में आए सैकड़ों श्रद्धालुओं के बीच ये दृश्य कौतूहल का विषय बन गया. नागदेव काफी देर तक त्रिशूल के ऊपर चढ़े रहे. इसके बाद शिवलिंग और गणेश मूर्ति पर के पास टहलते रहे. कई श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में लगे त्रिशूल के पास पूजा-पाठ शुरू कर दिया. कई लोग हाथ जोड़कर नागदेवता के दर्शन कर मनोकामना पूर्ति का आशीर्वाद मांगते हुए भी देखे गए.
पचमढ़ी की पहाड़ियों पर छोटी-छोटी सुरंगें
मंदिर प्रबंधन के लोगों ने ने बताया कि जिस स्थान पर शिवलिंग है, वहां नीचे एक छोटी सुरंग है जो पत्थरों के बीच में से कहीं निकलती है. इसी सुरंग से सांप निकाल कर ऊपर आ गया. सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के सर्पम मित्र देवा ने बताया "जटाशंकर जहरीले जीव जंतुओं का क्षेत्र है. पहाड़ों के बीच में कई छोटी सुरंगें हैं, जिसमें कई जहरीले जीव-जंतु रहते हैं जो समय-समय पर बाहर आ जाते हैं. यह धामन सांप था, जो जहरीला नहीं होता. यह पेड़ या ऊंचे स्थानों पर चढ़ने में माहिर होता है. सांप भोजन की तलाश में पोल में से निकलकर बाहर आ गया. हालांकि यह प्रकृति का सांप है, लेकिन कई बार लोगों से अपनी सुरक्षा के लिए यह हमला कर देता है."
जटाशंकर में दिखती हैं शिव की जटाएं
सतपुड़ा की वादियों में गुफा के अंदर बना जटाशंकर मंदिर पूरे देश में शिव भक्तों की आस्था का केंद्र है. यहां प्राकृतिक शिवलिंग बने हुए हैं. पौराणिक कथाओं के अनुसार वरदान पाकर भस्मासुर भगवान शिव को भस्म करने के लिए उनके पीछे दौड़ा था. तब भस्मासुर से बचने के लिए भगवान शिव ने पचमढ़ी की जटाशंकर, बड़ा महादेव, गुप्त महादेव, छोटा महादेव, चौरागढ़ में शरण ली थी. कथाओं के अनुसार भगवान महादेव ने जटाशंकर की गुफा में अपने बाल खोले थे. इस गुफा में लगातार पानी की बूंदे रिसती रहती हैं.
मुख्य शिवलिंग के साथ 108 शिवलिंग
प्राकृतिक शिवलिंग पर पानी की बूंदें लगातार गिरती हैं, जो भगवान शिव का अभिषेक करती हैं. यह बूंदें चट्टानों से टपकती हुई शंकर जी की जटाओं जैसी दिखती है. इसलिए इसे जटाशंकर धाम कहां जाता है. जटाशंकर में मुख्य शिवलिंग के साथ 108 प्राकृतिक रूप से शिवलिंग बने हुए हैं. जिन पर लगातार पानी की बूंदें टपकती रहती है. गुफा मंदिर में हमेशा ठंडा वातावरण रहता है. पचमढ़ी के दूसरे स्थान की अपेक्षा यहां 5 से 10 डिग्री तापमान कम रहता है.

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जटाशंकर में निकली गुप्त गंगा
जटाशंकर मंदिर के अंदर गुफा में एक जलधारा बहती है, जिसे गुप्त गंगा कहा जाता है. जटाशंकर मंदिर में सालभर श्रद्धालुओं के दर्शन करने का सिलसिला लगा रहता है. महाशिवरात्रि और नागद्वारी मेले के मौके पर हजारों लोग दर्शन करने आते हैं. सालभर में 7 से 8 लाख श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं. मान्यताओं के अनुसार जटाशंकर में भगवान शंकर अपने भक्तों की मनोकामना पूरी करते हैं. मनोकामना पूरी होने के बाद भक्त यहां भगवान शिव को जल अर्पित करने आते हैं.

